गुमला में भ्रामक दावों वाले 115 खाद्य उत्पादों पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई पतंजलि अमूल और रेड बुल समेत बड़े ब्रांड्स को बाजार से तुरंत हटाने का सख्त निर्देश
जिला प्रशासन ने भ्रामक दावों वाले उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

झारखंड के गुमला में खाद्य सुरक्षा विभाग ने भ्रामक प्रचार और मिस-लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों पर कड़ा रुख अपनाया है। प्रशासन ने पतंजलि, अमूल और रेड बुल जैसे बड़े ब्रांड्स के चिन्हित उत्पादों को बाजार से तुरंत हटाने के निर्देश दिए हैं। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- गुमला जिला प्रशासन ने FSSAI के निर्देश पर भ्रामक प्रचार और अमानक लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों को बाजार से वापस लेने का आदेश दिया है।
- अभिहित अधिकारी-सह-अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा) द्वारा इस संबंध में सख्त सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है।
- जांच के दायरे में पतंजलि, अमूल, फेरेरो इंडिया (किंडर जॉय), मैरिको (सफोला) और कई बड़े एनर्जी ड्रिंक्स ब्रांड्स शामिल हैं।
- नियमों की अनदेखी करने वाले व्यापारियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 52 और 53 के तहत कार्रवाई होगी।
- चैम्बर ऑफ कॉमर्स और गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रग्स एसोसिएशन को भी अभियान में सहयोग करने के लिए पत्र भेजा गया है।
झारखंड के गुमला जिले में आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले और भ्रामक दावों के सहारे उत्पाद बेचने वाले बड़े ब्रांड्स के खिलाफ प्रशासन ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली और झारखंड के अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर यह राज्यव्यापी सघन जांच व प्रवर्तन अभियान चलाया जा रहा है। गुमला के अभिहित अधिकारी-सह-अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा) ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर सभी व्यापारियों को चेतावनी दी है। इसके तहत चिन्हित 115 अमानक और मिस-लेबलिंग वाले उत्पादों को बाजार से तत्काल हटाने का निर्देश दिया गया है।
FSSAI की बड़ी कार्रवाई: भ्रामक दावों की खुली पोल
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बाजार में बिक रहे कई लोकप्रिय खाद्य उत्पादों की जांच के बाद पाया कि कंपनियां अपने फायदों को लेकर भ्रामक दावे कर रही हैं। इन उत्पादों की पैकेजिंग पर जो दावे किए जा रहे हैं, वे वास्तविक न्यूट्रिशन वैल्यू से मेल नहीं खाते हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गुमला जिले में सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs), वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे इन 115 चिन्हित उत्पादों के मौजूदा स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस (रिकॉल) लें।
जांच के घेरे में आए देश के बड़े और लोकप्रिय ब्रांड्स
FSSAI द्वारा जारी की गई सूची में देश-विदेश के कई नामी गिरामी ब्रांड्स और उनके रोजमर्रा के उत्पाद शामिल हैं, जो सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की सेहत से जुड़े हैं:
- पतंजलि फूड्स लिमिटेड: पतंजलि के प्रसिद्ध 'दूध बिस्कुट' को लेकर कंपनी द्वारा 100% आटा होने का दावा किया गया था, जो जांच में भ्रामक पाया गया है।
- फेरेरो इंडिया (किंडर जॉय): बच्चों के पसंदीदा चॉकलेट प्रोडक्ट किंडर जॉय में 'मिल्क सॉलिड्स' को लेकर किए गए दावे भ्रामक पाए गए हैं।
- मैरिको लिमिटेड (सफोला): सफोला 'टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल' के जरिए हृदय स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे दावों को भ्रामक माना गया है।
- एनर्जी व कैफीन युक्त पेय पदार्थ: इस सूची में युवाओं के बीच लोकप्रिय स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा एनर्जी और गैटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक शामिल हैं। इन कैफीनेटेड ड्रिंक्स पर बिना उचित नियमों के 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' नाम का इस्तेमाल किया जा रहा था।
- इमामी एग्रोटेक व अमूल: इमामी का 'हेल्दी एंड टेस्टी' तेल और अमूल की शुगर-फ्री आइसक्रीम भी जांच के घेरे में आई हैं।
- अन्य उत्पाद: बिस्लेरी (एडेड मिनरल्स का दावा), रॉ प्रेसर्री मैंगो ड्रिंक (बिना एडेड शुगर का भ्रामक दावा), मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई, डाबर हार्ट केयर सहित विभिन्न कंपनियों के ब्राउन ब्रेड, टोफू एवं बेबी फूड उत्पाद इस सूची में शामिल हैं।
गुमला चैम्बर ऑफ कॉमर्स और दवा विक्रेताओं को निर्देश
इस प्रतिबंध को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया है। इस संबंध में अध्यक्ष, चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, गुमला एवं अध्यक्ष/सचिव, गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रग्स एसोसिएशन को आधिकारिक पत्र प्रेषित किया गया है। प्रशासन ने इन व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे स्थानीय व्यापारियों और दवा विक्रेताओं के बीच व्यापक जागरूकता फैलाएं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले की किसी भी दुकान या मेडिकल स्टोर पर इन भ्रामक और अमानक उत्पादों की बिक्री न हो सके।
कानूनी प्रावधान: धारा 52 और 53 के तहत सख्त सजा
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। यदि कोई भी व्यापारी या संस्थान इन प्रतिबंधित उत्पादों को बेचते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 (गलत ब्रांडिंग के लिए जुर्माना) और धारा 53 (भ्रामक विज्ञापन के लिए जुर्माना) के तहत कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अभिहित अधिकारी-सह-अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा), गुमला ने कहा: "उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके भरोसे के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी विक्रेताओं को इन 115 उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकनी होगी, अन्यथा प्रशासन कड़ी कानूनी कार्रवाई के लिए बाध्य होगा।"
उपभोक्ताओं के लिए जिला प्रशासन की विशेष अपील
स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे खरीदारी करते समय सतर्क रहें। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे पैकेट पर लिखे चमत्कारी दावों और अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी वाले उत्पादों को खरीदने से बचें। खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे लगातार फील्ड विजिट करें और दुकानों का औचक निरीक्षण कर इन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करें।
सत्य संदेश समाचार: भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ बड़ी और जरूरी पहल
गुमला जिला प्रशासन और FSSAI की यह संयुक्त कार्रवाई उपभोक्ताओं के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक अत्यंत सराहनीय कदम है। अक्सर बड़ी कंपनियां आकर्षक विज्ञापनों के जरिए आम जनता को गुमराह कर अस्वस्थ उत्पाद बेचती हैं, जिस पर लगाम लगाना बेहद जरूरी था। हालांकि, इस प्रतिबंध को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर कड़ाई से लागू करना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को लगातार औचक निरीक्षण और सख्त निगरानी बनाए रखनी होगी ताकि कोई भी दुकानदार चोरी-छिपे इन उत्पादों को न बेच सके।
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