गुमला के पालकोट में बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर में गूंजा हरे राम हरे कृष्ण का महामंत्र 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन और विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
पालकोट के बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर में सावन के पावन अवसर पर अखंड हरिकीर्तन संपन्न हुआ।

गुमला के पालकोट स्थित ऐतिहासिक बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर परिसर में सावन के पावन महीने में आयोजित 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन बुधवार सुबह संपन्न हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और अखंड महामंत्र का जाप किया। मंदिर समिति द्वारा आयोजित इस पारंपरिक आयोजन में विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया था।
- गुमला के पालकोट में स्थित बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर में सावन के पावन महीने के अवसर पर 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन का भव्य आयोजन किया गया।
- यह धार्मिक अनुष्ठान मंगलवार से शुरू होकर बुधवार सुबह 9 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और महाआरती के साथ संपन्न हुआ।
- आयोजन के दौरान हरे राम हरे कृष्णा और हर हर महादेव के जयकारों से पूरा पालकोट क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
- मंदिर के पुजारी संत मिश्र और विजेन्द्र मिश्र के अनुसार यह कीर्तन भजन की परंपरा पूर्वजों के समय से लगातार चली आ रही है।
- इस दौरान मंदिर समिति की ओर से 24 घंटे अनवरत चलने वाले विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
- आयोजन को सफल बनाने में आचार्य श्री संत मिश्र, रविन्द्र मिश्रा, दीपक मिश्रा, सितेश साहू और रिपु केशरी सहित सैकड़ों स्थानीय ग्रामीणों ने सक्रिय योगदान दिया।
गुमला जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल पालकोट में आस्था का एक अनूठा समागम देखने को मिला। यहाँ के सुप्रसिद्ध बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर परिसर में सावन के पवित्र महीने के उपलक्ष्य में आयोजित 24 घंटे का अखंड अष्टयाम हरिकीर्तन बुधवार सुबह सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस धार्मिक अनुष्ठान में न केवल पालकोट बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। "हरे राम हरे कृष्णा" और "हर हर महादेव" के पावन महामंत्र से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा, जिससे संपूर्ण क्षेत्र भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
पालकोट में आस्था का सैलाब: बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
झारखंड का गुमला जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के लिए भी जाना जाता है। गुमला के अंतर्गत आने वाला पालकोट क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ स्थित बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के श्रद्धालुओं के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है। सावन के पावन महीने में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
हर साल की तरह इस साल भी सावन के पावन अवसर पर मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मंदिर की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। यही कारण है कि सावन के महीने में यहाँ प्रतिदिन जलाभिषेक करने वाले भक्तों का तांता लगा रहता है। इस वर्ष भी सावन के पावन उपलक्ष्य में मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और यहाँ 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्ति के अनुपम रंग में रंग दिया।
24 घंटे का अखंड महामंत्र जाप: भक्ति रस में डूबा पूरा क्षेत्र
इस वर्ष आयोजित 24 घंटे का अखंड अष्टयाम हरिकीर्तन मंगलवार को अत्यंत हर्षोल्लास के साथ प्रारंभ हुआ था। कीर्तन की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और कलश पूजन के साथ की गई। इसके बाद स्थानीय और बाहरी कीर्तन मंडलियों ने "हरे राम हरे कृष्णा" और "हर हर महादेव" के महामंत्र का जाप शुरू किया। यह अखंड जाप बिना किसी विघ्न के लगातार 24 घंटे तक चलता रहा और बुधवार सुबह 9 बजे पूर्णाहूति, महाआरती और विशेष पूजा-अर्चना के साथ संपन्न हुआ।
इस दौरान पूरा पालकोट कस्बा और आसपास का इलाका भक्तिमय ध्वनियों से गूंजता रहा। रात भर चले इस कीर्तन में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते और नाचते नजर आए, जिससे माहौल में एक अत्यंत सकारात्मक और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ।
पूर्वजों के समय से चली आ रही है परंपरा: पुजारियों का वक्तव्य
