राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन सिमडेगा की महिलाओं ने प्रस्तुत किया पारंपरिक आदिवासी नृत्य
सिमडेगा की महिला प्रतिनिधियों ने पारंपरिक परिधान और नृत्य से संस्कृति की झलक दिखाई।

रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस में आयोजित काउंसिल ऑफ कैथोलिक वीमेन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। अंतिम दिन सिमडेगा धर्मप्रांत की महिला प्रतिनिधियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान में सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। सभा नेत्री सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा ने आदिवासी संस्कृति और परंपरा पर संबोधन दिया।
- राष्ट्रीय सम्मेलन के अंतिम दिन सिमडेगा की महिला प्रतिनिधियों ने आदिवासी नृत्य प्रस्तुत किया।
- महिलाओं ने पारंपरिक आदिवासी परिधान, गीत और नृत्य के माध्यम से संस्कृति की झलक दिखाई।
- जोसिमा खाखा ने भाषा, संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, गीत और नृत्य को आदिवासी समाज की पहचान बताया।
- उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक विरासत से जोड़ने के लिए परिवार और समाज की भूमिका पर जोर दिया।
- सम्मेलन ने महिला प्रतिनिधियों को आपसी संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर दिया।
पारंपरिक नृत्य से दिखाई संस्कृति की झलक
सिमडेगा: रांची स्थित जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल सर्विस में आयोजित काउंसिल ऑफ कैथोलिक वीमेन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सम्मेलन का रविवार को समापन हुआ। सम्मेलन के अंतिम दिन सिमडेगा धर्मप्रांत से शामिल महिला प्रतिनिधियों ने पारंपरिक आदिवासी परिधान पहनकर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया।
महिलाओं ने पारंपरिक गीत और नृत्य के माध्यम से आदिवासी संस्कृति और परंपरा की खूबसूरती प्रस्तुत की। सांस्कृतिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
संस्कृति और परंपरा को बचाने पर जोर
समापन कार्यक्रम के दौरान सभा नेत्री सह जिला परिषद सदस्य जोसिमा खाखा ने आदिवासी संस्कृति और परंपरा पर आधारित संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज, गीत और नृत्य से होती है।
उन्होंने कहा कि संस्कृति केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली ऐसी विरासत है, जो समाज को अपनी जड़ों से जोड़कर रखती है। आधुनिकता के दौर में अपनी संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने नई पीढ़ी को पारंपरिक विरासत से जोड़ने के लिए परिवार और समाज को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता बताई।
महिला प्रतिनिधियों को मिला संवाद का अवसर
सम्मेलन के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों से पहुंचीं महिला प्रतिनिधियों को आपसी संवाद, अनुभव साझा करने और एक-दूसरे से जुड़ने का अवसर मिला।
समापन अवसर पर सिमडेगा की महिलाओं की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सम्मेलन में स्थानीय आदिवासी परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
ये महिला प्रतिनिधि रहीं मौजूद
कार्यक्रम में अनीता रानी तोपनो, शीला कीड़ो, क्लारा बा, कमला लुगुन, रैनी खाखा, फैबिओला सोरेन, वेरोनिका कुल्लू, सुशीला लकड़ा, रोजालिया कुजूर, पुष्पा होरो, अनिमा कुजूर, अनिमा कंडुलना, टेरेसा भलारिया, करमेला कुल्लू, सुचिता जोजो, नीरू कांती बाड़ा, रोबर्टिना एक्सेस, अनिमा केरकेट्टा और फिलिसिता सोरेंग समेत अन्य महिला प्रतिनिधि मौजूद थीं।
सत्य संदेश समाचार: संस्कृति की प्रस्तुति से सामने आई सिमडेगा की पारंपरिक पहचान
राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन अवसर पर सिमडेगा की महिला प्रतिनिधियों ने पारंपरिक आदिवासी नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में संस्कृति, परंपरा और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने के महत्व पर चर्चा हुई। ऐसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां पारंपरिक गीत, नृत्य और परिधान को लोगों के बीच सामने लाने का माध्यम बनती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भाषा, गीत, नृत्य और परंपराएं समाज की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ना सामूहिक जिम्मेदारी है।
पारंपरिक कार्यक्रमों से संस्कृति को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।
सिमडेगा की महिलाओं ने सम्मेलन में अपनी संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
आप भी अपनी स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजें और आगे बढ़ाएं।
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