गुमला की बेटियों ने रचा इतिहास सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप में मिजोरम को हराकर तीसरी बार बनीं नेशनल चैंपियन
संत पैट्रिक स्कूल की बालिकाओं ने राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का मान बढ़ाया।

नई दिल्ली के आंबेडकर स्टेडियम में खेले गए 65वें सुब्रतो कप के फाइनल में गुमला की संत पैट्रिक स्कूल की टीम ने मिजोरम को 2-0 से हराकर तीसरी बार राष्ट्रीय खिताब जीता। इस ऐतिहासिक जीत पर उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने टीम और कोच बीना केरकेट्टा को बधाई दी। यह सफलता जिले की खेल प्रतिभाओं को नई राह दिखाएगी।
- संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की अंडर-17 बालिका फुटबॉल टीम ने 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया है।
- नई दिल्ली के डॉ. बी.आर. आंबेडकर स्टेडियम में खेले गए फाइनल मुकाबले में टीम ने मिजोरम की एनसीसी टीम को 2-0 से शिकस्त दी।
- गुमला की बेटियों ने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए तीसरी बार राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया है।
- उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने इस शानदार जीत के लिए खिलाड़ियों, कोच बीना केरकेट्टा और स्कूल प्रबंधन को बधाई दी है।
- इससे पूर्व गुमला की टीम ने वर्ष 2022 और वर्ष 2023 में भी क्रमशः मणिपुर और हरियाणा को हराकर खिताब जीता था।
झारखंड के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। गुमला जिले की प्रतिभावान बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाते हुए एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनके हौसले और कौशल का कोई सानी नहीं है। नई दिल्ली के प्रतिष्ठित डॉ. बी.आर. आंबेडकर स्टेडियम में आयोजित 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप के अंडर-17 बालिका वर्ग में झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रही संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब अपने नाम किया है। इस ऐतिहासिक मुकाबले में गुमला की बालिकाओं ने मिजोरम की मजबूत एनसीसी टीम को परास्त किया। इस जीत के साथ ही पूरे गुमला जिले और झारखंड राज्य में जश्न का माहौल है, और चारों ओर से खिलाड़ियों को बधाइयां मिल रही हैं।
फाइनल मुकाबले का रोमांचक सफर और खिताबी जीत
नई दिल्ली के डॉ. बी.आर. आंबेडकर स्टेडियम में 27 अगस्त को खेले गए फाइनल मुकाबले में गुमला की बेटियों ने मैदान पर उतरते ही आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। मिजोरम की एनसीसी टीम, जो अपने मजबूत डिफेंस के लिए जानी जाती है, गुमला की बालिकाओं की रणनीति के सामने बेबस नजर आई। गुमला की टीम ने पूरे मैच के दौरान गेंद पर अपना नियंत्रण बनाए रखा और शानदार पासिंग गेम का प्रदर्शन किया। बेहतरीन तालमेल और सटीक आक्रमण की बदौलत गुमला ने मैच में 2-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली। मिजोरम की टीम ने वापसी के कई प्रयास किए, लेकिन गुमला की मजबूत रक्षापंक्ति ने उनके हर हमले को नाकाम कर दिया। रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही गुमला की टीम ने तीसरी बार सुब्रतो कप की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा कर लिया।
स्वर्णिम इतिहास: खिताबी जीत की हैट्रिक
संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की इस टीम ने सुब्रतो कप के इतिहास में अपनी बादशाहत कायम कर ली है। यह पहला मौका नहीं है जब गुमला की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। टीम ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है:
- वर्ष 2022 (61वां संस्करण): इस वर्ष गुमला की टीम ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेरी थी। फाइनल मुकाबले में टीम ने मजबूत मणिपुर की टीम को 3-1 से शिकस्त देकर पहली बार सुब्रतो कप का खिताब अपने नाम किया था।
- वर्ष 2023 (62वां संस्करण): अपने खिताब की रक्षा करते हुए गुमला की बालिकाओं ने लगातार दूसरे वर्ष भी अपना दबदबा बनाए रखा। फाइनल में उन्होंने हरियाणा की टीम को एकतरफा मुकाबले में 3-0 से पराजित कर लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
- वर्ष 2026 (65वां संस्करण): दो साल के अंतराल और कड़ी मेहनत के बाद, टीम ने एक बार फिर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया। इस बार फाइनल में मिजोरम की टीम को 2-0 से हराकर उन्होंने तीसरी बार राष्ट्रीय चैंपियन का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया।
उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने दी बधाई और सराहा हौसला
