लचरागढ़ के विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर में छात्राओं ने बिखेरा कला का जादू भव्य मेहंदी प्रतियोगिता में श्वेता ज्ञानी और ऊषा रानी ने मारी बाजी
विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर में छात्राओं ने पारंपरिक कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जीता सबका दिल।

सिमडेगा जिला के कोलेबिरा प्रखंड स्थित लचरागढ़ स्थित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर में छात्राओं के लिए भव्य मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र की इकाई द्वारा संचालित इस विद्यालय में कक्षा छठी से दसवीं की छात्राओं ने पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों में छिपी सृजनात्मक प्रतिभा और सांस्कृतिक मूल्यों को उजागर करना था।
- लचरागढ़ के विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर में छात्राओं के लिए भव्य मेहंदी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
- कक्षा षष्ठ से दशम तक की छात्राओं ने अपनी उत्कृष्ट कलात्मक प्रतिभा और सृजनात्मकता का प्रदर्शन किया।
- प्रतियोगिता में दसवीं की श्वेता कुमारी ने प्रथम और नवमी की ज्ञानी कुमारी ने द्वितीय स्थान हासिल किया।
- आठवीं की छात्रा ऊषा रानी सिंह ने तीसरा स्थान प्राप्त कर विद्यालय परिवार से पुरस्कार जीता।
- प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने विजेता और सहभागी छात्राओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।
झारखंड के सिमडेगा जिले के अंतर्गत लचरागढ़ में स्थित विवेकानन्द शिशु/विद्या मंदिर उच्च विद्यालय के प्रांगण में एक भव्य मेहंदी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित इस विद्यालय में आयोजित प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया। इस सांस्कृतिक और कलात्मक आयोजन का मुख्य उद्देश्य छात्राओं के भीतर छिपी कलात्मक अभिरुचि, धैर्य और भारतीय पारंपरिक कला के प्रति उनके रुझान को बढ़ावा देना था। इस प्रतियोगिता ने न केवल छात्राओं की रचनात्मकता को निखारा, बल्कि पूरे विद्यालय परिसर को एक उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया।
पारंपरिक कला और सृजनात्मकता का अद्भुत संगम
विवेकानन्द शिशु/विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ के प्रांगण में आयोजित इस प्रतियोगिता में कक्षा षष्ठ से लेकर दशम तक की बहनों (छात्राओं) ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। प्रतियोगिता की शुरुआत होते ही विद्यालय का माहौल पूरी तरह से कलात्मक रंग में रंग गया। छात्राओं ने अपने हाथों पर और अपनी सहेलियों के हाथों पर एक से बढ़कर एक बारीक और मनमोहक मेहंदी के डिजाइन उकेरे।
इस दौरान छात्राओं के बीच गजब का उत्साह और धैर्य देखने को मिला। उन्होंने पारंपरिक भारतीय डिजाइन, अरेबिक डिजाइन, मारवाड़ी पैटर्न और आधुनिक कलात्मक आकृतियों का समावेश करते हुए अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। इस रचनात्मक गतिविधि ने यह साबित कर दिया कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ इन छात्राओं में अद्भुत व्यावहारिक और सांस्कृतिक कौशल भी मौजूद है।
कड़ी प्रतिस्पर्धा और विजेताओं का चयन
प्रतियोगिता में शामिल सभी छात्राओं ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिससे निर्णायक मंडल के लिए विजेताओं का चयन करना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया था। बारीक कलात्मक सौंदर्य, डिजाइन की स्पष्टता, नवीनता और निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने जैसे कड़े मानकों के आधार पर विजेताओं की घोषणा की गई।
निर्णायक मंडल के निर्णय के अनुसार:
- प्रथम स्थान: बहन श्वेता कुमारी (कक्षा दसवीं) ने अपनी अद्वितीय कलाकारी से पहला स्थान हासिल किया।
- द्वितीय स्थान: बहन ज्ञानी कुमारी (कक्षा नवम) ने अपनी रचनात्मकता के दम पर दूसरा स्थान प्राप्त किया।
- तृतीय स्थान: बहन ऊषा रानी सिंह (कक्षा अष्टम) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीसरा स्थान पाया।
