लचरागढ़ में 1 और 2 नवंबर को होगा प्रांत स्तरीय टीएलएम प्रतियोगिता सह शैक्षिक मेला
विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर में मेले की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक संपन्न हुई।

सिमडेगा जिले के लचरागढ़ स्थित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में आगामी 1 एवं 2 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले प्रांत स्तरीय टीएलएम प्रतियोगिता सह शैक्षिक मेला की तैयारियों को लेकर समीक्षा बैठक हुई। प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई। मेले में 85 से अधिक नवाचारी शिक्षण सामग्रियों का प्रदर्शन होगा।
- 1 और 2 नवंबर 2026 को विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में होगा प्रांत स्तरीय शैक्षिक मेला।
- प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू की अध्यक्षता में तैयारियों की समीक्षा की गई।
- प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चन्द्र दुबे ने टीएलएम के शैक्षिक महत्व पर प्रकाश डाला।
- मेले में 85 से अधिक स्वनिर्मित शिक्षण सामग्रियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
- पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मिट्टी के दीयों की बिक्री रहेगी।
तैयारियों को अंतिम रूप देने पर चर्चा
वनवासी कल्याण केन्द्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विवेकानन्द शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ के परिसर में आचार्य परिवार की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का शुभारंभ ब्रह्मनाद के उच्चारण के साथ हुआ।
बैठक की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू ने की। इस अवसर पर प्रांत शिक्षा प्रमुख सुभाष चन्द्र दुबे का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि टीएलएम केवल लकड़ी, कागज और मिट्टी से बने मॉडल नहीं हैं, बल्कि ये गुरु-शिष्य के बीच ज्ञान का सेतु हैं। इनके माध्यम से कठिन और अमूर्त विषयों को सरल, सहज एवं समझने योग्य बनाया जा सकता है, जिससे बच्चों में जिज्ञासा और सीखने की रुचि विकसित होती है।
विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की समीक्षा
मेले के सुव्यवस्थित, अनुशासित और समयबद्ध संचालन को लेकर स्वागत, मंच संचालन, भोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सुरक्षा तथा प्रचार-प्रसार सहित विभिन्न विभागों की तैयारियों की बिंदुवार समीक्षा की गई। प्रधानाचार्य राजेन्द्र साहू ने सभी विभाग प्रमुखों से सेवाभाव और पूर्ण निष्ठा के साथ निर्धारित समय-सीमा में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
मेले में दिखेगा शिक्षा, संस्कृति और स्वावलंबन का संगम
दो दिवसीय शैक्षिक मेले में आचार्यों द्वारा स्वयं तैयार की गई कम लागत वाली 85 से अधिक नवाचारी एवं प्रभावी शिक्षण सामग्रियों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन सामग्रियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाने की शिक्षण विधियों से परिचित कराया जाएगा।
मेले में झारखंड के पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे, जिनके माध्यम से स्थानीय खानपान और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ ही भैया-बहनों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे।
मिट्टी के दीयों की बिक्री से मिलेगा स्वावलंबन को बढ़ावा
दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए मेले में मिट्टी के दीयों की बिक्री के लिए विशेष केंद्र बनाया जाएगा। अभिभावक उचित मूल्य पर दीये खरीदकर विद्यार्थियों के परिश्रम को प्रोत्साहित कर सकेंगे। इस पहल के माध्यम से स्वावलंबन, श्रम के सम्मान और पारंपरिक मिट्टी के दीयों के उपयोग का संदेश दिया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, इस शैक्षिक मेले में बड़ी संख्या में अभिभावकों के साथ आसपास के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं और छात्र-छात्राओं के शामिल होने की उम्मीद है।
बैठक का समापन धन्यवाद ज्ञापन और सभी के मंगल की कामना के साथ शुभकामना मंत्र के उच्चारण से हुआ।
सत्य संदेश समाचार: शिक्षा और संस्कार को जोड़ने की पहल
लचरागढ़ में आयोजित होने वाला यह प्रांत स्तरीय शैक्षिक मेला शिक्षण के नवाचारों, सांस्कृतिक परंपराओं और स्वावलंबन को एक मंच पर लाने का प्रयास है। मेले में तैयार शिक्षण सामग्रियों और विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा को अधिक रोचक एवं व्यावहारिक बनाने पर जोर रहेगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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