पाकरटांड़ के प्रसिद्ध श्रीरामरेखा धाम में सावन के तीसरे सोमवार पर उमड़ी भारी भीड़ शंख नदी से जल उठाकर 20 हजार श्रद्धालुओं ने किया पवित्र जलाभिषेक
श्रीरामरेखा धाम में श्रद्धालुओं ने बारिश के बीच किया पवित्र जलाभिषेक।

पाकरटांड़ के ऐतिहासिक श्रीरामरेखा धाम में सावन के तीसरे सोमवार को आस्था का भव्य नजारा दिखा। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेतृत्व में लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं ने शंख नदी से पवित्र जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। भारी बारिश के बावजूद भक्तों का उत्साह चरम पर रहा।
- श्रीरामरेखा धाम में सावन के तीसरे सोमवार पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
- यह भव्य धार्मिक आयोजन विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।
- श्रद्धालुओं ने शंख नदी के तट पर पूजा-अर्चना कर वहां से पवित्र जल उठाया और धाम की ओर प्रस्थान किया।
- तेज बारिश के बीच भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और पूरे मार्ग में हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयकारे गूंजते रहे।
- कार्यक्रम में विहिप के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव और श्रीरामरेखा धाम के सचिव ओम प्रकाश साहू सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
झारखंड के सिमडेगा जिले के पाकरटांड़ प्रखंड में स्थित सुप्रसिद्ध और अत्यंत पवित्र पौराणिक स्थल श्रीरामरेखा धाम में सावन के तीसरे सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास का एक अद्भुत और अनुपम नजारा देखने को मिला। सावन के इस पावन अवसर पर आयोजित विशेष जलाभिषेक कार्यक्रम में करीब 20 हजार से अधिक माता-बहनों और सनातनी श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशाल धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने शंख नदी से पवित्र गंगाजल स्वरूप जल उठाया और पैदल यात्रा करते हुए भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित पवित्र शिवलिंग पर जलाभिषेक किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र शिवमय और राममय हो गया।
शंख नदी तट पर वैदिक अनुष्ठान और जलयात्रा का शुभारंभ
सावन के तीसरे सोमवार के पावन अवसर पर सुबह से ही शंख नदी के पावन तट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी थी। जलाभिषेक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह-सुबह शंख नदी के घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधिवत पूजा-अर्चन के साथ हुई। योग्य पुरोहितों द्वारा पूजा संपन्न कराने के बाद श्रद्धालुओं ने नदी से तांबे और पीतल के कलशों में पवित्र जल उठाया। जल उठाने के बाद जैसे ही पहला जयकारा लगा, पूरी घाटी हर-हर महादेव और जय श्रीराम के उद्घोष से गुंजायमान हो उठी। इस जलयात्रा में महिलाओं, युवतियों, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी देखते ही बन रही थी। सभी श्रद्धालु कतारबद्ध होकर श्रद्धा भाव से श्रीरामरेखा धाम की ओर बढ़ने लगे।
तेज बारिश के बीच भी अटूट रहा श्रद्धालुओं का हौसला
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार क्षेत्र में सुबह से ही तेज बारिश हो रही थी। लेकिन शिव भक्तों के कदम इस बाधा के आगे नहीं थमे। रिमझिम और कभी-कभी मूसलाधार बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह दोगुना नजर आया। कीचड़ और फिसलन भरे रास्तों की परवाह किए बिना श्रद्धालु नंगे पैर ही धाम की ओर बढ़ते रहे। मार्ग में जगह-जगह पर स्थानीय ग्रामीणों ने भी पुष्प वर्षा कर जलयात्रियों का स्वागत किया। भक्ति संगीत की धुनों पर थिरकते हुए युवा और महिलाएं भगवान शिव की आराधना में लीन दिखे। इस अद्भुत दृश्य ने यह साबित कर दिया कि सच्ची आस्था के आगे मौसम की हर चुनौती बौनी साबित होती है।
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद की चाक-चौबंद व्यवस्था
इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन को सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने अभूतपूर्व तैयारी की थी। शंख नदी से लेकर श्रीरामरेखा धाम तक के पूरे मार्ग में जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे। इन शिविरों में बारिश से बचने के शेड, शुद्ध पेयजल, नींबू पानी, प्राथमिक चिकित्सा और फलाहार की व्यवस्था की गई थी। विहिप और बजरंग दल की प्रखंड समितियों के सैकड़ों सक्रिय कार्यकर्ता पूरे मार्ग में मुस्तैद रहे ताकि किसी भी श्रद्धालु को कोई असुविधा न हो। इसके अलावा, धाम परिसर में पहुंचने पर श्रीरामरेखा धाम समिति के पदाधिकारियों ने श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया और कतारबद्ध तरीके से गर्भगृह में प्रवेश कराकर जलाभिषेक की प्रक्रिया को अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया।
श्रीरामरेखा धाम का ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व
श्रीरामरेखा धाम झारखंड ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा और छत्तीसगढ़ के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का एक बहुत बड़ा केंद्र है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में अपने 14 वर्षों के वनवास काल के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण ने इस स्थान पर कुछ समय बिताया था। यहां स्थित गुफा और उनके चरण चिह्न आज भी श्रद्धालुओं के लिए पूजनीय हैं। माना जाता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीराम ने स्वयं एक शिवलिंग की स्थापना की थी, जिसकी पूजा करने के लिए हर वर्ष लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। सावन के महीने में इस शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व माना गया है, और यही कारण है कि सावन के सोमवार को यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।
महाप्रसाद का वितरण और गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति
जलाभिषेक संपन्न होने के बाद आयोजन समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं के लिए भव्य महाप्रसाद (भंडारे) की व्यवस्था की गई थी। हजारों श्रद्धालुओं ने कतार में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। इस पूरे भव्य आयोजन की निगरानी और संचालन में कई प्रमुख सामाजिक और धार्मिक हस्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौके पर मुख्य रूप से विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष कौशल राज सिंह देव, श्रीरामरेखा धाम समिति के सचिव ओम प्रकाश साहू सहित धाम के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे। इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रखंड अध्यक्षों, मंत्रियों और सक्रिय सनातनी कार्यकर्ताओं ने अपनी समर्पित सेवाएं देकर इस पावन आयोजन को ऐतिहासिक और सफल बनाया।
सत्य संदेश समाचार: आस्था, अनुशासन और सामाजिक समरसता की मिसाल
सावन के तीसरे सोमवार पर श्रीरामरेखा धाम में उमड़ा यह जनसैलाब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातनी संस्कृति की एकता, अनुशासन और गहरी आस्था का प्रतीक है। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने के बावजूद जिस तरह से विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और धाम समिति ने आपसी समन्वय से पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया, वह अत्यंत सराहनीय है। स्थानीय प्रशासन और सामाजिक संगठनों का यह तालमेल भविष्य के बड़े आयोजनों के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शिका साबित होगा। ऐसे पावन पौराणिक स्थलों का संरक्षण और विकास हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
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