बोलबा के खंडानिशान में भव्य कलश यात्रा के साथ अखंड हरिकीर्तन और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव का शुभारंभ महंत उमाकांत महाराज की गरिमामयी उपस्थिति ने बढ़ाया श्रद्धालुओं का उत्साह
खंडानिशान में भव्य कलश यात्रा और अखंड हरिकीर्तन के साथ धार्मिक अनुष्ठान का हुआ शुभारंभ।

सिमडेगा के बोलबा प्रखंड अंतर्गत मालसाड़ा खंडानिशान में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ हुआ। बाइलधोवा नदी से पवित्र जल उठाकर मंदिर परिसर लाया गया। महंत उमाकांत जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुए इस धार्मिक अनुष्ठान से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल स्थापित हो गया है।
- मालसाड़ा खंडानिशान में भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और अखंड हरिकीर्तन का शुभारंभ हुआ।
- बाइलधोवा नदी से पुरोहित परमेश्वर पांडा ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धालुओं को पवित्र जल ग्रहण कराया।
- धार्मिक महोत्सव में पहुंचे महंत उमाकांत जी महाराज ने श्रद्धालुओं को धर्म, सदाचार और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
- आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष ललन रौतिया और सचिव रविंदर रौतिया सहित पूरी समिति सक्रिय रूप से जुटी है।
- धार्मिक अनुष्ठान का समापन 5 सितंबर को विधि-विधान से पूर्णाहुति, महाआरती और भंडारे के साथ किया जाएगा।
झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत बोलबा प्रखंड के मालसाड़ा खंडानिशान में धार्मिक आस्था और भक्ति का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन और अखंड हरीकीर्तन नामयज्ञ का अत्यंत भक्तिमय माहौल में भव्य शुभारंभ किया गया है। इस धार्मिक आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह और हर्ष व्याप्त है। आयोजन की शुरुआत एक भव्य कलश यात्रा के साथ हुई, जिसने पूरे क्षेत्र के वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और पवित्र बना दिया है। इस पावन अवसर पर सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी गहरी आस्था का परिचय दिया।
बाइलधोवा नदी से उठी भव्य कलश यात्रा
धार्मिक अनुष्ठान के पहले दिन मालसाड़ा खंडानिशान से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु गाजे-बाजे के साथ बाइलधोवा नदी पहुंचे। नदी तट पर सुप्रसिद्ध पुरोहित परमेश्वर पांडा द्वारा पूर्ण विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ कलश पूजन संपन्न कराया गया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने पवित्र जल को अपने कलश में धारण किया।
पीले और लाल वस्त्रों में सजे श्रद्धालु सिर पर कलश धारण कर जय श्रीराम, हरे कृष्ण और जय श्री कृष्ण के गगनभेदी नारे लगाते हुए वापस यज्ञ स्थल की ओर प्रस्थान कर रहे थे। कलश यात्रा के मार्ग में जगह-जगह पर ग्रामीणों ने पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया। इस यात्रा के कारण पूरे बोलबा क्षेत्र का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय और उल्लासपूर्ण हो गया।
महंत उमाकांत जी महाराज का प्रेरक आध्यात्मिक संदेश
इस भव्य धार्मिक उत्सव में मुख्य आकर्षण के रूप में पूज्य महंत उमाकांत जी महाराज उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने न केवल कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई, बल्कि वहां उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को अपने अमृत वचनों से निहाल भी किया। उन्होंने समाज में शांति, सदाचार और भाईचारे की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
महंत उमाकांत जी महाराज ने कहा: "धार्मिक आयोजन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये समाज को एक सूत्र में बांधने और हमारी नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति, सभ्यता और सनातन परंपराओं से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम हैं। भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श और उनका सत्य संदेश हमें हमेशा धर्म, प्रेम और निस्वार्थ मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम एक आदर्श और समरस समाज का निर्माण कर सकते हैं।"
अखंड हरिकीर्तन से गुंजायमान हुआ पूरा क्षेत्र
कलश यात्रा के यज्ञ मंडप में पहुंचने के बाद विधिवत रूप से भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा और कलश की स्थापना की गई। इसके तुरंत बाद पुरोहितों के सानिध्य में अखंड हरिकीर्तन नामयज्ञ का शुभारंभ हुआ। 'हरे राम हरे कृष्ण' और 'कृष्ण कन्हैया लाल की जय' के महामंत्र से पूरा खंडानिशान क्षेत्र गुंजायमान हो उठा।
स्थानीय और बाहरी संकीर्तन मंडलियों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे भजनों और कीर्तनों ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। मृदंग, झांझ और मंजीरों की थाप पर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर दिखे। रात भर चलने वाले इस अखंड कीर्तन में आसपास के कई गांवों से लोग मत्था टेकने और पुण्य लाभ अर्जित करने पहुंच रहे हैं।
आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका
इस विशाल और गरिमामयी धार्मिक आयोजन को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय आयोजन समिति के पदाधिकारी और सदस्य दिन-रात पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं। समिति के सदस्यों ने पेयजल, सुरक्षा, प्रकाश और श्रद्धालुओं के बैठने की उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की है।
इस आयोजन को सफल बनाने में समिति के अध्यक्ष ललन रौतिया, उपाध्यक्ष जगरनाथ रौतिया, सचिव रविंदर रौतिया और कोषाध्यक्ष महेंद्र रौतिया की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है। इसके साथ ही समिति के सक्रिय सदस्य पारसनाथ रौतिया, विक्रम रौतिया, मनोज रौतिया, केसरी रौतिया, गोवर्धन रौतिया और नीलांबर महतो भी व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
5 सितंबर को महाप्रसाद और भव्य भंडारे के साथ समापन
आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि इस दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत समापन 5 सितंबर को नामयज्ञ की पूर्णाहुति के साथ होगा। पूर्णाहुति के पश्चात उपस्थित सभी श्रद्धालुओं की उपस्थिति में महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
इसके बाद समिति द्वारा तैयार किए गए विशेष महाप्रसाद और भव्य भंडारे का वितरण किया जाएगा। आयोजकों ने क्षेत्र के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों और श्रद्धालुओं से इस पावन धार्मिक अनुष्ठान में सपरिवार सम्मिलित होने और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त कर पुण्य का भागी बनने की भावपूर्ण अपील की है।
सत्य संदेश समाचार: धार्मिक आयोजन और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
बोलबा के खंडानिशान में आयोजित यह भव्य धार्मिक उत्सव केवल आस्था का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता को मजबूत करने का एक अनुपम उदाहरण है। आज के आधुनिक दौर में जब समाज में बिखराव बढ़ रहा है, ऐसे समय में महंत उमाकांत जी महाराज के विचार और यह सामूहिक आयोजन लोगों को नैतिक मूल्यों की याद दिलाते हैं। हमारी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण रखने वाले ऐसे स्थानीय प्रयासों की जितनी सराहना की जाए, वह कम है। प्रशासन और प्रबुद्ध वर्ग को भी ऐसे सकारात्मक सामाजिक आयोजनों को निरंतर सहयोग और संरक्षण देना चाहिए ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
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सजग रहें, सक्रिय बनें। इस पावन अवसर पर अपने समाज में शांति, समरसता और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लें। इस पावन धार्मिक अनुष्ठान और महंत जी के सामाजिक समरसता के संदेश पर आपकी क्या राय है? नीचे कमेंट बॉक्स में अपने विचार साझा करें, इस खबर को अपने मित्रों और परिजनों तक पहुंचाएं और धर्म व सकारात्मकता के इस संदेश को फैलाने में अपना योगदान दें।
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