संत जेवियर कॉलेज महुआडांड़ में विश्व साक्षरता दिवस पर गूंजा शिक्षा का संदेश मानविकी संकाय के आयोजन में जुटे शिक्षाविद और विद्यार्थी
संत जेवियर कॉलेज में शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष कार्यक्रम आयोजित।

महुआडांड़ के संत जेवियर कॉलेज में मानविकी संकाय द्वारा विश्व साक्षरता दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस समारोह में शिक्षाविदों ने साक्षरता को सामाजिक विकास की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों से जागरूकता फैलाने की अपील की। कार्यक्रम में कॉलेज के प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
- संत जेवियर कॉलेज (ऑटोनॉमस), महुआडांड़ में मानविकी संकाय के तत्वावधान में विश्व साक्षरता दिवस समारोह का अत्यंत गरिमापूर्ण माहौल में आयोजन किया गया।
- कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश और मुख्य वक्ता डॉ. मन्नू कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
- वक्ताओं ने साक्षरता को केवल अक्षर ज्ञान न मानकर इसे आत्मविश्वास, समानता और सामाजिक चेतना के विकास का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
- मानविकी संकाय के विद्यार्थियों ने भाषा, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से संबंधित अत्यंत प्रभावशाली प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- कार्यक्रम में कॉलेज के शिक्षक-शिक्षिकाओं, शिक्षकेत्तर कर्मचारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
लातेहार जिले के महुआडांड़ स्थित प्रतिष्ठित संत जेवियर कॉलेज (ऑटोनॉमस) में 12 सितंबर 2026 को विश्व साक्षरता दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मानविकी संकाय के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष समारोह का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को साक्षरता के वास्तविक अर्थ से परिचित कराना और उन्हें समाज में शिक्षा की अलख जगाने के लिए प्रेरित करना था। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्यों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने मिलकर समाज के वंचित वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प लिया। यह आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक सुधार और सामाजिक चेतना के प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है।
साक्षरता केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का आधार: डॉ. फादर एम. के. जोश
कार्यक्रम को मुख्य रूप से संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने शिक्षा और साक्षरता के गहरे संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि साक्षरता का अर्थ केवल किसी भाषा को पढ़ लेना या लिख लेना नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के सर्वांगीण विकास की कुंजी है। जब तक कोई समाज पूर्ण रूप से साक्षर नहीं होता, तब तक वह अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति सजग नहीं हो सकता।
प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने कहा: "साक्षरता केवल पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के ज्ञान, आत्मविश्वास और सामाजिक चेतना को विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। शिक्षा व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक बनाकर एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करती है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे समाज के वंचित एवं जरूरतमंद वर्गों तक शिक्षा और जागरूकता का संदेश पहुँचाएं।"
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कॉलेज के युवाओं को केवल अपनी डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज के उन हिस्सों में जाना चाहिए जहाँ आज भी निरक्षरता का अंधकार है।
निरक्षरता के विरुद्ध सामूहिक प्रयास की आवश्यकता: डॉ. मन्नू कुमार शर्मा
इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता डॉ. मन्नू कुमार शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने साक्षरता को किसी भी राष्ट्र और समाज के आर्थिक व सामाजिक विकास की पहली सीढ़ी बताया। उन्होंने कहा कि साक्षरता के बिना एक स्वस्थ और प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं की जा सकती।
डॉ. मन्नू कुमार शर्मा ने कहा: "साक्षरता सामाजिक विकास की आधारशिला है। प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा से जोड़ना केवल सरकार या शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक का दायित्व है। विद्यार्थियों को शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने तथा निरक्षरता के विरुद्ध जागरूकता फैलाने के लिए आगे आना होगा।"
उन्होंने उपस्थित युवाओं से अपील की कि वे अपने जीवन में कम से कम एक निरक्षर व्यक्ति को साक्षर बनाने का संकल्प लें, ताकि देश से निरक्षरता के कलंक को पूरी तरह से मिटाया जा सके।
विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सामाजिक संदेश
कार्यक्रम के दौरान मानविकी संकाय के विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और कलात्मक कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने साक्षरता, भाषा के महत्व और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ शिक्षा की भूमिका को दर्शाते हुए कई नाटक, लघु नाटक, कविता पाठ और भाषण प्रस्तुत किए।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि कैसे शिक्षा अज्ञानता के बंधनों को तोड़ती है और व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है। ग्रामीण और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने और बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के मुद्दे को भी नाटकों के जरिए बेहद संजीदगी से उठाया गया। उपस्थित दर्शकों और प्राध्यापकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ विद्यार्थियों के इन प्रयासों की सराहना की।
गरिमामयी उपस्थिति: शिक्षाविदों और कर्मचारियों का मिला भरपूर सहयोग
महुआडांड़ के इस प्रतिष्ठित कॉलेज में आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज प्रबंधन, शैक्षणिक स्टाफ और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की भूमिका सराहनीय रही। इस अवसर पर कॉलेज के कई प्रमुख व्यक्तित्व उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से फा. समीर, फा. लियो, फा. राजीप और सिस्टर चन्द्रोदया की गरिमामयी उपस्थिति रही। प्राध्यापक वर्ग से प्रो. मनीषा, प्रो. बसंती, प्रो. अंकिता, प्रो. आदिति, प्रो. रेचेल, प्रो. सुष्मिता, प्रो. सुकुट, प्रो. रोनित, प्रो. शशि, प्रो. मन्नू, प्रो. जामेश एवं प्रो. मोनिका ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
इसके साथ ही कॉलेज के शिक्षकेत्तर कर्मचारियों में अनोरा दीदी, सुनीता दीदी, क्रिस्टीना दीदी, प्रेमा, सरोज, नीलम, अशोक, सुचित, जयप्रकाश एवं संतोष ने भी कार्यक्रम के सफल संचालन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का समापन औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सत्य संदेश समाचार: साक्षरता की मशाल जलाता संत जेवियर कॉलेज
महुआडांड़ जैसे सुदूरवर्ती और जनजातीय बहुल क्षेत्र में संत जेवियर कॉलेज द्वारा विश्व साक्षरता दिवस पर इस तरह के वैचारिक कार्यक्रम का आयोजन करना केवल एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार का एक बड़ा माध्यम है। यह संस्थान लगातार ग्रामीण युवाओं को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़कर उनके भीतर सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना पैदा कर रहा है। प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता दर में गुणात्मक सुधार हो सके। क्या हमारे अन्य स्थानीय शिक्षण संस्थान भी इसी तरह की सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए आगे आएंगे? यह समय की मांग है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा केवल व्यक्तिगत उन्नति का साधन नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला मार्ग है। महुआडांड़ के युवाओं ने साक्षरता दिवस पर जो संकल्प लिया है, उसे हमें अपने दैनिक जीवन में उतारना होगा। अपने आस-पास के किसी एक निरक्षर व्यक्ति को साक्षर बनाने का छोटा सा प्रयास भी देश के विकास में बड़ा योगदान दे सकता है। आइए, हम सब मिलकर इस पुनीत कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
शिक्षा की यह अलख केवल कॉलेज परिसरों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के हर घर तक पहुंचे। यदि आप भी मानते हैं कि साक्षरता ही देश और समाज की तरक्की का असली रास्ता है, तो इस महत्वपूर्ण संदेश को अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करें। नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार लिखकर बताएं कि हम अपने ग्रामीण क्षेत्रों में साक्षरता बढ़ाने के लिए और क्या रचनात्मक प्रयास कर सकते हैं। इस लेख को शेयर करें और जागरूकता की इस मुहिम का हिस्सा बनें!
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