विजेता छात्राओं को विद्यालय परिवार की ओर से विशेष रूप से पुरस्कृत और सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, प्रतियोगिता में भाग लेने वाली अन्य सभी प्रतिभागी छात्राओं को भी सांत्वना पुरस्कार और प्रशंसा पत्र देकर उनका हौसला बढ़ाया गया, ताकि वे भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू का प्रेरक संबोधन
इस गरिमामयी अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र साहू ने उपस्थित सभी भैया-बहनों और आचार्यगणों को संबोधित किया। उन्होंने छात्राओं की कलात्मक प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और उन्हें जीवन में हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र साहू ने कहा: "भारतीय संस्कृति में मेहंदी केवल श्रृंगार का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध लोक परंपरा, खुशहाली और कलात्मक विरासत का जीवंत प्रतीक है। जब हमारी छात्राओं को इस प्रकार का सही मंच और अवसर मिलता है, तो उनकी आंतरिक प्रतिभा निखरकर सामने आती है। यही छोटी-छोटी प्रतिभाएं आगे चलकर समाज और राष्ट्र का नाम रोशन करती हैं।"
उन्होंने सभी बच्चों से अपनी आंतरिक क्षमताओं और कौशलों को पहचानने तथा उन्हें निरंतर निखारने के लिए लगातार प्रयास करने का आह्वान किया।
वनवासी कल्याण केंद्र और विद्यालय का योगदान
यह विद्यालय वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित है। यह समिति सुदूर और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को न केवल गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें अपनी मिट्टी, संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों से जोड़ने का भी सराहनीय कार्य कर रही है।
इस मेहंदी प्रतियोगिता के दौरान विद्यालय के सभी भैया-बहनों और आचार्यगणों ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी शिक्षकों ने छात्राओं का मनोबल बढ़ाया और उनकी कला की सराहना की। यह आयोजन न केवल छात्राओं की प्रतिभा को सामने लाने में सफल रहा, बल्कि इसने भारतीय संस्कृति और कला के प्रति नई पीढ़ी के जुड़ाव को और अधिक मजबूत करने का काम किया।
सत्य संदेश समाचार: ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं को मंच देने की सराहनीय पहल
लचरागढ़ के इस विद्यालय में आयोजित मेहंदी प्रतियोगिता यह स्पष्ट करती है कि यदि ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों की छात्राओं को उचित अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वे अपनी कला और संस्कृति को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं। आज के आधुनिक दौर में जहां पारंपरिक कलाएं लुप्त होती जा रही हैं, वहीं ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय प्रशासन और श्रीहरि वनवासी विकास समिति का यह प्रयास अत्यंत प्रशंसनीय है, जो शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों का भी बीजारोपण कर रहे हैं। भविष्य में ऐसी प्रतियोगिताओं का दायरा और अधिक विस्तृत किया जाना चाहिए ताकि हर बच्चे की छिपी प्रतिभा को निखारा जा सके।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हमारी पारंपरिक लोक कलाएं ही हमारी असली पहचान और सांस्कृतिक धरोहर हैं। जब हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजने के लिए आगे आती है, तो देश की सांस्कृतिक विरासत और अधिक सुदृढ़ होती है। बच्चों के भीतर छिपी इस रचनात्मकता को सिर्फ विद्यालय की चहारदीवारी तक सीमित न रखकर, हमें अपने घरों और समाज में भी प्रोत्साहित करना चाहिए। आइए, हम सब मिलकर अपने बच्चों को उनकी कलात्मक रुचि को पहचानने और उसे निखारने के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण प्रदान करें।
लचरागढ़ की इन प्रतिभावान बेटियों के इस शानदार और कलात्मक प्रयास पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि स्कूली स्तर पर ऐसी प्रतियोगिताएं बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं? अपने बहुमूल्य विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें, इस खबर को अपने मित्रों और परिजनों के साथ शेयर करें और हमारी समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें।
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