लचरागढ़ के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य समापन शिवाजी भरत और एकलव्य दल ने लहराया परचम
विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ।

झारखंड के लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ। इस प्रतियोगिता में शिवाजी, भरत और एकलव्य दल के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन कर परचम लहराया। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र साहु ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेल को जीवन में अनुशासन का आधार बताया।
- लचरागढ़ के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में राष्ट्रीय खेल दिवस पर आयोजित फुटबॉल, वॉलीबॉल और रस्सा-कशी प्रतियोगिता का भव्य समापन हुआ।
- प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र साहु ने टॉस उछालकर और फुटबॉल में किक मारकर फाइनल मैचों का औपचारिक शुभारंभ किया।
- प्रतियोगिता के विभिन्न वर्गों में शिवाजी दल, भरत दल और एकलव्य दल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए खिताबी जीत हासिल की।
- कार्यक्रम का कुशल नेतृत्व भागीरथी सिंह व नूतन रंजन सिंह ने किया, जबकि रेफरी की भूमिका श्री सबरण सिंह ने निभाई।
- समारोह के अंत में किशोर भारती के अध्यक्ष ने सभी आचार्यों, छात्रावास प्रमुखों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
झारखंड के सिमडेगा जिले के अंतर्गत लचरागढ़ में खेल और शारीरिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक भव्य खेल महोत्सव का आयोजन किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई 'श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड' द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित फुटबॉल, वॉलीबॉल एवं रस्सा-कशी प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस खेलकूद प्रतियोगिता में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अपनी अद्वितीय खेल प्रतिभा और अनुशासन का परिचय दिया। समापन समारोह के दौरान विजयी प्रतिभागियों को सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाया गया।
प्रधानाचार्य राजेंद्र साहु ने किया शुभारंभ, दिया प्रेरक संदेश
फाइनल मैचों का औपचारिक शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र साहु ने टॉस उछालकर एवं फुटबॉल में किक मारकर किया। इस अवसर पर मैदान में उपस्थित खिलाड़ियों और दर्शकों को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य ने खेल के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक सुदृढ़ता के लिए भी आवश्यक है।
प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र साहु ने कहा: "खेल केवल हार और जीत की सीमा तक सीमित नहीं है, यह चरित्र निर्माण, एकाग्रता और अनुशासित जीवन की सर्वोत्तम प्रयोगशाला है। हमारी वनवासी भूमि में छिपी प्रतिभाएं जब खेल के मैदान में उतरती हैं, तो वे अपनी जिजीविषा और सामूहिक शक्ति का परिचय देती हैं। मैदान में बहाया गया पसीना आपके भीतर कभी न हारने वाले संकल्प को जन्म देता है। खेल भावना को सर्वोपरि रखें; आज की सीख ही कल आपको जीवन के हर क्षेत्र में विजयी बनाएगी।"
विभिन्न खेल स्पर्धाओं के रोमांचक परिणाम
प्रतियोगिता के दौरान फुटबॉल, वॉलीबॉल और रस्सा-कशी के कड़े मुकाबले देखने को मिले, जिसमें खिलाड़ियों ने जीत के लिए पूरा दमखम लगा दिया। प्रतियोगिता के अंतिम परिणाम इस प्रकार रहे:
फुटबॉल स्पर्धा के परिणाम
फुटबॉल के भैया (बालक) वर्ग के अत्यंत रोमांचक मुकाबले में शिवाजी दल ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन करते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया, जबकि एकलव्य दल को उपविजेता स्थान से संतोष करना पड़ा। वहीं, फुटबॉल के बहन (बालिका) वर्ग में भरत दल ने शानदार तालमेल दिखाते हुए खिताबी जीत हासिल की और एकलव्य दल इस वर्ग में भी उपविजेता रहा।
वॉलीबॉल स्पर्धा के परिणाम
वॉलीबॉल के भैया वर्ग में एकलव्य दल ने अपने दमदार सर्विस और स्मैश के दम पर जीत दर्ज कर विजेता की ट्रॉफी उठाई, जबकि शिवाजी दल उपविजेता रहा। वॉलीबॉल के बहन वर्ग में एक बार फिर भरत दल का दबदबा देखने को मिला, जिसने फाइनल मैच जीतकर विजेता का खिताब हासिल किया और एकलव्य दल उपविजेता स्थान पर रहा।
रस्सा-कशी स्पर्धा के परिणाम
ताकत और आपसी समन्वय के खेल रस्सा-कशी के भैया शिशु मंदिर वर्ग में एकलव्य दल ने अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए विजेता का खिताब जीता, जबकि आरुणि दल उपविजेता रहा। वहीं, रस्सा-कशी के बहन वर्ग में आरुणि दल ने बाजी मारते हुए विजेता का स्थान हासिल किया और एकलव्य दल को उपविजेता स्थान से संतोष करना पड़ा।
सफल आयोजन में समिति और शिक्षकों का रहा विशेष योगदान
इस पूरी खेल प्रतियोगिता के सफल और व्यवस्थित संचालन में विद्यालय परिवार का सराहनीय योगदान रहा। पूरे कार्यक्रम का कुशल नेतृत्व भागीरथी सिंह एवं नूतन रंजन सिंह ने संयुक्त रूप से किया। खेल के मैदान पर मंच संचालन का दायित्व श्री प्रमोद पाणीग्राही ने बखूबी निभाया, जिन्होंने अपनी ओजस्वी आवाज से खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया। सभी मैचों के दौरान निष्पक्ष और सटीक निर्णय सुनिश्चित करने के लिए रेफरी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका श्री सबरण सिंह ने निभाई, जिनकी खेल भावना और निर्णय क्षमता की सभी ने सराहना की।
समारोह के अंतिम चरण में मुख्य अतिथियों और प्रधानाचार्य द्वारा सभी विजेता एवं उपविजेता दलों के खिलाड़ियों को मेडल और ट्रॉफी प्रदान कर पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का औपचारिक समापन किशोर भारती के अध्यक्ष द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विद्यालय के सभी आचार्यों, छात्रावास प्रमुख, सह-प्रमुख, बस चालक, उप-चालक एवं भैया-बहनों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया, जिनके प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष सहयोग से यह आयोजन ऐतिहासिक बन सका।
सत्य संदेश समाचार: ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं को तराशने की अनूठी पहल
लचरागढ़ के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में आयोजित यह खेल प्रतियोगिता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों के बच्चों को सही मंच और अवसर मिले, तो वे खेल के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं। श्रीहरि वनवासी विकास समिति जैसी संस्थाएं इन सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक विकास को जो प्राथमिकता दे रही हैं, वह अत्यंत सराहनीय है। प्रशासन और खेल विभाग को भी ऐसी संस्थाओं के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं की खोज करनी चाहिए ताकि देश को भविष्य के चैंपियन मिल सकें।
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खेल हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने और टीम भावना के साथ काम करने की सीख देते हैं। आज के इस डिजिटल युग में जब बच्चे मैदानों से दूर हो रहे हैं, तब ऐसे खेल आयोजन उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत और मानसिक रूप से सजग बनाने का काम करते हैं। आइए, हम सब मिलकर अपने आसपास के बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करें और उन्हें एक स्वस्थ जीवन शैली अपनाने के लिए प्रेरित करें।
सजग नागरिक बनें, खेलों को बढ़ावा दें। इस खेल महोत्सव की सफलता और हमारे युवा खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन के लिए इस खबर को अधिक से अधिक लोगों के साथ साझा करें। कमेंट बॉक्स में अपनी बहुमूल्य राय जरूर दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए और क्या प्रयास किए जाने चाहिए।
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