गुमला के बसिया में दिल दहला देने वाली घटना मासूम बेटी ने खिड़की से पिता को फंदे से झूलते देखा पूरे परिवार में मचा कोहराम
बसिया के कोनबीर कुम्हार टोली में युवक ने फांसी लगाकर की खुदकुशी पुलिस जांच शुरू।

गुमला जिले के बसिया थाना क्षेत्र अंतर्गत कोनबीर कुम्हार टोली में शुक्रवार की रात एक युवक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शनिवार सुबह मासूम बेटी द्वारा शव देखे जाने के बाद घटना का खुलासा हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।
- गुमला के बसिया थाना क्षेत्र के कोनबीर कुम्हार टोली में शुक्रवार की रात युवक ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।
- शनिवार सुबह तीन वर्षीय मासूम बेटी ने खिड़की से पिता के शव को फंदे से झूलता देख परिजनों को घटना की जानकारी दी।
- मृतक की पहचान विकास सिंह (38 वर्ष), पिता रामस्वरूप सिंह के रूप में की गई है।
- परिजनों ने आनन-फानन में कमरे का दरवाजा तोड़ा और विकास सिंह के शव को फंदे से नीचे उतारा।
- बसिया थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव का पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया।
- मृतक अपने पीछे पत्नी और दो मासूम बेटियों (तीन वर्ष और डेढ़ वर्ष) का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गया है।
गुमला जिले के बसिया थाना क्षेत्र में एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां कोनबीर कुम्हार टोली के रहने वाले 38 वर्षीय विकास सिंह ने अपने ही घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह दर्दनाक घटना शुक्रवार की रात की बताई जा रही है, जिसका खुलासा शनिवार की सुबह हुआ। घटना की जानकारी तब मिली जब मृतक की महज तीन साल की मासूम बेटी ने खिड़की से अपने पिता को फंदे पर लटका हुआ देखा। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने के बाद सक्रिय हुई स्थानीय पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की छानबीन शुरू कर दी है।
कैसे हुआ घटना का खुलासा और परिजनों की कार्रवाई
कोनबीर कुम्हार टोली के रहने वाले विकास सिंह शुक्रवार की रात अपने कमरे में सोने गए थे। रात के किसी पहर उन्होंने अज्ञात कारणों से कमरे के भीतर करकट के पाइप में लगे फंदे से लटककर आत्महत्या कर ली। शनिवार की सुबह जब काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला, तो उनकी तीन वर्षीय पुत्री खेलते हुए कमरे की खिड़की के पास पहुंची। खिड़की से अंदर झांकने पर उसने अपने पिता को फंदे से झूलता पाया।
मासूम बच्ची ने तुरंत दौड़कर घर के अन्य सदस्यों को इसकी जानकारी दी। बच्ची की बात सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत कमरे की ओर भागे और बंद दरवाजे को धक्का देकर तोड़ा। अंदर का नजारा देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों ने तुरंत विकास सिंह के शव को फंदे से नीचे उतारा और इसकी सूचना स्थानीय बसिया पुलिस को दी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और पोस्टमार्टम प्रक्रिया
घटना की सूचना मिलते ही बसिया थाना की पुलिस टीम बिना किसी देरी के मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और शव को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस ने स्थानीय गवाहों की मौजूदगी में शव का पंचनामा तैयार किया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल गुमला भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही समय और कारणों का स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ और उठ रहे कई सवाल
इस असमय मौत से विकास सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे अपनी पत्नी और दो अत्यंत छोटी बेटियों को छोड़ गया है। बड़ी बेटी की उम्र तीन वर्ष और छोटी बेटी की उम्र महज डेढ़ वर्ष है। इन मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है, जिन्हें अभी यह भी नहीं पता कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं रहे। पूरे गांव में इस घटना को लेकर मातम पसरा हुआ है। फिलहाल आत्महत्या के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। बसिया पुलिस मृतक के परिजनों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर मामले की हर पहलू से जांच कर रही है।
सत्य संदेश समाचार: मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और पुलिस की जिम्मेदारी
यह दुखद घटना समाज में बढ़ रहे मानसिक तनाव और एकाकीपन की ओर इशारा करती है, जहां एक युवा पिता ने इतना आत्मघाती कदम उठा लिया। ऐसे मामलों में त्वरित और निष्पक्ष पुलिस जांच आवश्यक है ताकि असमय हुई इस मौत के पीछे के वास्तविक कारणों और किसी भी संभावित दबाव का पता चल सके। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों को भी ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और काउंसलिंग शिविर आयोजित करने चाहिए ताकि कोई अन्य परिवार इस तरह न उजड़े। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जीवन में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, लेकिन कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए अपने जीवन का अंत कर लिया जाए। हमारे आस-पास यदि कोई व्यक्ति मानसिक तनाव, अवसाद या किसी बड़ी परेशानी से गुजर रहा है, तो एक सच्चे नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम उससे बात करें, उसका संबल बनें और उसे सही मार्गदर्शन दिलाएं। आपकी थोड़ी सी संवेदनशीलता और मदद का हाथ किसी की जिंदगी बचा सकता है। आइए, अपने समाज को अधिक संवेदनशील और जागरूक बनाने का संकल्प लें।
इस दुखद घटना पर अपनी संवेदनाएं प्रकट करने, समाज में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने और इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए नीचे कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें और इस खबर को शेयर करें।
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