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पालकोट की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा का एक अभिन्न हिस्सा है। मंदिर के मुख्य पुजारियों ने इस परंपरा के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला।
पुजारी संत मिश्र और विजेन्द्र मिश्र ने संयुक्त रूप से कहा: "यह कीर्तन भजन की परंपरा हमारे पूर्वजों के समय से चली आ रही है। सावन के पावन महीने में बाबा बुढ़ा महादेव के दरबार में इस तरह के आयोजन से न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र में सुख, शांति, समृद्धि और आपसी भाईचारा बढ़ता है। हमारे पूर्वजों ने जिस श्रद्धा के साथ इस परंपरा की शुरुआत की थी, आज की युवा पीढ़ी भी उसी निष्ठा और उत्साह के साथ इसे आगे बढ़ा रही है, जो कि अत्यंत हर्ष का विषय है।"
पुजारियों ने बताया कि समय के साथ इस आयोजन का स्वरूप और भव्य होता जा रहा है, और अब इसमें भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच चुकी है।
24 घंटे चलता रहा विशाल भंडारा: सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल
किसी भी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ आने वाले श्रद्धालुओं के लिए क्या व्यवस्थाएं की गई हैं। बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर समिति ने इस दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया। कीर्तन के शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। यह भंडारा साधारण नहीं था, बल्कि यह भी कीर्तन की तरह ही लगातार 24 घंटे तक अनवरत चलता रहा।
भंडारे में शुद्ध और सात्विक भोजन तैयार किया गया था, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया गया। हजारों की संख्या में आए भक्तों ने कतारबद्ध होकर बेहद अनुशासित तरीके से महाप्रसाद ग्रहण किया। इस भंडारे के सफल संचालन के लिए स्थानीय ग्रामीणों और युवाओं ने दिन-रात एक कर दिया। भोजन पकाने से लेकर उसके वितरण और सफाई व्यवस्था तक, हर कार्य को अत्यंत सुव्यवस्थित ढंग से अंजाम दिया गया, जो पालकोट की सामाजिक समरसता और एकता को दर्शाता है।
आयोजन समिति और स्थानीय युवाओं का सराहनीय योगदान
इस भव्य और विशाल धार्मिक अनुष्ठान को सफल बनाने में स्थानीय पूजा समिति और प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कीर्तन भजन और भंडारे को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने और व्यवस्था बनाए रखने में आचार्य श्री संत मिश्र, रविन्द्र मिश्रा, दीपक मिश्रा, सितेश साहू और रिपु केशरी सहित सैकड़ों सक्रिय सदस्यों ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
इन सभी सदस्यों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, पेयजल आपूर्ति, स्वच्छता और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की। स्थानीय प्रशासन के सहयोग और युवाओं की टोली की सक्रियता के कारण इतनी बड़ी भीड़ होने के बावजूद पूरे आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय स्थिति उत्पन्न नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से गाँव के युवाओं में सेवा भाव और नेतृत्व क्षमता का विकास होता है, जो समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सत्य संदेश समाचार: धार्मिक आयोजन और सामाजिक एकता का अनुपम संदेश
पालकोट के बाबा बुढ़ा महादेव मंदिर में संपन्न हुआ यह अखंड हरिकीर्तन केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण एकता का जीवंत दस्तावेज है। आज के आधुनिक और व्यस्त युग में भी युवा पीढ़ी का अपनी प्राचीन परंपराओं से जुड़ाव और सेवा भाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना समाज के लिए एक अत्यंत सकारात्मक संकेत है। स्थानीय समिति और युवाओं द्वारा बिना किसी सरकारी सहायता के इतने बड़े पैमाने पर भंडारे और भीड़ का प्रबंधन करना प्रशासन के लिए भी एक सीख है कि जनभागीदारी से बड़े से बड़े काम को सुगम बनाया जा सकता है। हम इस सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के लिए पालकोट की जनता और आयोजन समिति की सराहना करते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हमारे धार्मिक और पारंपरिक उत्सव हमें केवल पूजा-पाठ का ही मार्ग नहीं दिखाते, बल्कि वे हमें आपस में जुड़ने, सेवा करने और सामुदायिक समरसता बढ़ाने का भी अवसर प्रदान करते हैं। पालकोट के युवाओं ने जिस तरह एकजुट होकर इस भव्य आयोजन को सफल बनाया और 24 घंटे तक सेवा का संकल्प निभाया, वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। आइए, हम भी अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के सेवा कार्यों और सामुदायिक विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। एक सजग नागरिक के रूप में समाज को बेहतर बनाने का संकल्प लें।
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