सिमडेगा में देवराहा बाबा आश्रम के ऐतिहासिक शिव मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का भव्य शुभारंभ भक्तों ने लिया भंडारे का महाप्रसाद
देवराहा बाबा आश्रम के सामने स्थित शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ।

झारखंड के सिमडेगा में स्थित ऐतिहासिक देवराहा बाबा आश्रम परिसर के शिव मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का भव्य शुभारंभ किया गया है। लाल इंद्रजीत नाथ साहदेव ने मुख्य द्वार का उद्घाटन कर इस पुनीत कार्य की शुरुआत की। इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लेकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
- सिमडेगा के देवराहा बाबा आश्रम परिसर में स्थित प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य धार्मिक रीति-रिवाज से शुरू हुआ।
- मुख्य अतिथि लाल इंद्रजीत नाथ साहदेव द्वारा मंदिर के नवनिर्मित द्वार का विधि-विधान से उद्घाटन किया गया।
- इस पावन अवसर पर रामरेखा बाबा और उमाकांत महाराज जी के पावन सानिध्य में विशेष पूजा-आराधना संपन्न हुई।
- यजमान रवि चंद्र देवघरिया और उनकी धर्मपत्नी सुनीता देवी ने मुख्य अनुष्ठान में शामिल होकर पूजा संपन्न की।
- भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया।
झारखंड के सिमडेगा जिला मुख्यालय स्थित गांधी मैदान के ठीक सामने आस्था का प्रमुख केंद्र देवराहा बाबा आश्रम स्थित है। इस पावन परिसर में स्थापित शिव मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ अत्यंत ही गरिमामयी और श्रद्धापूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस पुनीत कार्य के प्रारंभ होने से स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों और शिव भक्तों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर के जीर्णोद्धार से न केवल इसकी भव्यता बढ़ेगी, बल्कि यह स्थल आने वाले समय में श्रद्धालुओं की आस्था का और बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा। इस धार्मिक उत्सव के दौरान पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय शिव शंभू' के जयघोष से गुंजायमान रहा।
आस्था का केंद्र देवराहा बाबा आश्रम और शिव मंदिर का महत्व
झारखंड का सिमडेगा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। गांधी मैदान के सामने स्थित देवराहा बाबा आश्रम वर्षों से स्थानीय लोगों की अगाध आस्था का केंद्र रहा है। आश्रम परिसर में स्थापित शिव मंदिर अत्यंत प्राचीन है और इसके जीर्णोद्धार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के शुभारंभ ने स्थानीय लोगों के वर्षों पुराने सपने को साकार करने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया है।
सनातन धर्म में मंदिरों का जीर्णोद्धार अत्यंत पुण्यदायी कार्य माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, किसी प्राचीन देवालय का जीर्णोद्धार करना नए मंदिर के निर्माण से भी अधिक फलदायी होता है क्योंकि इससे ऐतिहासिक धरोहरों और आध्यात्मिक ऊर्जा केंद्रों का संरक्षण होता है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस मंदिर के नए स्वरूप में आने से पूरे सिमडेगा क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।
मुख्य अतिथि लाल इंद्रजीत नाथ साहदेव द्वारा द्वार का उद्घाटन
इस पुनीत कार्य का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि लाल इंद्रजीत नाथ साहदेव के कर-कमलों द्वारा किया गया। उन्होंने शिव मंदिर के मुख्य द्वार का उद्घाटन कर जीर्णोद्धार कार्य की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों का संरक्षण और संवर्धन हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
लाल इंद्रजीत नाथ साहदेव ने कहा: "मंदिर केवल पूजा-आराधना का स्थान नहीं होते, बल्कि ये समाज को एकता, सदाचार और सेवा के सूत्र में बांधने वाले पवित्र केंद्र होते हैं। देवराहा बाबा आश्रम के इस शिव मंदिर का जीर्णोद्धार क्षेत्र में शांति और समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त करेगा। हम सभी को इस पुनीत कार्य में अपना गिलहरी योगदान देना चाहिए।"
पूज्य संतों का सानिध्य और विशेष अनुष्ठान
इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान का संचालन और नेतृत्व रामरेखा बाबा एवं उमाकांत महाराज जी के पावन सानिध्य में किया गया। संतों के मार्गदर्शन में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन और विशेष आराधना की गई। इस पावन अवसर पर यजमान की भूमिका में रवि चंद्र देवघरिया और उनकी धर्मपत्नी सुनीता देवी उपस्थित रहे, जिन्होंने पूर्ण विधि-विधान और शुद्धता के साथ यज्ञोपवीत एवं पूजन अनुष्ठान संपन्न किया।
