बसिया के शिवालयों में सावन के अंतिम सोमवार पर उमड़ा आस्था का सैलाब महादेव कोना में महाआयोजन की तैयारी शुरू
शिवालयों में गूंजा हर-हर महादेव का जयघोष, महादेव कोना मंदिर में विशेष अनुष्ठान का आयोजन।

गुमला के बसिया प्रखंड में सावन के अंतिम सोमवार को शिवालयों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। तिर्रा स्थित ऐतिहासिक महादेव कोना मंदिर में भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। यहां बुधवार से भव्य कलश यात्रा के साथ तीन दिवसीय अखंड हरिकीर्तन और भंडारे का भव्य आयोजन किया जा रहा है।
- बसिया प्रखंड के तिर्रा महादेव कोना और सिदमा शिव मंदिर सहित सभी शिवालयों में सावन के अंतिम सोमवार को भक्तों का तांता लगा रहा।
- मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गुंजायमान रहा तथा श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
- तिर्रा के महादेव कोना मंदिर में पुरोहित अक्षय नाथ घोषाल और प्रदीप नाथ शर्मा द्वारा विधि-विधान से विशेष पूजा संपन्न कराई गई।
- आगामी बुधवार से कलश यात्रा के साथ तीन दिवसीय अखंड हरिकीर्तन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
- शुक्रवार को महाप्रसाद वितरण के साथ ही भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कर सावन महोत्सव का समापन होगा।
गुमला जिले के बसिया प्रखंड में सावन मास के अंतिम सोमवार को लेकर चारों ओर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का माहौल देखा गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही क्षेत्र के विभिन्न शिवालयों, विशेषकर तिर्रा स्थित ऐतिहासिक महादेव कोना और सिदमा शिव मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। भक्तों ने कतारबद्ध होकर भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित किए। इस पावन अवसर पर पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार देखने को मिला, जहां लोगों ने अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की।
शिवालयों में सुबह से ही उमड़ा आस्था का जनसैलाब
सावन मास के चतुर्थ और अंतिम सोमवार को लेकर बसिया प्रखंड के तमाम ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में अभूतपूर्व भक्ति का माहौल देखा गया। सुबह चार बजे से ही मंदिरों के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। विशेष रूप से तिर्रा स्थित महादेव कोना और सिदमा शिव मंदिर में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा परिसर शिवभक्तों से पट गया।
हर आयु वर्ग के लोग—महिलाएं, पुरुष, बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हाथों में पूजा की थाली, गंगाजल, दूध और बेलपत्र लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करते दिखे। वातावरण में गूंजते 'हर-हर महादेव', 'बम-बम भोले' और 'बोल बम' के गगनभेदी जयघोष ने संपूर्ण वातावरण को पूरी तरह से शिवमय और आध्यात्मिक बना दिया। कई श्रद्धालुओं ने इस विशेष दिन पर निर्जला और फलाहारी व्रत रखकर भगवान शिव की विशेष आराधना की।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से संपन्न हुआ अनुष्ठान
तिर्रा के महादेव कोना मंदिर में इस पावन अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मंदिर के मुख्य पुरोहित अक्षय नाथ घोषाल एवं प्रदीप नाथ शर्मा ने अत्यंत विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का अभिषेक संपन्न कराया। श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करने के उपरांत बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प, फल और नैवेद्य अर्पित किए। पूजा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय युवाओं और मंदिर समिति के सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
पुरोहितों ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
> पुरोहित अक्षय नाथ घोषाल और प्रदीप नाथ शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा: "सावन का अंतिम सोमवार आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। महादेव कोना में वर्षों से चली आ रही यह पूजा न केवल व्यक्तिगत सुख-शांति लाती है, बल्कि पूरे क्षेत्र में सामाजिक समरसता और खुशहाली का संचार करती है। आगामी तीन दिवसीय अनुष्ठान इसी लोक कल्याण की भावना को समर्पित है।"
महादेव कोना में तीन दिवसीय भव्य महाअनुष्ठान की रूपरेखा
महादेव कोना मंदिर में सावन के समापन के अवसर पर केवल जलाभिषेक ही नहीं, बल्कि एक विशाल धार्मिक उत्सव की भी तैयारी की गई है। मंदिर समिति के अनुसार, यह आयोजन पिछले कई दशकों से इस क्षेत्र की पहचान रहा है। इस वर्ष भी आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।
कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा इस प्रकार है:
बुधवार को कलश यात्रा और कीर्तन का शुभारंभ
आयोजन का शुभारंभ बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ होगा। इसमें क्षेत्र की सैकड़ों महिलाएं और कन्याएं पारंपरिक परिधानों में पवित्र जलाशयों से जल भरकर मंदिर परिसर पहुंचेंगी। इसी दिन से अखंड हरिकीर्तन का भी शुभारंभ होगा, जो निरंतर चलता रहेगा।
गुरुवार को अखंड कीर्तन व विशाल भंडारा
गुरुवार को पूरे दिन और रात अखंड हरिकीर्तन की गूंज रहेगी। इसके साथ ही मंदिर परिसर में विशाल भंडारे की शुरुआत होगी, जिसमें भक्तों के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की जाएगी। इस भंडारे में आसपास के कई गांवों के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
शुक्रवार को समापन, महाप्रसाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम
शुक्रवार को अखंड हरिकीर्तन का पूर्णाहुति के साथ समापन होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। इसी शाम को एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें स्थानीय और आमंत्रित कलाकारों द्वारा भक्ति संगीत की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
मंदिर समिति की तैयारियां और जनभागीदारी
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने के लिए महादेव कोना मंदिर समिति के सदस्य दिन-रात जुटे हुए हैं। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान में केवल बसिया प्रखंड ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों और पड़ोसी जिलों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके लिए पीने के पानी, टेंट, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से बनी रहे।
सत्य संदेश समाचार: [सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की मिसाल]
तिर्रा के महादेव कोना में आयोजित होने वाला यह सावन महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ग्रामीण एकता और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। ऐसे समय में जब आधुनिकता के प्रभाव में पारंपरिक मूल्य लुप्त हो रहे हैं, बसिया के ग्रामीणों द्वारा इस परंपरा को अक्षुण्ण रखना सराहनीय है। स्थानीय प्रशासन को भी चाहिए कि वह ऐसे बड़े आयोजनों में सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी ढांचागत सहयोग प्रदान करे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। सामुदायिक स्तर पर किए जाने वाले ये प्रयास समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
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हमारे पारंपरिक त्योहार और धार्मिक आयोजन हमें केवल ईश्वर से ही नहीं जोड़ते, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का भी बोध कराते हैं। महादेव कोना में आयोजित होने वाला विशाल भंडारा और अखंड कीर्तन तभी पूरी तरह सफल होगा जब हम सब मिलकर इसमें अपनी सेवा का योगदान देंगे। आइए, इस पावन अवसर पर हम अपने आसपास के धार्मिक स्थलों को स्वच्छ रखने, जरूरतमंदों की मदद करने और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लें। एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारी सक्रियता ही हमारे समाज को सशक्त और समृद्ध बना सकती है।
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