सिमडेगा में सुबह बाथरूम जाने के दौरान युवक को करैत सांप ने डंसा डिब्बे में सांप बंद कर अस्पताल पहुंचे परिजन इलाज जारी
केरसई में सुबह करैत सांप के काटने से युवक की हालत बिगड़ी सदर अस्पताल में इलाज जारी।

सिमडेगा के केरसई प्रखंड अंतर्गत रिमझिम टोली में मंगलवार तड़के एक युवक को जहरीले करैत सांप ने डस लिया। पीड़ित कमल नाग को गंभीर हालत में परिजनों ने सदर अस्पताल में भर्ती कराया है। परिजन पहचान के लिए सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल ले गए, जहां युवक का इलाज जारी है।
- सिमडेगा के केरसई प्रखंड के रिमझिम टोली में मंगलवार तड़के कमल नाग को जहरीले करैत सांप ने डसा।
- परिजनों ने सूझबूझ दिखाते हुए करैत सांप को डिब्बे में बंद किया और मरीज के साथ सदर अस्पताल पहुंचे।
- घटना सुबह लगभग 4:00 बजे की है, जब युवक बिस्तर से उठकर बाधूम (शौचालय) की ओर जा रहा था।
- वर्तमान में पीड़ित का सदर अस्पताल सिमडेगा में चिकित्सकों की देखरेख में इलाज जारी है।
- वर्षा ऋतु में ग्रामीण इलाकों में सांपों का खतरा बढ़ने से ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है।
झारखंड के सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड में एक बेहद चौंकाने वाला और सतर्क करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के रिमझिम टोली निवासी कमल नाग को मंगलवार तड़के सोते समय उठकर बाथरूम जाते वक्त एक जहरीले करैत सांप ने डस लिया। इसके बाद परिजनों ने आनन-फानन में बिना समय गंवाए उन्हें नजदीकी सदर अस्पताल पहुँचाया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र के ग्रामीणों में डर और चिंता का माहौल है, क्योंकि बारिश के इस मौसम में सांपों के निकलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
सुबह की नींद खुली और पैर के नीचे आ गया काल
सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड अंतर्गत आने वाले रिमझिम टोली गांव में मंगलवार की सुबह अन्य दिनों की तरह ही सामान्य थी। लेकिन सुबह के करीब 4:00 बजे यहाँ के निवासी कमल नाग के लिए यह सुबह एक बड़ी मुसीबत लेकर आई। कमल नाग अपने कमरे में सो रहे थे और अचानक लघुशंका के लिए उनकी नींद खुली। वे बिस्तर से उतरकर जैसे ही बाथरूम की ओर बढ़े, अंधेरे में उनका पैर फर्श पर रेंग रहे एक जहरीले करैत सांप पर पड़ गया। पैर दबते ही सांप ने तुरंत उनके पैर में डस लिया। डंक मारते ही कमल नाग दर्द से तड़प उठे और शोर मचाया, जिससे घर के अन्य सदस्य तुरंत जाग गए।
परिजनों की अनूठी सूझबूझ: सांप को डिब्बे में किया बंद
आमतौर पर सांप के काटने के बाद लोग घबरा जाते हैं और सांप को मारने या भागने में लग जाते हैं, लेकिन कमल नाग के परिजनों ने अद्भुत सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने न केवल पीड़ित को ढांढस बंधाया, बल्कि उस जहरीले करैत सांप को भी सुरक्षित तरीके से एक प्लास्टिक के डिब्बे में बंद कर लिया। परिजनों का उद्देश्य था कि जब वे मरीज को अस्पताल ले जाएं, तो डॉक्टर को सांप दिखाने में आसानी हो ताकि सही एंटी-वेनम देकर त्वरित इलाज शुरू किया जा सके।
परिजनों ने तुरंत एक निजी वाहन की व्यवस्था की और कमल नाग को लेकर सदर अस्पताल, सिमडेगा के लिए रवाना हो गए। अस्पताल पहुँचते ही उन्होंने डॉक्टरों को डिब्बे में बंद सांप दिखाया, जिससे डॉक्टरों को तुरंत यह समझने में मदद मिली कि यह भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक, करैत है।
एक परिजन ने बताया:
> "सुबह-सुबह अचानक चीख सुनकर हम सब उठ गए। जब देखा कि कमल को सांप ने काटा है, तो हमने हिम्मत नहीं हारी। हमने तुरंत सांप को एक डिब्बे में सुरक्षित बंद किया ताकि डॉक्टरों को इलाज के दौरान यह पहचानने में कोई संशय न रहे कि कौन सा एंटी-वेनम देना है। इसके बाद हम तुरंत गाड़ी से अस्पताल भागे।"
सदर अस्पताल सिमडेगा में इलाज जारी
सदर अस्पताल सिमडेगा के डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए कमल नाग का प्राथमिक उपचार शुरू किया और उन्हें आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं एवं एंटी-स्नेक वेनम (ASV) का डोज दिया। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुंचने और सांप की सटीक पहचान होने के कारण मरीज को सही इलाज मिल सका है। फिलहाल कमल नाग को डॉक्टरों की सघन निगरानी में रखा गया है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
बारिश के मौसम में बढ़ा सर्पदंश का खतरा: ग्रामीण चिंतित
इस घटना के बाद से केरसई प्रखंड और आसपास के रिमझिम टोली इलाके में ग्रामीणों के बीच चिंता काफी बढ़ गई है। मानसून और लगातार हो रही बारिश के कारण सांपों के बिलों में पानी भर जाता है, जिसके कारण वे सुरक्षित और सूखी जगहों की तलाश में इंसानी बस्तियों और घरों का रुख करते हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय और तड़के सुबह कच्चे और पक्के दोनों तरह के घरों में सांपों का प्रवेश बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी अपील की है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि आपातकालीन स्थिति में किसी की जान न जाए।
सत्य संदेश समाचार: सूझबूझ से बची जान, अंधविश्वास पर भारी पड़ी जागरूकता
केरसई की यह घटना यह दर्शाती है कि आपातकालीन स्थिति में सूझबूझ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर किसी की जान बचाई जा सकती है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश के बाद लोग झाड़-फूंक और ओझा-गुनी के चक्कर में पड़कर कीमती समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की मौत हो जाती है। कमल नाग के परिजनों ने सांप को डिब्बे में बंद कर अस्पताल ले जाकर न केवल अंधविश्वास को नकारा, बल्कि एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। प्रशासन को भी ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम की उपलब्धता को लेकर गंभीर होना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मानसून का मौसम अपने साथ कई प्राकृतिक चुनौतियां लेकर आता है, जिसमें सर्पदंश जैसी घटनाएं प्रमुख हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें, फर्श पर सोने से बचें और घर के आसपास साफ-सफाई रखें। अंधेरे में बाहर निकलते समय हमेशा टॉर्च या रोशनी का उपयोग करें। यदि कभी ऐसी अनहोनी हो, तो झाड़-फूंक के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल का रुख करें, क्योंकि समय पर मिला इलाज ही जीवन की रक्षा कर सकता है।
सर्पदंश की इस घटना और परिजनों की सूझबूझ पर आपकी क्या राय है? क्या आपके क्षेत्र के अस्पतालों में एंटी-वेनम की पर्याप्त व्यवस्था है? अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें, इस महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक जानकारी को अपने मित्रों व परिवार के साथ शेयर कर जागरूकता फैलाएं।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






