सिमडेगा में 12 सितंबर को सजेगी राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी समझौते से मुकदमों से मुक्ति पाने के लिए गठित की गईं सात विशेष बेंच
आपसी सहमति से मुकदमों के त्वरित निपटारे के लिए सात बेंचों का हुआ गठन।

झारखंड के सिमडेगा जिले में 12 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा सुचारू संचालन के लिए सात विशेष बेंचों का गठन किया गया है। सुबह 10:30 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में आपसी सहमति से विभिन्न मामलों का त्वरित निपटारा किया जाएगा, जिससे पक्षकारों के समय और धन की बचत होगी।
- 12 सितंबर 2026 को सिमडेगा जिला न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया जाएगा।
- इस लोक अदालत के सुचारू संचालन के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) द्वारा सात विशेष बेंचों का गठन किया गया है।
- सुबह 10:30 बजे से शुरू होने वाले इस शिविर में बिजली, वैवाहिक, श्रम, और बैंक रिकवरी जैसे मामलों की सुनवाई होगी।
- लोक अदालत में पक्षकारों की आपसी सहमति से मुकदमों का स्थायी और आसान समाधान निकाला जाएगा।
- जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष के आदेश संख्या 40/2026 के तहत यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
सिमडेगा जिले के नागरिकों के लिए अपने लंबे समय से लंबित कानूनी विवादों को हमेशा के लिए समाप्त करने का एक बेहतरीन अवसर आ रहा है। आगामी 12 सितंबर 2026 को जिला मुख्यालय में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) सिमडेगा के आदेशानुसार इस बार मुकदमों के त्वरित और सुलभ निपटारे के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं। इस अदालत में न केवल न्यायालयों में लंबित मामले, बल्कि थानों और विभागों के स्तर पर लंबित प्री-लिटिगेशन मामलों को भी आपसी सहमति से सुलझाया जाएगा।
राष्ट्रीय लोक अदालत का समय और महत्व
राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन 12 सितंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे से किया जाएगा। जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA), सिमडेगा के आदेश संख्या 40/2026 के तहत लोक अदालत के सुचारू संचालन के लिए पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य न्यायालयों में बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करना और आम जनता को बिना किसी मानसिक व आर्थिक तनाव के न्याय दिलाना है। इस मंच पर होने वाले फैसले आपसी सहमति पर आधारित होते हैं, जिसके कारण दोनों पक्षों के बीच की कड़वाहट हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।
सात विशेष बेंचों का गठन और उनके कार्यक्षेत्र
लोक अदालत में आने वाले मामलों की भारी संख्या और उनकी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए कुल सात विशेष बेंचों का गठन किया गया है। प्रत्येक बेंच को विशिष्ट श्रेणियों के मामलों की सुनवाई और उनके निपटारे की जिम्मेदारी सौंपी गई है:
पहली बेंच: वैवाहिक और दुर्घटना दावों का निपटारा
पहली बेंच में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय से संबंधित मामलों की सुनवाई होगी। इस बेंच के दायरे में मुख्य रूप से बिजली से जुड़े विवाद, वैवाहिक विवाद, एमएसीटी (मोटर दुर्घटना दावा) और अन्य महत्वपूर्ण सिविल मामले शामिल किए गए हैं। इन संवेदनशील मामलों में आपसी सुलह को प्राथमिकता दी जाएगी।
दूसरी बेंच: फौजदारी और वन-उत्पाद से जुड़े मामले
दूसरी बेंच को समझौता योग्य आपराधिक मामलों की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें एनआई एक्ट की धारा 138 (चेक बाउंस) से संबंधित मामले, वन विभाग, उत्पाद विभाग, खनन विभाग और मोटर वाहन अधिनियम (MV Act) से जुड़े समझौता योग्य मामलों का निपटारा किया जाएगा।
तीसरी बेंच: एसडीजेएम न्यायालय के लंबित विवाद
तीसरी बेंच मुख्य रूप से एसडीजेएम (SDJM) न्यायालय में लंबित मामलों पर केंद्रित रहेगी। इस बेंच में भी समझौता योग्य आपराधिक मामलों, वन, उत्पाद, खनन और एमवी एक्ट से संबंधित उन मामलों को लिया जाएगा जो निचले न्यायालय के स्तर पर लंबित हैं।
चौथी बेंच: श्रम विवाद और निषेधाज्ञा के मामले
