सिमडेगा के सरस्वती शिशु मंदिर सलडेगा में भाई-बहन के अटूट प्रेम का उत्सव, रक्षा सूत्र बांधकर भाइयों ने लिया सुरक्षा का संकल्प
सरस्वती शिशु मंदिर सलडेगा में पारंपरिक हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया रक्षाबंधन पर्व।

सिमडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा रक्षाबंधन उत्सव हर्षोल्लास से मनाया गया। इस दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके मंगल की कामना की। कार्यक्रम में वनवासी कल्याण केंद्र के पदाधिकारियों सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में रक्षाबंधन का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा और आत्मीय वातावरण में संपन्न हुआ।
- बहनों ने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधा और भाइयों ने बहनों की सुरक्षा व सम्मान का पवित्र संकल्प लिया।
- कार्यक्रम में वनवासी कल्याण केंद्र के नगर अध्यक्ष श्री सूर्य नारायण साहू और सचिव श्री रवि वर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
- भाजपा नेता और सामाजिक कार्यकर्ता श्री श्रद्धानंद बेसरा तथा कोषाध्यक्ष श्री शैलेश अग्रवाल ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
- इस उत्सव के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता की सीख दी गई।
झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन उत्सव अत्यंत गरिमामयी ढंग से मनाया गया। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड द्वारा संचालित इस विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों की अनूठी झलक देखने को मिली। इस पावन अवसर पर विद्यालय के भैया-बहनों ने पूरे उत्साह, उमंग और अनुशासन के साथ भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण विद्यालय परिसर स्नेह और आत्मीयता के गीतों से गुंजायमान रहा।
भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों का अनूठा संगम
विद्यालय परिसर में आयोजित इस रक्षाबंधन उत्सव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से परिचित कराना था। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हुई। विद्यालय की बहनों ने अत्यंत ही श्रद्धा भाव से थाली सजाई, जिसमें रोली, अक्षत, आरती का दीपक और सुंदर रक्षा सूत्र सजे हुए थे। बहनों ने अपने भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके बाद बहनों ने भाइयों की कलाई पर स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षा सूत्र बांधा। वहीं, भाइयों ने भी अपनी बहनों को उपहार भेंट किए और जीवन के हर मोड़ पर उनकी सुरक्षा, सम्मान और सुख-दुःख में सदैव ढाल बनकर खड़े रहने का पवित्र संकल्प लिया। इस भावपूर्ण दृश्य ने विद्यालय परिसर में उपस्थित सभी लोगों को भाव-विभोर कर दिया।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति और उनका स्वागत
इस सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव को और अधिक गरिमामयी बनाने के लिए कई गणमान्य अतिथियों ने कार्यक्रम में शिरकत की। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड के सिमडेगा नगर समिति के अध्यक्ष श्री सूर्य नारायण साहू जी, सचिव श्री रवि वर्मा जी, कोषाध्यक्ष श्री शैलेश अग्रवाल जी तथा भाजपा नेता व वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता श्री श्रद्धानंद बेसरा जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार द्वारा सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत व अभिनंदन किया गया। अतिथियों की उपस्थिति से विद्यालय के भैया-बहनों का उत्साह दोगुना हो गया। अतिथियों ने बच्चों के अनुशासन और अपनी संस्कृति के प्रति उनके जुड़ाव की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
रक्षाबंधन केवल धागा नहीं, बल्कि कर्तव्यों का स्मरण: सूर्य नारायण साहू
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर समिति के अध्यक्ष श्री सूर्य नारायण साहू जी ने रक्षाबंधन पर्व के आध्यात्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को इस पर्व की मूल भावना से अवगत कराया।
श्री सूर्य नारायण साहू जी ने कहा: "रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर धागा बांधने का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, कर्तव्य, त्याग और पारस्परिक संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करने वाला हमारी भारतीय संस्कृति का अनुपम पर्व है। भारतीय संस्कृति में रिश्तों को केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि कर्तव्यों और संस्कारों से भी जोड़ा गया है। यह रक्षासूत्र इसी पवित्र भावना का प्रतीक है, जो हमें अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति हमारे दायित्वों का स्मरण कराता है।"
उन्होंने भैया-बहनों से आह्वान किया कि वे रक्षाबंधन के वास्तविक संदेश को अपने जीवन में उतारें और एक-दूसरे के प्रति सदैव आदर, सम्मान और सहयोग की भावना बनाए रखें। उन्होंने आगे कहा कि जब हमारे परिवार और समाज में परस्पर विश्वास और आत्मीयता मजबूत होगी, तभी हमारा राष्ट्र भी सशक्त, समृद्ध और संस्कारवान बनेगा।
नई पीढ़ी को गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और भैया-बहनों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि आज के आधुनिक युग में भारतीय पर्व-त्योहारों के माध्यम से बच्चों में संस्कार, संस्कृति और सामाजिक समरसता की भावना विकसित करना बेहद आवश्यक है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य और आचार्यों ने भी इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है, जिसमें नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा का स्थान सर्वोपरि है।
भावुक और मनमोहक रहा विद्यालय परिसर का माहौल
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के भैया-बहनों में एक अलग ही उमंग और उत्साह देखने को मिला। बहनों द्वारा भाइयों की कलाई पर बांधे गए रंग-बिरंगे रक्षा सूत्र और भाइयों द्वारा बहनों के प्रति व्यक्त किए गए आदर व स्नेह ने वातावरण को अत्यंत भावुक और मनमोहक बना दिया। विद्यालय परिसर में चारों ओर “प्रेम, विश्वास और रक्षा के संकल्प” की गूंज सुनाई दे रही थी।
इस उत्सव ने यह संदेश दिया कि रिश्तों की वास्तविक सुंदरता केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति सम्मान, संवेदना और जिम्मेदारी निभाने में निहित है। अंत में, पूरे विद्यालय परिवार ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की बधाई दी और सामूहिक रूप से राष्ट्र कल्याण का संकल्प लिया।
सत्य संदेश समाचार: [संस्कारों से ही होगा सशक्त और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण]
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में आयोजित यह रक्षाबंधन उत्सव वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक है। आज के भौतिकतावादी युग में जब पारिवारिक और सामाजिक संबंध कमजोर हो रहे हैं, ऐसे समय में बच्चों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ना एक सराहनीय प्रयास है। विद्यालय और वनवासी कल्याण केंद्र की यह पहल नई पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के बीजारोपण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब तक हमारी युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और संस्कारों के प्रति जागरूक रहेगी, तब तक हमारे समाज और देश की नींव मजबूत बनी रहेगी।
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आइए, हम सब मिलकर अपनी गौरवशाली भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सहेजने का संकल्प लें। अपने बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ उच्च नैतिक संस्कार भी प्रदान करें ताकि वे एक संवेदनशील, सुरक्षित और मजबूत समाज का निर्माण कर सकें। रक्षाबंधन का यह पावन संदेश हर घर तक पहुंचे और समाज में आपसी भाईचारा और अधिक प्रगाढ़ हो।
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