सिमडेगा में आग से राख हुई बेसहारा महिला की दुकान को मसीहा बनकर समाजसेवी भरत प्रसाद ने दोबारा संवारा, बेटियों की पढ़ाई का भी उठाया जिम्मा
समाजसेवी भरत प्रसाद ने पीड़ित महिला की दुकान में दोबारा भरा लाखों का सामान।

सिमडेगा के ठेठईटांगर में आगजनी से तबाह हुई शिल्पी देवी की दुकान को समाजसेवी भरत प्रसाद ने दोबारा खड़ा कर दिया है। उन्होंने दुकान में लाखों रुपये का सामान भरवाने के साथ ही पीड़ित महिला की बेटियों की पढ़ाई के लिए कॉपियां और पेन भी बांटे। इस मानवीय पहल ने संकट में घिरे पीड़ित परिवार के जीवन में नई उम्मीद की किरण जगा दी है।
- सिमडेगा के ठेठईटांगर प्रखंड स्थित बाजार टांड़ में रविवार देर रात भीषण आग लगने से शिल्पी देवी की गुमटी दुकान पूरी तरह जलकर राख हो गई थी।
- पति स्वर्गीय ज्योतिष कुमार के निधन के बाद तीन बेटियों की जिम्मेदारी संभाल रही पीड़ित महिला के सामने इस घटना से रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया था।
- पीड़ित परिवार की दयनीय स्थिति को देखते हुए प्रसिद्ध समाजसेवी भरत प्रसाद ने आगे बढ़कर दुकान में लाखों रुपये का नया सामान दोबारा भरवाया।
- समाजसेवी ने दुकान चलाने में मदद करने के साथ ही पीड़ित महिला की तीनों बेटियों की शिक्षा जारी रखने के लिए कॉपियां और पेन भी उपलब्ध कराए।
- इस मानवीय और प्रेरणादायक पहल की ठेठईटांगर के स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत ठेठईटांगर प्रखंड मुख्यालय के बाजार टांड़ में हाल ही में एक दर्दनाक हादसा सामने आया था। यहाँ रविवार की देर रात अचानक लगी भीषण आग की चपेट में आने से शिल्पी देवी नामक एक गरीब महिला की गुमटी दुकान पूरी तरह जलकर खाक हो गई थी। इस अगलगी की घटना में दुकान के भीतर रखा लाखों रुपये का सामान और पूरी गुमटी जलकर कोयला हो गई, जिससे पीड़ित परिवार के सामने भरण-पोषण की विकट समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन इस घोर संकट के समय में मानवता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जिसने न केवल एक उजड़े हुए परिवार को सहारा दिया बल्कि समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण भी पेश किया है।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर जिसने छीन ली रोजी-रोटी
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, ठेठईटांगर प्रखंड मुख्यालय के बाजार टांड़ में शिल्पी देवी अपनी छोटी सी गुमटी दुकान चलाकर अपने परिवार का गुजारा करती थीं। रविवार की देर रात करीब 2 से 3 बजे के बीच इस दुकान में अचानक अज्ञात कारणों से आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते और आग पर काबू पाने का प्रयास करते, तब तक दुकान के अंदर रखा सारा सामान जलकर राख हो चुका था।
घटना के समय शिल्पी देवी अपने परिवार के साथ घर पर थीं। सोमवार की सुबह करीब 10 बजे जब वह बाजार टांड़ स्थित अपनी दुकान पर पहुंचीं, तो वहाँ का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। अपनी आँखों के सामने अपनी आजीविका के एकमात्र साधन को राख के ढेर में बदला देख शिल्पी देवी फूट-फूटकर रोने लगीं। उनकी चीख-पुकार सुनकर वहाँ स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, लेकिन किसी के पास इस भारी नुकसान की भरपाई का कोई तुरंत उपाय नहीं था।
पति के निधन के बाद तीन बेटियों की परवरिश का भारी संकट
पीड़ित महिला शिल्पी देवी के जीवन का संघर्ष बेहद लंबा और दर्दनाक रहा है। उनके पति स्वर्गीय ज्योतिष कुमार का पहले ही निधन हो चुका है। पति की मृत्यु के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी अकेले शिल्पी देवी के कंधों पर आ गई थी। वह अपनी तीन बेटियों की परवरिश और उनकी पढ़ाई-लिखाई का खर्च इसी छोटी सी गुमटी दुकान से होने वाली आय से चला रही थीं।
इस भीषण अग्निकांड ने पहले से ही तंगहाली और मुश्किल परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे इस परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया था। दुकान जल जाने से शिल्पी देवी के सामने न केवल अपनी बेटियों को पालने का संकट खड़ा हो गया था, बल्कि बेटियों की पढ़ाई छूटने का डर भी सताने लगा था। ऐसे समय में जब चारों तरफ सिर्फ अंधेरा दिखाई दे रहा था, तब समाज के एक संवेदनशील नागरिक ने उनके जीवन में उजियारा फैलाने का बीड़ा उठाया।
समाजसेवी भरत प्रसाद बने मददगार, दुकान में दोबारा भरा सामान
