गुमला में जर्जर सड़कों और बढ़ते हादसों पर उपायुक्त दिलेश्वर महतो सख्त, अधिकारियों को दिए त्वरित मरम्मत और सुरक्षा दुरुस्त करने के कड़े निर्देश
उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने जर्जर सड़कों की मरम्मत और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए दिए कड़े निर्देश।

गुमला के उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जर्जर सड़कों की मरम्मत और दुर्घटना रोधी उपायों पर कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने एनएच-78 सहित प्रमुख मार्गों की बदहाली पर नाराजगी जताते हुए ब्लैक स्पॉट्स को दुरुस्त करने को कहा है। इस पहल का उद्देश्य जिले में सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।
- गुमला में उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में जिला सड़क सुरक्षा समिति की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई।
- सिसई मुख्य मार्ग, गुमला-जशपुर रोड (एनएच-78) और गुमला-लोहरदगा मार्ग की जर्जर हालत पर नाराजगी जताते हुए तुरंत मरम्मत के निर्देश दिए गए।
- घाघरा-नेतरहाट मार्ग पर पेड़ों की छंटाई और बसिया व कोयल नदी पुल पर जलजमाव से बने गड्ढों को जल्द भरने का आदेश।
- भारतमाला सड़क निर्माण में लगे वाहनों पर अनिवार्य रूप से रिफ्लेक्टर लगाने और नए ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करने की हिदायत।
- अस्पतालों में 24x7 एम्बुलेंस सेवा बहाल रखने और 'गुड सेमेरिटन' (नेक नागरिक) के लिए अलग रजिस्टर बनाने के निर्देश।
- हिट एंड रन के पीड़ितों को त्वरित मुआवजा देने और नगर परिषद क्षेत्र से आवारा मवेशियों व खतरनाक होर्डिंग्स को हटाने का फैसला।
झारखंड के गुमला जिले में सुरक्षित और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कवायद शुरू की गई है। उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आयोजित जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले की सड़कों की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर ग्रामीण संपर्क मार्गों की जर्जर हालत को सुधारने के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ को न्यूनतम स्तर पर लाना और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना है।
जर्जर सड़कों की स्थिति पर उपायुक्त की सख्त नाराजगी
गुमला जिले को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग वर्तमान में अपनी बदहाली के कारण हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने विशेष रूप से सिसई मुख्य मार्ग, गुमला-जशपुर रोड (एनएच-78) और गुमला-लोहरदगा मार्ग की अत्यंत दयनीय स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त किया। ये मार्ग न केवल जिले के भीतर यातायात का मुख्य जरिया हैं, बल्कि पड़ोसी राज्यों और जिलों को भी जोड़ते हैं।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि सड़कों के गड्ढों को भरने और उनके सुदृढ़ीकरण के कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके अतिरिक्त, बसिया और कोयल नदी पुल पर अक्सर जलजमाव की समस्या देखी जाती है, जिससे पुलों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। प्रशासन ने इन गड्ढों को तत्काल प्रभाव से भरने का आदेश दिया है ताकि बरसात और सामान्य दिनों में वाहनों का आवागमन बाधित न हो।
दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (ब्लैक स्पॉट्स) और सुरक्षा उपायों की समीक्षा
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। इसी क्रम में, उपायुक्त ने जिले में नए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों यानी ब्लैक स्पॉट्स की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। विशेषकर घाघरा-नेतरहाट मार्ग पर तीखे मोड़ों पर उगे पेड़ों की झाड़ियों और डालियों की छंटाई करने का आदेश दिया गया है, क्योंकि इनकी वजह से वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते।
आंजन धाम रोड, जो कि एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, वहां वाहनों की गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड ब्रेकर, रंबल स्ट्रिप्स और आवश्यक गति सीमा बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, जिले में चल रहे भारतमाला परियोजना के तहत निर्माण कार्यों में लगे भारी वाहनों पर अनिवार्य रूप से रिफ्लेक्टर लगाने को कहा गया है ताकि रात के अंधेरे में ये वाहन किसी बड़ी दुर्घटना का कारण न बनें। पुलिस प्रशासन को 'ड्रिंक एंड ड्राइव' यानी शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सघन जांच अभियान चलाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने कहा: "सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानवीय जीवन की रक्षा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मामला है। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय स्थापित कर जर्जर सड़कों को अविलंब दुरुस्त करें और दुर्घटनाओं के कारणों को समाप्त करें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।"
शहरी क्षेत्रों से अतिक्रमण और खतरों को हटाने का निर्देश
गुमला नगर परिषद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उपायुक्त ने नगर निकाय के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अक्सर देखा जाता है कि मुख्य मार्गों के किनारे सूखे और कमजोर पेड़ खड़े रहते हैं, जो तेज हवा या बारिश के दौरान गिरने से जान-माल का नुकसान कर सकते हैं। इन सूखे पेड़ों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, सड़कों के किनारे अवैध रूप से लगे खतरनाक होर्डिंग्स, जो तेज आंधी में गिर सकते हैं या वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं, उन्हें भी हटाने की हिदायत दी गई है। शहरी क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाने के लिए सड़कों पर घूमने वाले आवारा मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस भेजने का निर्देश दिया गया है ताकि उनके कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण और 'गुड सेमेरिटन' नीति
सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी 'गोल्डन ऑवर' घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को जिले के सभी प्रमुख अस्पतालों में 24x7 एम्बुलेंस सेवा और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में 'गुड सेमेरिटन' (नेक नागरिक) योजना पर भी चर्चा हुई। इसके तहत दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने और उन्हें किसी भी तरह की कानूनी परेशानी से बचाने के लिए अस्पतालों में एक अलग रजिस्टर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, 'हिट एंड रन' मामलों के पीड़ितों को त्वरित वित्तीय सहायता और मुआवजा प्रदान करने की प्रक्रिया को तेज करने को कहा गया है ताकि पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिल सके।
सत्य संदेश समाचार: सड़कों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही का समय
गुमला जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर की गई यह समीक्षा बैठक समय की मांग है, क्योंकि जर्जर सड़कें और प्रशासनिक उदासीनता अक्सर मासूमों की जान ले लेती हैं। उपायुक्त दिलेश्वर महतो द्वारा कड़े निर्देश देना सराहनीय है, लेकिन अब आवश्यकता इस बात की है कि इन निर्देशों का धरातल पर कड़ाई से पालन हो। यदि समय पर सड़कों की मरम्मत और ब्लैक स्पॉट्स को ठीक नहीं किया गया, तो केवल कागजी बैठकें दुर्घटनाओं को रोकने में नाकाम रहेंगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सड़क सुरक्षा केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हम सभी नागरिकों के जीवन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। जब हम यातायात नियमों का पालन करते हैं, 'गुड सेमेरिटन' बनकर घायलों की मदद करते हैं, और अपने आसपास की जर्जर सड़कों के बारे में प्रशासन को सचेत करते हैं, तब हम एक सुरक्षित समाज का निर्माण करते हैं। आइए, एक जिम्मेदार नागरिक बनें और सड़क सुरक्षा के इस महाअभियान में अपना योगदान दें।
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