इस ऐतिहासिक और गौरवशाली उपलब्धि पर गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने संत पैट्रिक स्कूल की पूरी टीम, उनकी कप्तान, कोच एवं प्रशिक्षक बीना केरकेट्टा तथा टीम के साथ जुड़े सभी सहयोगी सदस्यों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन को जिले के लिए एक युगांतरकारी क्षण बताया।
उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा:
> "गुमला की बेटियों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा, दृढ़ संकल्प, कड़े अनुशासन और उत्कृष्ट टीम भावना के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर जिले और पूरे झारखंड राज्य का नाम रोशन किया है। सुब्रतो कप जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर गुमला की बेटियों का तीसरी बार राष्ट्रीय चैंपियन बनना पूरे जिले के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। यह बड़ी उपलब्धि इस बात का जीवंत प्रमाण है कि हमारे जिले की बेटियों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की पूरी क्षमता और कौशल मौजूद है।"
कोच बीना केरकेट्टा के मार्गदर्शन और टीम के सामूहिक प्रयास की सराहना
उपायुक्त ने विशेष रूप से टीम की कोच और प्रशिक्षक बीना केरकेट्टा के कुशल मार्गदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक कुशल मार्गदर्शक के बिना इतनी बड़ी सफलता हासिल करना संभव नहीं था। बीना केरकेट्टा ने खिलाड़ियों को न केवल तकनीकी रूप से मजबूत बनाया, बल्कि उनके भीतर मानसिक सुदृढ़ता और जीतने का जज्बा भी भरा।
उपायुक्त ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा:
> "इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे खिलाड़ियों की दिन-रात की कड़ी मेहनत, उनका निरंतर अभ्यास और कोच बीना केरकेट्टा का बेहतरीन मार्गदर्शन है। इसके साथ ही, इस बड़ी उपलब्धि में खिलाड़ियों के समर्पित अभिभावकों, संत पैट्रिक स्कूल के प्रबंधन और टीम को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले हर व्यक्ति का महत्वपूर्ण योगदान है। जिला प्रशासन खेल और खिलाड़ियों के सर्वांगीण विकास के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है।"
खेल प्रतिभाओं को तराशने के लिए जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता
गुमला जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से स्थानीय खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिले में खेल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों से छिपी हुई प्रतिभाओं को बाहर लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रशासन का लक्ष्य है कि खिलाड़ियों को आधुनिक खेल सुविधाएं, उचित पोषण और राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षक उपलब्ध कराए जाएं ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। गुमला की बेटियों की यह ऐतिहासिक जीत निश्चित रूप से जिले के अन्य युवाओं, विशेषकर बालिकाओं को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी।
सत्य संदेश समाचार: गुमला की बेटियों की स्वर्णिम हैट्रिक और खेल नीति की सफलता
गुमला की संत पैट्रिक स्कूल की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरी बार सुब्रतो कप जीतकर यह साबित कर दिया है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को सही दिशा, उचित प्रशिक्षण और निरंतर सहयोग मिले, तो वे वैश्विक स्तर पर भी देश का मान बढ़ा सकती हैं। यह जीत केवल एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि उन सभी रूढ़ियों पर करारा प्रहार है जो बेटियों को मैदान से दूर रखती हैं। जिला प्रशासन और खेल विभाग को अब इस सफलता से प्रेरणा लेकर गुमला को झारखंड का प्रमुख 'स्पोर्ट्स हब' बनाने की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विस्तार और खिलाड़ियों को सीधे आर्थिक सहायता देना समय की मांग है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
खेल केवल मनोरंजन या शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, टीम भावना और आत्मविश्वास का सबसे बड़ा शिक्षक है। गुमला की इन बेटियों ने विपरीत परिस्थितियों से लड़ते हुए जो मुकाम हासिल किया है, वह देश के हर नागरिक और युवा के लिए एक मिसाल है। आइए, हम सब मिलकर अपने आसपास की खेल प्रतिभाओं को पहचानें, उन्हें प्रोत्साहित करें और बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करें। एक जागरूक समाज ही देश को खेल और विकास के नए शिखर पर ले जा सकता है।
इस ऐतिहासिक और गौरवशाली जीत पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को और बेहतर करने की आवश्यकता है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करें, इस प्रेरणादायक खबर को अपने मित्रों और परिजनों के साथ साझा करें, और हमारी बेटियों के हौसले को सलाम करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं!
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