सिमडेगा के पंडरीपानी में स्वर्गीय गीता देवी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन शिव मंदिर जामबाहर में भंडारे के साथ दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
पंडरीपानी के जामबाहर शिव मंदिर में स्वर्गीय गीता देवी की स्मृति में विशाल भंडारे का हुआ आयोजन।

झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत पंडरीपानी के जामबाहर स्थित शिव मंदिर में सोमवार को स्वर्गीय गीता देवी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में परिजनों सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने शामिल होकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना की। इस दौरान उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद का वितरण भी किया गया।
- झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत पंडरीपानी के जामबाहर शिव मंदिर में आयोजित हुआ भव्य धार्मिक कार्यक्रम।
- 24 अगस्त 2026 को स्वर्गीय गीता देवी की पावन स्मृति में परिजनों ने किया श्रद्धांजलि सभा और भंडारे का आयोजन।
- श्रद्धालुओं और परिजनों ने भगवान भोलेनाथ से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को संबल प्रदान करने की सामूहिक प्रार्थना की।
- इस पुनीत अवसर पर आयोजित प्रसाद वितरण कार्यक्रम में सैकड़ों स्थानीय ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने ग्रहण किया महाप्रसाद।
- श्रद्धांजलि सभा के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय गीता देवी के सामाजिक योगदान और उनके सरल स्वभाव को याद किया।
सच्ची सेवा और परोपकार की प्रतिमूर्ति रहीं स्वर्गीय गीता देवी की पुण्य स्मृति में सिमडेगा के पंडरीपानी क्षेत्र में एक भव्य और गरिमामयी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सोमवार, 24 अगस्त 2026 को जामबाहर स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल उनके परिजनों, बल्कि दूर-दराज से आए रिश्तेदारों, शुभचिंतकों और स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस धार्मिक और सामाजिक आयोजन का मुख्य उद्देश्य दिवंगत आत्मा की चिर शांति के लिए प्रार्थना करना और समाज में उनके द्वारा फैलाए गए प्रेम के संदेश को जीवित रखना था। इस अवसर पर पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय और भावुक वातावरण से सराबोर नजर आया।
शिव मंदिर जामबाहर में गूंजे भक्तिमय मंत्रोच्चार और सामूहिक प्रार्थना
सोमवार की सुबह से ही पंडरीपानी के जामबाहर स्थित शिव मंदिर में विशेष चहल-पहल देखी गई। स्वर्गीय गीता देवी के परिवार के सदस्यों ने मंदिर परिसर की स्वच्छता और साज-सज्जा के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके पश्चात, योग्य पुरोहितों के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। भगवान शिव, जिन्हें मोक्ष का देवता माना जाता है, के चरणों में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए विशेष आहुतियां दी गईं।
इस दौरान उपस्थित परिजनों की आंखें नम थीं, लेकिन मन में अपनी पूजनीय माता और मार्गदर्शक के प्रति अगाध श्रद्धा थी। परिवार के सदस्यों ने भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और पूरे परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। उपस्थित ग्रामीणों ने भी इस प्रार्थना में अपनी सहभागिता दर्ज कराई, जिससे पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
सामाजिक समरसता का प्रतीक बना विशाल भंडारा और प्रसाद वितरण
श्रद्धांजलि सभा और धार्मिक अनुष्ठानों की पूर्णाहुति के बाद दोपहर से विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ। इस भंडारे में शुद्धता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा गया था। मंदिर परिसर में ही तैयार किए गए महाप्रसाद को ग्रहण करने के लिए आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। भंडारे में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े का भेद मिटाकर सभी लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया, जिसने सामाजिक समरसता की एक सुंदर तस्वीर पेश की।
परिवार के सदस्यों और स्वयंसेवकों ने बेहद आदर और सेवा भाव के साथ सभी आगंतुकों को प्रसाद परोसा। भंडारे का यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर स्वर्गीय गीता देवी के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की। ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से समाज में आपसी प्रेम और भाईचारा मजबूत होता है।
परिजनों और शुभचिंतकों ने साझा कीं स्वर्गीय गीता देवी की स्मृतियां
इस अवसर पर आयोजित स्मृति सभा में उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय गीता देवी के जीवन और उनके द्वारा किए गए परोपकारी कार्यों को याद किया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वे एक अत्यंत सरल, सौम्य और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थीं, जिनका जीवन परिवार और समाज के कल्याण के लिए समर्पित था। उनके जाने से न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक सच्चे शुभचिंतक को खो दिया है।
परिवार के वरिष्ठ सदस्यों ने भावुक होते हुए कहा:
> "हमारी आदरणीय माता जी हमेशा परोपकार, सेवा भाव और दूसरों की मदद करने में विश्वास रखती थीं। उनका मानना था कि भूखे को भोजन कराना और ईश्वर की भक्ति में लीन रहना ही मानव जीवन का वास्तविक धर्म है। आज उनकी स्मृति में आयोजित यह भंडारा उनके इसी सेवा भाव को जीवित रखने का एक छोटा सा प्रयास है। हम उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं।"
सिमडेगा के ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक आयोजनों का महत्व
सिमडेगा जैसे जनजातीय और ग्रामीण बहुल क्षेत्रों में इस प्रकार के आयोजन केवल एक पारिवारिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहते, बल्कि ये एक बड़े सामाजिक मिलन समारोह का रूप ले लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सामूहिक संवेदनाएं बेहद मजबूत हैं। किसी भी परिवार के दुख-सुख में पूरा गांव एकजुट होकर खड़ा होता है। जामबाहर शिव मंदिर में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर साबित किया कि आधुनिकता के इस दौर में भी हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ें कितनी गहरी और मजबूत हैं।
सत्य संदेश समाचार: सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करते ऐसे धार्मिक आयोजन
स्वर्गीय गीता देवी की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक व्यक्तिगत या पारिवारिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण समाज की उस गहरी संवेदना को दर्शाता है जहाँ पूर्वजों का सम्मान सर्वोपरि है। परिजनों द्वारा अपनी पूर्वज की स्मृति में भंडारे का आयोजन कर भूखों को तृप्त करना और ईश्वर से प्रार्थना करना हमारी समृद्ध सनातन धरोहर का हिस्सा है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के प्रति आदर, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना सिखाते हैं। सिमडेगा के पंडरीपानी में हुआ यह आयोजन सामाजिक समरसता की एक अनुकरणीय मिसाल है, जिसकी जितनी सराहना की जाए कम है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हमारे पूर्वज हमारे जीवन की मजबूत नींव होते हैं, और उनके दिखाए गए परोपकार के मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची और वास्तविक श्रद्धांजलि है। समाज में सेवा, करुणा और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देकर ही हम एक स्वस्थ, संवेदनशील और सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। आइए, हम सब मिलकर अपने बुजुर्गों के संस्कारों को जीवित रखें और अपने आस-पास के जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहें। सिमडेगा के जामबाहर में आयोजित इस भंडारे से प्रेरणा लेकर हमें भी अपने स्तर पर समाज कल्याण के छोटे-छोटे प्रयास निरंतर करते रहने चाहिए।
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