चौथी बेंच में श्रम विवादों का समाधान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, इस बेंच में सिविल अपील, किराया विवाद, निषेधाज्ञा (Injunction), विशिष्ट निष्पादन (Specific Performance) और अन्य जटिल समझौता योग्य आपराधिक व सिविल मामलों की गहन सुनवाई कर उनका निपटारा किया जाएगा।
पांचवीं बेंच: राजस्व और सेवानिवृत्ति लाभ के मुद्दे
पांचवीं बेंच का कार्यक्षेत्र प्रशासनिक और वित्तीय मामलों से जुड़ा है। इसमें राजस्व, प्रमाण पत्र (Certificate Cases), भूमि अधिग्रहण, वाणिज्यिक एवं आयकर से संबंधित मामले शामिल हैं। इसके साथ ही, सरकारी कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति लाभ और प्री-लिटिगेशन मामलों को भी इसी बेंच में सुलझाया जाएगा।
छठी बेंच: बैंक रिकवरी और टेलीफोन बिल के विवाद
छठी बेंच को वित्तीय संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विवादों के निपटारे का जिम्मा सौंपा गया है। इस बेंच में विभिन्न बैंकों के बैंक रिकवरी मामले, टेलीफोन विभाग के विवाद और जिला विधिक प्राधिकार से जुड़े अन्य लंबित मामलों का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर किया जाएगा।
सातवीं बेंच: उपभोक्ता फोरम से जुड़े मामले
सातवीं बेंच विशेष रूप से उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करेगी। इस बेंच में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (Consumer Forum) से संबंधित सभी लंबित मामलों की सुनवाई होगी, ताकि उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के तहत त्वरित राहत मिल सके।
लोक अदालत के माध्यम से समझौते के फायदे
जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से आम जनता से इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की गई है। लोक अदालत में मामलों का निपटारा होने से कई फायदे होते हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी भी पक्ष की हार या जीत नहीं होती, बल्कि दोनों पक्ष सम्मानजनक समझौते के साथ घर लौटते हैं।
प्राधिकार के अधिकारियों ने अपनी अपील में कहा:
> "राष्ट्रीय लोक अदालत विवादों के समाधान का एक ऐसा सुलभ मंच है, जहां पक्षकार आपसी सहमति से अपने पुराने से पुराने मामलों का हमेशा के लिए निपटारा करा सकते हैं। इससे न केवल उनके कीमती समय की बचत होती है, बल्कि अदालती खर्चों और मानसिक तनाव से भी बड़ी मुक्ति मिलती है।"
इस मंच पर हुए फैसले के खिलाफ कहीं कोई अपील नहीं होती, जिससे भविष्य में नए विवादों की गुंजाइश समाप्त हो जाती है। इसके अलावा, यदि किसी मामले में कोर्ट फीस जमा की गई हो, तो समझौते के बाद वह फीस भी नियमानुसार वापस कर दी जाती है।
सत्य संदेश समाचार: सुलभ न्याय की दिशा में एक सराहनीय कदम
सिमडेगा में आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय लोक अदालत न्याय व्यवस्था को आम लोगों के करीब लाने का एक बेहतरीन जरिया है। अदालतों में सालों-साल खिंचने वाले मुकदमों के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोग आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। ऐसे में सात अलग-अलग बेंचों का गठन कर हर श्रेणी के मामलों को सुलझाने की यह पहल अत्यंत सराहनीय है। स्थानीय प्रशासन और विधिक सेवा प्राधिकार को चाहिए कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि सुदूरवर्ती इलाकों के ग्रामीण भी इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
एक सजग नागरिक वही है जो विवादों को बढ़ावा देने के बजाय उनके शांतिपूर्ण और कानूनी समाधान का मार्ग चुने। सिमडेगा की यह राष्ट्रीय लोक अदालत आपके लिए अपने पुराने विवादों को खत्म कर जीवन में शांति और सौहार्द वापस लाने का एक सुनहरा मौका है। आइए, इस विधिक अभियान का हिस्सा बनें और समाज में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की मिसाल पेश करें।
क्या आपके पास भी कोई ऐसा मामला है जिसे आप आपसी बातचीत से सुलझाना चाहते हैं? इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने दोस्तों, परिजनों और जरूरतमंदों के साथ साझा करें ताकि वे भी इस लोक अदालत का लाभ उठा सकें। अपनी राय और सुझाव कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें।
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