पीड़ित परिवार की इस दयनीय और लाचार स्थिति की जानकारी जब स्थानीय समाजसेवी भरत प्रसाद को मिली, तो उनका संवेदनशील मन द्रवित हो उठा। उन्होंने बिना समय गंवाए पीड़ित परिवार की सीधी मदद करने का निर्णय लिया। शनिवार का दिन इस पीड़ित परिवार के लिए एक नई सुबह लेकर आया। समाजसेवी भरत प्रसाद स्वयं ठेठईटांगर बाजार टांड़ पहुंचे और मानवता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए पीड़ित महिला शिल्पी देवी की दुकान के लिए लाखों रुपये मूल्य का किराना और अन्य आवश्यक सामान अपनी ओर से उपलब्ध कराया।
उन्होंने न केवल दुकान को दोबारा शुरू करने के लिए सारा सामान भरवाया, बल्कि दुकान के ढांचे को भी दुरुस्त करने में सहयोग किया। इस मदद के बाद अब शिल्पी देवी पहले की तरह ही अपनी दुकान का संचालन कर सकेंगी और अपने पैरों पर खड़ी होकर स्वाभिमान के साथ अपनी बेटियों का पालन-पोषण कर सकेंगी।
शिक्षा के प्रति संवेदनशीलता: बच्चियों को बांटी कॉपियां और पेन
समाजसेवी भरत प्रसाद की यह मदद केवल दुकान का सामान दिलाने तक ही सीमित नहीं रही। वह जानते थे कि इस संकट का सबसे बुरा असर बच्चियों की शिक्षा पर पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने शिल्पी देवी की तीनों बेटियों की पढ़ाई में मदद करने का संकल्प लिया। उन्होंने बच्चियों को पढ़ाई के लिए आवश्यक कॉपियां, पेन और अन्य स्टेशनरी सामग्री भी अपनी ओर से भेंट की।
इस नेक पहल के दौरान समाजसेवी भरत प्रसाद ने कहा: "मुसीबत किसी के जीवन में बताकर नहीं आती। ऐसे समय में यदि हम किसी जरूरतमंद के साथ खड़े हो सकें और उसके चेहरे पर दोबारा मुस्कान ला सकें, तो इससे बड़ी मानव सेवा कुछ नहीं है। महिला और उसके बच्चों की स्थिति देखकर मैंने तुरंत मदद करने का फैसला किया। मेरा प्रयास है कि यह परिवार दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो और बच्चियों की पढ़ाई किसी भी परिस्थिति में न रुके।"
भावुक होकर शिल्पी देवी ने जताया आभार, ग्रामीणों ने की सराहना
अपनी उजड़ी हुई दुकान को दोबारा सजते देख और बेटियों के हाथों में कॉपियां देखकर शिल्पी देवी की आँखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने भावुक मन से समाजसेवी का आभार व्यक्त किया।
पीड़ित महिला शिल्पी देवी ने भावुक होकर कहा: "आग लगने के बाद मुझे समझ नहीं आ रहा था कि परिवार को कैसे संभालें और दुकान दोबारा कैसे शुरू करें। ऐसा लग रहा था कि सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन ऐसे कठिन समय में भरत प्रसाद जी ने जिस तरह आगे बढ़कर देवदूत की तरह हमारी मदद की है, उसे मैं और मेरा परिवार जीवनभर नहीं भूलेंगे।"
इस सराहनीय कार्य की पूरे ठेठईटांगर प्रखंड में चर्चा हो रही है। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि समाज में ऐसे संवेदनशील लोगों की बहुत आवश्यकता है जो केवल बातें बनाने के बजाय धरातल पर उतरकर किसी पीड़ित की वास्तविक मदद करते हैं। आग की लपटों ने भले ही शिल्पी देवी की दुकान को राख कर दिया था, लेकिन भरत प्रसाद के सेवा भाव ने उस राख से उम्मीदों का एक नया सवेरा खड़ा कर दिया है।
सत्य संदेश समाचार: [सच्ची समाज सेवा और प्रशासनिक संवेदनशीलता की दरकार]
समाजसेवी भरत प्रसाद द्वारा उठाई गई यह मानवीय पहल दर्शाती है कि समाज में आज भी संवेदनशीलता और भाईचारा जीवित है। जहाँ एक ओर प्रशासनिक तंत्र ऐसी आपदाओं के बाद कागजी कार्रवाई और मुआवजे के फेर में पीड़ितों को उलझाए रखता है, वहीं समाजसेवियों की त्वरित मदद सीधे तौर पर जिंदगी को पटरी पर ले आती है। प्रशासन को भी अग्निकांड जैसी घटनाओं के पीड़ितों के लिए त्वरित आर्थिक सहायता की व्यवस्था करनी चाहिए ताकि किसी गरीब का आशियाना या रोजगार पूरी तरह न उजड़े। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हमारे समाज की असली ताकत एक-दूसरे का हाथ थामने में है। जब भी किसी पड़ोसी, नागरिक या गरीब पर संकट आए, तो हमें प्रशासनिक मदद का इंतजार किए बिना अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। एक छोटा सा प्रयास किसी का उजड़ा हुआ आशियाना फिर से बसा सकता है और बच्चों के भविष्य को अंधकार में डूबने से बचा सकता है। आइए, हम सब मिलकर इस मानवीय संदेश को जन-जन तक पहुंचाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव के वाहक बनें। इस प्रेरक पहल पर अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करें ताकि अन्य लोग भी ऐसी सेवा के लिए प्रेरित हो सकें।
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