सिमडेगा के बोलबा में वनवासी कल्याण केंद्र की नई प्रखंड समिति का गठन, सुशील मरांडी ने कार्यकर्ताओं को दिया सेवा और समर्पण का मंत्र
प्रखंड स्तर पर संगठन मजबूती और सामाजिक उत्थान के लिए नई कार्यकारिणी का हुआ गठन।

सिमडेगा के बोलबा प्रखंड में वनवासी कल्याण केंद्र की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें संगठन की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। प्रांत संगठन मंत्री सुशील मरांडी की उपस्थिति में समाज के सर्वांगीण विकास और संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया गया। इस बैठक का उद्देश्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वावलंबन को बढ़ावा देना है।
बोलबा में श्री केसरी सिंह की अध्यक्षता में वनवासी कल्याण केंद्र की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई।
बैठक में प्रांत संगठन मंत्री सुशील मरांडी ने संगठन के गौरवशाली इतिहास और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।
सर्वसम्मति से हीरालाल प्रधान को नया अध्यक्ष और युगल बेहरा को सचिव मनोनीत किया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेलकूद और संस्कृति संरक्षण के कार्यों को तेज करने का संकल्प लिया गया।
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा कार्य पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड में वनवासी कल्याण केंद्र की प्रखंड इकाई की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। शुक्रवार को अपराह्न 2:00 बजे आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ सदस्य श्री केसरी सिंह ने की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर संगठन को वैचारिक और व्यावहारिक रूप से मजबूत करना, नई समिति का गठन व विस्तार करना था। इसके साथ ही वनवासी समाज के बीच शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, संस्कृति, धर्म जागरण, सामाजिक जागरण और ग्राम विकास जैसी विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर विस्तृत रणनीति तैयार की गई।
बैठक में उपस्थित मुख्य अतिथि और संगठन के पदाधिकारी
इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक में वनवासी कल्याण केंद्र के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और मार्गदर्शक मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में प्रांत संगठन मंत्री सुशील मरांडी, प्रांत खेलकूद प्रमुख डोमन चंद्र महतो, गुमला विभाग संगठन मंत्री खेतु नायक और सलडेगा संकुल प्रमुख संतोष दास उपस्थित रहे। इन सभी वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति ने स्थानीय कार्यकर्ताओं में नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। बैठक के दौरान संगठन की मजबूती और भविष्य की कार्ययोजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
वनवासी कल्याण आश्रम का गौरवशाली इतिहास और सेवा यात्रा
बैठक को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए प्रांत संगठन मंत्री सुशील मरांडी ने वनवासी कल्याण आश्रम के समृद्ध इतिहास, इसके पवित्र उद्देश्यों और संगठन निर्माण की आवश्यकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वनवासी समाज का विकास केवल भौतिक साधनों से नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और संस्कृति के संरक्षण से ही संभव है।
प्रांत संगठन मंत्री सुशील मरांडी ने कहा: "वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना 26 दिसंबर 1952 को जसपुर में श्रद्धेय बाला साहब देशपांडे के भगीरथ प्रयासों से हुई थी। प्रारंभ में यह एक अत्यंत छोटा प्रयास था, जो केवल एक छात्रावास और प्राथमिक शिक्षा से शुरू हुआ था। लेकिन आज, अपने निस्वार्थ सेवा कार्यों के बदौलत यह संगठन एक विशाल वटवृक्ष की तरह पूरे भारतवर्ष में फैल चुका है।"
उन्होंने आगे कहा कि संगठन का मूल ध्येय वनवासी समाज का सर्वांगीण विकास, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं प्रदान करना, सामाजिक जागरण लाना और उनकी समृद्ध लोक संस्कृति व परंपराओं का संरक्षण करना है। इसके लिए संगठन शिक्षा, छात्रावास, चिकित्सा, खेलकूद, कृषि विकास, ग्राम विकास, महिला एवं युवा कार्य, श्रद्धा जागरण तथा संस्कृति संरक्षण जैसे विभिन्न आयामों के माध्यम से निरंतर सेवा कार्य कर रहा है।
