सिमडेगा मंडल कारा में जिला विधिक सेवा प्राधिकार का औचक निरीक्षण सचिव मरियम हेमरोम ने खुद चखा भोजन और बंदियों को दी मुफ्त कानूनी सहायता की जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम ने मंडल कारा का औचक निरीक्षण कर बंदियों के अधिकारों की समीक्षा की।

झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश पर सिमडेगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव मरियम हेमरोम ने बुधवार को मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जेल की व्यवस्थाओं, भोजन की गुणवत्ता और बंदियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए जेल प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
- झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सिमडेगा जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की सचिव मरियम हेमरोम ने मंडल कारा का औचक निरीक्षण किया।
- सचिव ने कारा के रसोईघर का जायजा लिया और भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए स्वयं भोजन का स्वाद चखा।
- विभिन्न बैरकों का भ्रमण कर उन्होंने बंदियों से सीधे संवाद किया और उनकी पेयजल, स्वच्छता और दवाओं से जुड़ी समस्याओं को सुना।
- आर्थिक रूप से कमजोर बंदियों के लिए डीएलएसए के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
- सचिव ने स्पष्ट किया कि कारागार केवल सजा की जगह नहीं बल्कि सुधार और पुनर्वास का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
सिमडेगा जिला मुख्यालय स्थित मंडल कारा में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) की सचिव मरियम हेमरोम अचानक निरीक्षण करने पहुंच गईं। झारखंड उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के आलोक में किया गया यह औचक निरीक्षण बंदियों के मानवाधिकारों और जेल की बुनियादी व्यवस्थाओं को परखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इस दौरान सचिव ने जेल प्रशासन को साफ-सफाई, पौष्टिक भोजन और त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की सख्त हिदायत दी। इस महत्वपूर्ण दौरे से जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली में सुधार और बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने का एक नया प्रयास शुरू हुआ है।
रसोईघर का सघन निरीक्षण और भोजन की गुणवत्ता की जांच
निरीक्षण की शुरुआत मंडल कारा के मुख्य रसोईघर से हुई। सचिव मरियम हेमरोम ने रसोईघर में भोजन तैयार करने की पूरी व्यवस्था का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने खाद्यान्न के भंडारण, साफ-सफाई और भोजन बनाने की प्रक्रिया का गहन निरीक्षण किया। सचिव ने रसोईघर के फर्श की नियमित एवं बेहतर तरीके से साफ-सफाई रखने तथा भोजन बनाने व रखने वाले बर्तनों को स्वच्छ रखने का कड़ा निर्देश दिया।
भोजन की वास्तविक गुणवत्ता की जांच के लिए उन्होंने स्वयं भोजन का स्वाद भी लिया। उन्होंने जेल प्रशासन को निर्देश दिया कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप समय पर स्वच्छ, गर्म और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए।
मरियम हेमरोम ने कहा: "बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप समय पर स्वच्छ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाना चाहिए। भोजन बनाने और उसे रखने वाले बर्तनों की स्वच्छता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।"
बैरकों का दौरा और बंदियों से सीधा संवाद
रसोईघर के निरीक्षण के बाद सचिव ने कारागार के विभिन्न बैरकों का भ्रमण किया। उन्होंने वहां रह रहे बंदियों से सीधे बातचीत की और उनके रहने की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने बंदियों से पूछा कि क्या उन्हें नियमित रूप से पर्याप्त पेयजल, स्वच्छता सामग्री, आवश्यक दवाएं और अन्य बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं।
इस संवाद के दौरान कुछ बंदियों ने अपनी छोटी-मोटी स्वास्थ्य संबंधी और अन्य व्यावहारिक समस्याओं को उनके समक्ष रखा। बंदियों द्वारा बताई गई समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सचिव ने मौके पर मौजूद जेल अधिकारियों को तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
निःशुल्क कानूनी सहायता और बंदियों के अधिकार
मरियम हेमरोम ने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति भी विशेष रूप से जागरूक किया। उन्होंने बताया कि कई बंदी ऐसे होते हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपने मामलों की पैरवी के लिए वकील नहीं रख पाते हैं। ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बंदियों को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता और वकील उपलब्ध कराए जाते हैं।
उन्होंने बंदियों को ढाढस बंधाया कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। यदि किसी बंदी को कानूनी मदद की आवश्यकता है, तो वह बिना किसी झिझक के जेल प्रशासन के माध्यम से या सीधे डीएलएसए से संपर्क कर सहायता प्राप्त कर सकता है।
मरियम हेमरोम ने कहा: "आर्थिक अभाव के कारण किसी भी व्यक्ति को न्याय से वंचित नहीं होना चाहिए। जरूरत पड़ने पर कोई भी बंदी जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क कर निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर सकता है।"
सुधार और पुनर्वास का केंद्र बने कारागार
निरीक्षण के अंत में सचिव ने जेल प्रशासन और उपस्थित अधिकारियों के साथ एक संक्षिप्त बैठक की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कारागार केवल सजा देने का स्थान नहीं है, बल्कि यह बंदियों के चरित्र सुधार और समाज में उनके पुनर्वास का भी केंद्र है। इसलिए, प्रत्येक बंदी को जेल के भीतर एक सम्मानजनक वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने जेल प्रशासन को कारा परिसर में स्वच्छता बनाए रखने, स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी करने और बंदियों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे निरीक्षणों से जेल की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और सुधार की गति बनी रहती है।
सत्य संदेश समाचार: बंदियों के मानवाधिकार और जेल प्रशासन की जवाबदेही
सिमडेगा मंडल कारा का यह औचक निरीक्षण जेल व्यवस्था की कमियों को उजागर करने और प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। अक्सर जेलों में बंदियों की बुनियादी सुविधाओं और उनके कानूनी अधिकारों की अनदेखी की शिकायतें आती हैं, ऐसे में न्यायिक अधिकारियों की यह सक्रियता व्यवस्था को दुरुस्त रखती है। जेल प्रशासन को केवल निर्देशों का पालन कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर सुनिश्चित करना होगा ताकि कारागार वास्तव में सुधार गृह बन सकें। बंदियों के अधिकारों की रक्षा और जेलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी।
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समाज के हर वर्ग, चाहे वह जेल की सलाखों के पीछे हो या बाहर, सभी के अधिकारों की रक्षा करना एक स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम अपने आस-पास हो रहे मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाएं और प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के प्रयासों का समर्थन करें। जब न्याय और संवेदनशीलता का मिलन होगा, तभी एक समतामूलक समाज का निर्माण संभव है। आइए, इस मुहिम का हिस्सा बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव की अलख जगाएं।
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