गुमला के भरनो में दर्दनाक हादसा पानी से भरी बाथरूम की टंकी में डूबने से दो मासूम बच्चों की मौत पूरे गांव में पसरा मातम
भरनो के लोंगा गांव में पानी से भरी टंकी में डूबने से दो मासूमों की मौत।

गुमला जिले के भरनो थाना क्षेत्र अंतर्गत लोंगा गांव में शनिवार शाम को एक बेहद दर्दनाक हादसा हुआ, जहां पानी से भरी बाथरूम की टंकी में डूबने से दो मासूम स्कूली बच्चों की मौत हो गई। इस हृदयविदारक घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
- गुमला के भरनो थाना क्षेत्र के लोंगा गांव में शनिवार शाम को घटित हुआ हृदयविदारक हादसा।
- घर के पास निर्माणाधीन बाथरूम की टंकी में डूबने से दो मासूम बच्चों की असमय मौत।
- मृतक बच्चों की पहचान अरमान अंसारी (9 वर्ष) और जैद अंसारी (5 वर्ष) के रूप में हुई।
- दोनों बच्चे राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोंगा के छात्र थे और आपस में गहरे दोस्त थे।
- लगातार हो रही बारिश के कारण खुले छोड़े गए गड्ढे में लबालब पानी भरा हुआ था।
- काफी खोजबीन के बाद टंकी के पास बच्चों की चप्पलें मिलीं, जिसके बाद दोनों के शव बरामद किए गए।
झारखंड के गुमला जिले से एक बेहद ही दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। भरनो थाना क्षेत्र के लोंगा गांव में शनिवार की शाम खेलते-खेलते दो मासूम बच्चों की जान चली गई। ये दोनों बच्चे घर के पास ही बनी पानी से लबालब भरी बाथरूम की टंकी में गिर गए, जिससे डूबने से उनकी मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल पीड़ित परिवार को बल्कि पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया है और हर आंख नम है।
खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गए दो मासूम दोस्त
लोंगा गांव निवासी मीनारुल अंसारी के पुत्र अरमान अंसारी (9 वर्ष) और जैद अंसारी (5 वर्ष) आपस में बहुत गहरे दोस्त थे। दोनों शनिवार की शाम को हमेशा की तरह एक साथ घर के बाहर खेल रहे थे। खेलते-खेलते दोनों बच्चे घर के समीप ही निर्माणाधीन बाथरूम की टंकी के पास चले गए। किसी को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि यह खेल उनके जीवन का आखिरी खेल साबित होगा।
निर्माणाधीन और खुली टंकी बनी काल
परिजनों ने घर के पास ही बाथरूम के लिए एक गहरा गड्ढा खुदवाया था, जिसमें ईंट की जोड़ाई का काम शुरू किया गया था। काम अधूरा होने के कारण इस टंकी को ऊपर से ढका नहीं गया था और इसे खुला ही छोड़ दिया गया था। पिछले कुछ दिनों से इलाके में हो रही लगातार और मूसलाधार बारिश के कारण इस खुले गड्ढे में काफी मात्रा में पानी जमा हो गया था। खेलते समय असावधानीवश दोनों बच्चे इस गहरे और पानी से भरे गड्ढे में गिर गए। पानी की गहराई अधिक होने और बाहर निकलने का कोई रास्ता न होने के कारण दोनों मासूम पानी में डूब गए और दम तोड़ने पर मजबूर हो गए।
चप्पलों से मिला सुराग और पसरा मातम
जब काफी देर तक दोनों बच्चे घर वापस नहीं लौटे और आसपास कहीं दिखाई नहीं दिए, तो परिजनों को चिंता सताने लगी। परिवार के सदस्यों ने गांव वालों के साथ मिलकर दोनों बच्चों की खोजबीन शुरू की। काफी खोजबीन के बाद भी जब बच्चों का कुछ पता नहीं चला, तो अचानक किसी की नजर निर्माणाधीन बाथरूम की टंकी के पास पड़ी। वहां दोनों बच्चों की चप्पलें पानी के किनारे पड़ी हुई थीं। चप्पलें देखकर परिजनों का दिल बैठ गया। तुरंत ही ग्रामीणों और परिजनों ने टंकी के पानी में खोजबीन शुरू की। जैसे ही पानी के भीतर से दोनों मासूमों के निष्प्राण शरीर बाहर निकाले गए, परिजनों के पैर तले जमीन खिसक गई।
मां और परिजनों की चीत्कार से कांपा पूरा गांव
दोनों मासूमों के शव मिलने की खबर जैसे ही गांव में फैली, पूरे लोंगा गांव में कोहराम मच गया। अरमान और जैद की माताओं का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी चीख-पुकार और दहाड़ मारकर रोने की आवाजें सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पूरा माहौल गमगीन हो गया और गांव के हर घर में चूल्हा तक नहीं जला।
स्कूली शिक्षा और बच्चों का भविष्य
मृतक बच्चों में अरमान अंसारी गांव के ही राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय लोंगा में कक्षा तीन का छात्र था। वहीं, छोटा बच्चा जैद अंसारी भी इसी विद्यालय में कक्षा एक में पढ़ता था, हालांकि अभी तक उसका आधिकारिक रूप से विद्यालय में नामांकन नहीं हो पाया था। दोनों बच्चों के शिक्षकों और सहपाठियों में भी इस घटना के बाद से गहरा शोक है। विद्यालय के शिक्षकों ने बच्चों को याद करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है।
ग्रामीणों ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा:
> "यह बेहद ही हृदयविदारक घटना है। बारिश के मौसम में खुले गड्ढे और टंकियां बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रही हैं। हमें अपने घरों के आसपास ऐसे खतरों के प्रति बेहद सजग रहने की जरूरत है।"
सत्य संदेश समाचार: लापरवाही और जागरूकता की कमी ने ली दो मासूमों की जान
गुमला के भरनो में हुई यह दर्दनाक घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे घरों के आसपास छोटी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकती है। निर्माणाधीन टंकियों, कुओं या गड्ढों को खुला छोड़ना सीधे तौर पर मौत को आमंत्रण देने जैसा है। स्थानीय प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के असुरक्षित निर्माण कार्यों के प्रति जागरूकता अभियान चलाना चाहिए। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना हर नागरिक की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मासूम बच्चों की सुरक्षा केवल उनके माता-पिता की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। हमारे आसपास यदि कहीं भी कोई गड्ढा, कुआं या निर्माणाधीन टंकी खुली पड़ी है, तो उसे तुरंत ढकने का प्रयास करें या संबंधित गृहस्वामी को इसके खतरों के प्रति सचेत करें। बारिश के इस मौसम में बच्चों को अकेले बाहर भेजने से बचें और उन पर निरंतर नजर बनाए रखें। आपकी थोड़ी सी सजगता किसी मासूम की जान बचा सकती है और किसी परिवार को उजड़ने से रोक सकती है।
सजग रहें, सुरक्षित रहें। इस हृदयविदारक घटना से सीख लेते हुए अपने आसपास के असुरक्षित स्थानों को सुरक्षित बनाने का संकल्प लें। इस खबर को अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करें ताकि अन्य लोग भी जागरूक हो सकें और अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। अपने विचार और सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
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