देवराहा बाबा आश्रम के मुख्य पुजारी शंकर दास ने गर्भगृह में भगवान शिव का विशेष श्रृंगार और आरती संपन्न कराई। संतों के आशीर्वाद से पूरा वातावरण अत्यंत दिव्य और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। उपस्थित संतों ने अपने प्रवचन में मंदिर के महत्व और मानव जीवन में धर्म के प्रभाव पर प्रकाश डाला।
गणमान्य नागरिकों और श्रद्धालुओं की गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए सिमडेगा और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के गणमान्य लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उपस्थित प्रमुख लोगों में दुर्गा प्रसाद, रंजीत सिंह, कृष्णा सिंह, विकास कुमार, मनीष कुमार मिश्रा, चंदन लाल, प्रदीप केसरी, दीप नारायण दास एवं प्रमोद सिंह शामिल थे।
इन सभी भक्तों ने भगवान आशुतोष के चरणों में माथा टेका और पूरे जिले की सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना की। महिलाओं और बच्चों ने भी इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मंदिर परिसर की साफ-सफाई तथा व्यवस्था बनाने में अपना अमूल्य योगदान दिया। स्थानीय युवाओं की टोली ने व्यवस्था संभालने में मुख्य भूमिका निभाई।
विशाल भंडारे का आयोजन और महाप्रसाद का वितरण
पूजा-आराधना और द्वार उद्घाटन के पश्चात देवराहा बाबा आश्रम परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय स्वयंसेवकों के सहयोग से आयोजित इस भंडारे में हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर अत्यंत अनुशासित तरीके से प्रसाद ग्रहण किया।
भंडारे की व्यवस्था इतनी सुदृढ़ थी कि हर आने वाले भक्त को आदरपूर्वक महाप्रसाद परोसा गया। भक्तों के चेहरे पर संतोष और भक्ति का भाव साफ देखा जा सकता था। पूरे दिन आश्रम परिसर में उत्सव जैसा माहौल बना रहा और लोग भजन-कीर्तन पर झूमते नजर आए।
सनातन धर्मावलंबियों से सहयोग की अपील
जीर्णोद्धार समिति और आश्रम के आयोजकों ने इस अवसर पर सिमडेगा सहित पूरे झारखंड के सनातन धर्मावलंबियों से एक विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि मंदिर का जीर्णोद्धार एक सामूहिक कार्य है और इसमें समाज के हर वर्ग की सहभागिता अनिवार्य है।
आयोजकों ने सभी समर्थ नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपनी श्रद्धानुसार इस पुनीत कार्य में तन, मन और धन से सहयोग करें। यह मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी आस्था और कला का अनुपम उदाहरण बनेगा, इसलिए इस यज्ञ में हर किसी को अपनी आहुति देनी चाहिए।
सत्य संदेश समाचार: [सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण और सामाजिक एकता]
देवराहा बाबा आश्रम में शिव मंदिर के जीर्णोद्धार का यह प्रयास केवल एक धार्मिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह हमारी लुप्त होती जा रही सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने का एक अत्यंत सराहनीय कदम है। आज के आधुनिक युग में जब लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में सिमडेगा के नागरिकों द्वारा किया गया यह सामूहिक प्रयास समाज में आपसी भाईचारे और धार्मिक चेतना को मजबूत करता है। प्रशासन और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग को इस प्रकार के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थलों के विकास में सक्रिय योगदान देना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति से परिचित हो सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हमारे मंदिर और धार्मिक स्थल हमारी पहचान और सामाजिक समरसता के सबसे बड़े प्रतीक हैं। सिमडेगा के देवराहा बाबा आश्रम में शुरू हुआ यह जीर्णोद्धार कार्य हम सभी को यह याद दिलाता है कि अपनी धरोहरों को सहेजना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। आइए, हम सब मिलकर इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दें और अपनी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सुदृढ़ बनाएं।
आपको यह पहल कैसी लगी? मंदिर जीर्णोद्धार के इस पुनीत कार्य पर अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें। इस पावन समाचार को अपने मित्रों, परिजनों और सभी शिव भक्तों के साथ साझा कर धर्म का प्रचार करें और समाज में सकारात्मकता फैलाएं।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