"सामूहिक सहभागिता से ही सशक्त होगा समाज"
प्रांत संगठन मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल किसी एक क्षेत्र में विकास करने से पूरे समाज का संपूर्ण विकास संभव नहीं है। यही कारण है कि वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, खेलकूद और स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर वनवासी समाज की वास्तविक आवश्यकताओं को समझें और पूरी संवेदनशीलता व सेवा भाव से कार्य करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का कार्य किसी विशेष व्यक्ति या पद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामूहिक सहभागिता और समर्पित कार्यकर्ताओं के माध्यम से समाज को सशक्त बनाने का एक निरंतर चलने वाला प्रयास है।
बोलबा प्रखंड की नई कार्यकारिणी समिति का गठन
बैठक के दूसरे सत्र में संगठन के सुचारू संचालन और गतिविधियों को गति देने के लिए सर्वसम्मति से बोलबा प्रखंड की नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया। इस नई समिति में समाज के विभिन्न वर्गों और ऊर्जावान कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जो इस प्रकार हैं:
- संरक्षक: केसरी सिंह और टकबर सिंह
- अध्यक्ष: हीरालाल प्रधान
- उपाध्यक्ष: भानु प्रताप सिंह
- सचिव: युगल बेहरा
- सहसचिव: धनेश्वर सिंह
- कोषाध्यक्ष: दिलीप राम
- श्रद्धा जागरण प्रमुख: मोतीराम सेनापति
- खेलकूद प्रमुख: रणथू मोदी
- हितरक्षा प्रमुख: चंद्रशेखर सेनापति
- सुरक्षा मंच प्रमुख: सोमारू सिंह
- शिक्षा प्रमुख: किशोर कुमार सिंह
- चिकित्सा प्रमुख: पारसमणी दास
- पर्यावरण प्रमुख: गौरी शंकर सिंह
- स्वच्छता प्रमुख: विश्राम प्रधान
- लोक कला प्रमुख: ललन सिंह
- महिला प्रमुख: एलीशा एक्का और फुलमनी कुमारी
- युवा प्रमुख: जगरनाथ सिंह
- सदस्य: कृष्णा लोहारा, मधुसूदन सिंह, कमलजीत सिंह और ललन मांझी
सुदूर गांवों तक सेवा कार्य पहुंचाने का महासंकल्प
नई समिति के गठन के बाद सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों और उपस्थित वक्ताओं ने संकल्प लिया कि बोलबा प्रखंड के प्रत्येक गांव और टोले तक संगठन को मजबूत बनाया जाएगा। वक्ताओं ने कहा कि वनवासी समाज के बीच सेवा कार्यों को व्यापक रूप से गति दी जाएगी। इसके तहत विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
1. शिक्षा का प्रसार: ग्रामीण और गरीब बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर और संसाधन उपलब्ध कराना।
2. स्वास्थ्य जागरूकता: सुदूर क्षेत्रों में चिकित्सा शिविरों का आयोजन और स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना।
3. खेलकूद को बढ़ावा: ग्रामीण युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने के लिए खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करना।
4. महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आयामों के माध्यम से महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित करना।
5. पर्यावरण और स्वच्छता: गांवों में स्वच्छता अभियान चलाना और वृक्षारोपण के माध्यम से पर्यावरण का संरक्षण करना।
6. संस्कृति का संरक्षण: स्थानीय लोक कला, पारंपरिक गीतों, नृत्यों और सांस्कृतिक धरोहरों को संजोए रखना।
बैठक के अंत में नवनियुक्त अध्यक्ष हीरालाल प्रधान ने संगठन द्वारा दी गई इस बड़ी जिम्मेदारी के लिए सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया और विश्वास दिलाया कि पूरी टीम मिलकर बोलबा प्रखंड में सेवा के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।
सत्य संदेश समाचार: वनवासी समाज के सशक्तिकरण का मार्ग
यह बैठक इस बात को रेखांकित करती है कि ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि सामाजिक संगठनों की धरातलीय सक्रियता भी उतनी ही आवश्यक है। वनवासी कल्याण केंद्र द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण के लिए उठाई गई यह पहल अत्यंत सराहनीय है। स्थानीय स्तर पर ऐसी मजबूत और समर्पित समितियों का गठन शासन और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करता है। अब नवगठित समिति के कंधों पर यह बड़ी जिम्मेदारी है कि वे कागजी प्रस्तावों से आगे बढ़कर सुदूर गांवों में वास्तविक बदलाव लाएं।
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