गुमला के बसिया में अनूठी पहल एकलव्य मॉडल स्कूल के घर से दूर रह रहे 350 छात्रों को शिशु विद्या मंदिर की बहनों ने बांधी राखी
विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर की बहनों ने एकलव्य मॉडल स्कूल के छात्रों संग मनाया स्नेह का पर्व।

गुमला के बसिया में विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर की दसवीं कक्षा की छात्राओं ने एकलव्य मॉडल स्कूल पहुंचकर एक सराहनीय पहल की है। बहनों ने हॉस्टल में रह रहे 19 जिलों के 350 छात्रों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। घर से दूर रह रहे इन छात्रों के लिए यह पल बेहद भावुक और खुशियों से भरा रहा।
- गुमला के बसिया में विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर की दसवीं की बहनों ने एकलव्य मॉडल स्कूल के छात्रों को राखी बांधी।
- संस्थान के कुल 350 छात्रों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और समृद्धि की कामना की गई।
- एकलव्य मॉडल स्कूल के हॉस्टल में झारखंड के 19 जिलों से आए छात्र रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
- त्योहार पर घर न जा पाने वाले छात्रों के चेहरे पर इस आत्मीय पहल से मुस्कान और खुशी बिखर गई।
- कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य अभिमन्यु महतो द्वारा मां भारती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई।
- एकलव्य स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह ने बहनों और आचार्यों को उपहार देकर सम्मानित किया।
झारखंड के गुमला जिले के बसिया प्रखंड से सामाजिक सौहार्द और भाई-बहन के अटूट प्रेम की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, बसिया की बहनों ने एक अनोखी और सराहनीय पहल की। विद्यालय की दसवीं कक्षा की छात्राओं ने सोलंगबीरा स्थित एकलव्य मॉडल स्कूल पहुंचकर वहां रह रहे सैकड़ों छात्रों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया। इस दौरान पूरा परिसर भाई-बहन के पवित्र प्रेम और उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया।
घर से दूर रह रहे छात्रों के जीवन में घुली खुशियां
एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, सोलंगबीरा में झारखंड के विभिन्न सुदूरवर्ती क्षेत्रों के बच्चे रहकर शिक्षा ग्रहण करते हैं। इस आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में राज्य के लगभग 19 जिलों के छात्र रहते हैं। भौगोलिक दूरी और विभिन्न कारणों से कई छात्र रक्षाबंधन जैसे बड़े त्योहारों पर भी अपने घर नहीं जा पाते हैं। त्योहार के दिन अपने परिवार और बहनों से दूर रहने का मलाल इन बच्चों के मन में न रहे, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर की बहनों ने यह कदम उठाया। जब बहनें राखी की थाली सजाकर हॉस्टल पहुंचीं, तो छात्रों की आंखें खुशी से छलक उठीं। बहनों ने एक-एक कर सभी 350 छात्रों के माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ मांगलिक कार्यक्रम का शुभारंभ
इस पावन कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ बेहद ही पारंपरिक और गरिमामय तरीके से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अभिमन्यु महतो ने मां भारती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर की। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच रक्षाबंधन उत्सव की शुरुआत हुई। छात्राओं ने पारंपरिक मंगल गीत गाकर पूरे वातावरण को भक्तिमय और आत्मीय बना दिया। विद्यालय के आचार्यों और प्रबंधन समिति के सदस्यों ने भी इस पुनीत कार्य में बहनों का मार्गदर्शन और सहयोग किया।
प्रधानाचार्य अभिमन्यु महतो का संदेश
इस विशेष अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला।
> प्रधानाचार्य अभिमन्यु महतो ने कहा: "एकलव्य मॉडल स्कूल के हॉस्टल में हमारे राज्य के 19 अलग-अलग जिलों से आए बच्चे पढ़ते हैं। त्योहारों के समय घर न जा पाने के कारण ये बच्चे अकेलापन महसूस न करें, इसी उद्देश्य से हमारी बहनों ने इनके साथ त्योहार मनाने का निर्णय लिया। यह पहल हमारी संस्कृति के मूल मंत्र 'वसुधैव कुटुंबकम' को चरितार्थ करती है।"
उपहार देकर किया गया बहनों का सम्मान
राखी बांधने की रस्म पूरी होने के बाद एकलव्य मॉडल स्कूल प्रबंधन की ओर से भी बेहद आत्मीय प्रतिक्रिया देखने को मिली। स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह और हॉस्टल अधीक्षक ने संयुक्त रूप से विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर की बहनों और उनके साथ आए आचार्यों का आभार व्यक्त किया। भाई का फर्ज निभाते हुए एकलव्य मॉडल स्कूल के छात्रों और प्रबंधन ने सभी बहनों को सुंदर उपहार भेंट किए। उपहार पाकर बहनों के चेहरे भी खिल उठे। पूरे परिसर में एक सकारात्मक और पारिवारिक ऊर्जा का संचार महसूस किया जा रहा था।
प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह ने जताया आभार
एकलव्य मॉडल स्कूल के प्रधानाध्यापक ने इस आयोजन को दोनों विद्यालयों के बीच के रिश्तों को मजबूत करने वाला बताया।
> प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह ने कहा: "रक्षाबंधन केवल धागे का त्योहार नहीं, बल्कि यह आपसी विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का पर्व है। विद्या मंदिर की बहनों ने यहाँ आकर हमारे बच्चों को जो स्नेह दिया है, वह शब्दों से परे है। इस स्नेह ने हमारे छात्रों को घर की कमी महसूस नहीं होने दी। हम इस सुंदर पहल के लिए विद्यालय परिवार के सदैव आभारी रहेंगे।"
सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित विद्यालय हमेशा से ही समाज में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। बसिया का यह आयोजन केवल एक रक्षाबंधन कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह सामाजिक समरसता की एक बड़ी मिसाल है। सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों और अलग-अलग जिलों से आए छात्रों के बीच इस तरह के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से बच्चों में आपसी जुड़ाव और राष्ट्रीय एकता की भावना सुदृढ़ होती है। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में दोनों विद्यालयों के शिक्षकों, शिक्षिकाओं और स्थानीय समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सत्य संदेश समाचार: त्योहारों की सार्थकता और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
बसिया की इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि त्योहार केवल व्यक्तिगत खुशियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रहे वनवासी क्षेत्र के बच्चों के बीच जाकर रक्षाबंधन मनाना एक अत्यंत संवेदनशील और सराहनीय कदम है। ऐसी पहल न केवल बच्चों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और समरसता की भावना को भी सुदृढ़ करती है। प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं को ऐसे आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देना चाहिए ताकि कोई भी बच्चा त्योहारों पर अकेलापन महसूस न करे।
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शिक्षा और संस्कारों का असली उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील बनना भी है। बसिया की इन बहनों ने जो राह दिखाई है, वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। हमारे आसपास कई ऐसे लोग हैं जो त्योहारों पर अपने परिवारों से दूर रहते हैं; उनके चेहरों पर मुस्कान लाना ही सच्ची मानवता है। आइए, हम सब भी अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर समाज के हर वर्ग को गले लगाएं और एक सशक्त, संवेदनशील समाज के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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