सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप के फाइनल में पहुंची गुमला की बेटियां, 27 अगस्त को मिजोरम से होगा मुकाबला
संत पैट्रिक स्कूल की बेटियों ने फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचा।

झारखंड के गुमला जिले की संत पैट्रिक स्कूल की अंडर-17 बालिका फुटबॉल टीम ने 65वें सुब्रतो कप के फाइनल में जगह बना ली है। 27 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाले खिताबी मुकाबले में टीम का सामना मिजोरम से होगा। सेमीफाइनल में रोमांचक जीत दर्ज कर बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का मान बढ़ाया है।
- झारखंड का प्रतिनिधित्व कर रही संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की टीम 65वीं सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप के फाइनल में पहुंच गई है।
- आगामी 27 अगस्त को नई दिल्ली में होने वाले महामुकाबले में गुमला की बेटियों की भिड़ंत मिजोरम की टीम से होगी।
- सेमीफाइनल मुकाबले में सीआईएससी के खिलाफ एक्स्ट्रा टाइम में ऊषा कुमारी और साबरनी कुमारी के शानदार गोल से टीम को जीत मिली।
- गुमला की इस चैंपियन टीम को स्थानीय आवासीय बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र में कड़ा और नियमित अभ्यास कराया जाता है।
- उपायुक्त गुमला और जिला प्रशासन ने टीम के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर शुभकामनाएं देते हुए खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया है।
झारखंड के खेल इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए गुमला की बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल कप के अंडर-17 बालिका वर्ग में संत पैट्रिक स्कूल, गुमला की टीम ने खिताबी मुकाबले में प्रवेश कर लिया है। आगामी 27 अगस्त को होने वाले इस फाइनल मुकाबले में झारखंड की टीम का सामना मिजोरम से होगा। इस शानदार सफलता से न केवल गुमला जिला बल्कि पूरा झारखंड राज्य गौरवान्वित महसूस कर रहा है। बेटियों के इस शानदार प्रदर्शन ने राज्य में खेल संस्कृति को एक नई दिशा दी है।
जिला स्तर से राष्ट्रीय मंच तक का सफर
गुमला की इस टीम का सफर बेहद प्रेरणादायक और संघर्षपूर्ण रहा है। इस मुकाम तक पहुंचने के लिए खिलाड़ियों ने मैदान पर पसीना बहाया है। टीम ने अपनी प्रतियोगिता यात्रा की शुरुआत जिला स्तर से की थी। जिला स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद टीम ने दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित की। इसके बाद राज्य स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में भी टीम ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय सुब्रतो कप प्रतियोगिता के लिए झारखंड का प्रतिनिधित्व करने का गौरवपूर्ण अवसर प्राप्त किया।
खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे उनके नियमित अभ्यास और कड़े अनुशासन का बड़ा हाथ है। गुमला स्थित इनडोर स्टेडियम के आवासीय बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र में इन खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय और नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण केंद्र में खिलाड़ियों के खान-पान, फिटनेस और खेल की तकनीकी बारीकियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप आज ये बेटियां देश के सबसे प्रतिष्ठित स्कूल-स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट के फाइनल में खड़ी हैं।
लीग चरण से सेमीफाइनल तक का रोमांचक सफर
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लीग चरण में झारखंड की टीम ने विपक्षी टीमों पर पूरी तरह से दबाव बनाए रखा। टीम के शानदार खेल का अंदाजा इसी बात से लगाया सकता है कि लीग चरण में उन्होंने एक के बाद एक कई मजबूत टीमों को धूल चटाई:
- त्रिपुरा को हराकर टीम ने अपने अभियान की विजयी शुरुआत की।
- राजस्थान के खिलाफ मुकाबले में टीम ने शानदार तालमेल दिखाते हुए जीत दर्ज की।
- दिल्ली की टीम को उनके घरेलू मैदान पर पराजित कर खिलाड़ियों ने अपने इरादे साफ कर दिए।
- आर्मी पब्लिक स्कूल की मजबूत टीम को भी इस चैंपियन टीम ने आसानी से हरा दिया।
लीग मैचों में शानदार प्रदर्शन की बदौलत टीम ने क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में झारखंड का मुकाबला बिहार से हुआ, जहां गुमला की बेटियों ने एकतरफा खेल दिखाते हुए बिहार को 5-1 के बड़े अंतर से पराजित कर सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया।
सेमीफाइनल में झारखंड का मुकाबला सीआईएससी की टीम के साथ था। यह मुकाबला बेहद कड़ा और रोमांचक रहा। निर्धारित समय तक दोनों ही टीमें कोई भी गोल नहीं कर सकीं और मुकाबला बराबरी पर छूटा। इसके बाद मैच अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में गया। अतिरिक्त समय में झारखंड की स्टार खिलाड़ी ऊषा कुमारी और साबरनी कुमारी ने शानदार मैदानी गोल दागकर अपनी टीम को 2-0 से ऐतिहासिक जीत दिलाई और फाइनल का टिकट पक्का किया।
टीम की ताकत: प्रमुख खिलाड़ी और रणनीतिकार
इस पूरी प्रतियोगिता में टीम की कप्तान बीना कुमारी के कुशल नेतृत्व में खिलाड़ियों ने अद्भुत खेल कौशल और बेहतरीन तालमेल का प्रदर्शन किया है। मैदान पर खिलाड़ियों के बीच का आपसी समन्वय ही टीम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
टीम के रक्षात्मक और आक्रामक ढांचे में निम्नलिखित खिलाड़ियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
- गोलकीपर: गोलपोस्ट की सुरक्षा की कमान खुशबू कुमारी और archana_dungdung (अर्चना डुंगडुंग) ने संभाली, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में विपक्षी टीम के कई निश्चित गोल बचाए।
- आक्रमण पंक्ति (फॉरवर्ड): आक्रमण की जिम्मेदारी साबरनी कुमारी, मनीषा डुंगडुंग और ऊषा कुमारी ने बखूबी निभाई और लगातार विपक्षी डिफेंस को भेदने में सफल रहीं।
- मिडफील्ड और डिफेंस: टीम के खेल को संतुलित बनाए रखने में गौरी सिंह, सीमा उरांव, स्वीटी मिंज और कृति उरांव ने भी बेहद महत्वपूर्ण और सराहनीय योगदान दिया है।
कोच और तकनीकी टीम की भूमिका
किसी भी टीम की सफलता के पीछे एक मजबूत सपोर्ट स्टाफ का हाथ होता है। फाइनल मुकाबले को लेकर टीम के खिलाड़ी मैदान पर पसीना बहा रहे हैं और नियमित अभ्यास कर रहे हैं। कोच और मुख्य प्रशिक्षक बीना केरकेट्टा के कुशल मार्गदर्शन में खिलाड़ियों की फिटनेस, तकनीकी कमियों को दूर करने और मैच की रणनीतियों पर विशेष काम किया जा रहा है।
खिलाड़ियों को शारीरिक रूप से फिट रखने के लिए फिजियोथैरेपिस्ट आयुषी और टीम के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रबंधक बिंदु कुजूर भी टीम के साथ दिल्ली में मौजूद हैं। इसके साथ ही, झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन सोरेंग भी
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