महुआडांड़ के संत जेवियर कॉलेज में हिंदी दिवस पर आयोजित हुआ भव्य हास्य व्यंग्य कवि सम्मेलन कवियों ने अपनी रचनाओं से दिया सामाजिक संदेश
संत जेवियर कॉलेज में हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन हुआ।

लातेहार के महुआडांड़ स्थित संत जेवियर कॉलेज में 14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस पर भव्य हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को जागरूक किया। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में हिंदी साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाना था।
- संत जेवियर कॉलेज (ऑटोनॉमस), महुआडांड़ में 14 सितंबर 2026 को हिंदी दिवस के अवसर पर भव्य हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
- समारोह का शुभारंभ सुबह 11:00 बजे हुआ, जिसमें कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
- इस कवि सम्मेलन में चंदन प्रजापति, मेजर कुमार संजय, मीत जरमस्तपुरी और आयुषी ने अपनी बेहतरीन काव्य प्रस्तुतियां दीं।
- कवियों ने हास्य, व्यंग्य, देशभक्ति, प्रेम और मानवीय संवेदनाओं से सराबोर रचनाओं के जरिए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- कार्यक्रम के दौरान सभी आमंत्रित कवियों को कॉलेज प्रबंधन द्वारा शॉल और बुके देकर सम्मानित किया गया।
- डॉ. मन्नु कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत कर हिंदी भाषा की महत्ता और साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
झारखंड के लातेहार जिला अंतर्गत महुआडांड़ के प्रतिष्ठित संत जेवियर कॉलेज (ऑटोनॉमस) में हिंदी दिवस के पावन अवसर पर एक गरिमापूर्ण एवं मनोरंजक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 14 सितंबर 2026 को आयोजित इस "हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन" ने न केवल दर्शकों को हंसने-गुदगुदाने पर मजबूर किया, बल्कि समाज की समसामयिक विसंगतियों पर भी गहरा प्रहार किया। इस भव्य साहित्यिक महाकुंभ का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर हिंदी भाषा के प्रति अनुराग पैदा करना और उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करना था। कॉलेज प्रशासन और हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने परिसर में एक सकारात्मक और ऊर्जावान साहित्यिक माहौल का निर्माण किया।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
संत जेवियर कॉलेज महुआडांड़ के विशाल सभागार में आयोजित इस भव्य कवि सम्मेलन का विधिवत शुभारंभ प्रातः 11:00 बजे हुआ। कार्यक्रम के दौरान मंच पर और दर्शक दीर्घा में कई गणमान्य विभूतियां उपस्थित रहीं। इस अवसर पर मुख्य रूप से महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश, उप-प्राचार्य डॉ. फादर समीर टोप्पो, ट्रेजरर फादर लियो, सिस्टर चंद्रोदय और डॉ. प्यारी कुजूर सहित अन्य प्राध्यापकगण एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुई, जिसने पूरे माहौल को आध्यात्मिक और साहित्यिक रंग में सराबोर कर दिया।
कवियों की प्रस्तुतियां: हास्य और व्यंग्य का अनूठा संगम
इस कवि सम्मेलन की मुख्य विशेषता देश के विभिन्न हिस्सों से आए विख्यात कवियों की प्रस्तुतियां रहीं। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता एवं कवि के रूप में चंदन प्रजापति, मेजर कुमार संजय, मीत जरमस्तपुरी और आयुषी ने मंच संभाला। इन कवियों ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं से सभागार में उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कवियों की कविताओं में केवल हास्य और ठहाके ही नहीं थे, बल्कि उनमें गहरा सामाजिक सरोकार, राष्ट्रभक्ति, प्रेम, श्रृंगार और मानवीय संवेदनाएं भी समाहित थीं। कवियों ने जहां एक ओर अपनी गुदगुदाती कविताओं से दर्शकों को हंसने पर मजबूर किया, वहीं दूसरी ओर वर्तमान राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक विसंगतियों पर तीखे व्यंग्य बाण भी छोड़े। उनकी प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि हास्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को सुधारने का एक सशक्त माध्यम है।
स्वागत भाषण और हिंदी की महत्ता पर चर्चा
कार्यक्रम के आरंभिक चरण में हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ. मन्नु कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में सभी आमंत्रित अतिथियों, कवियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। डॉ. शर्मा ने हिंदी भाषा के ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. मन्नु कुमार शर्मा ने स्वागत भाषण के दौरान कहा:
> "हिंदी केवल हमारी मातृभाषा या राजभाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय एकता का सबसे मजबूत सूत्र है। आज के इस आयोजन का उद्देश्य हमारे विद्यार्थियों को इस समृद्ध साहित्यिक विरासत से जोड़ना और उनमें रचनात्मक सोच का विकास करना है।"
अतिथियों का सम्मान और कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
सफल प्रस्तुतियों के बाद, कॉलेज प्रबंधन की ओर से आमंत्रित कवियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश, उप-प्राचार्य डॉ. फादर समीर टोप्पो और ट्रेजरर फादर लियो ने संयुक्त रूप से सभी आमंत्रित कवियों को मंच पर शॉल और बुके प्रदान कर सम्मानित किया। अतिथियों के इस सम्मान ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. फादर एम. के. जोश ने अपने संबोधन में कवियों की सराहना करते हुए कहा:
> "साहित्य समाज का दर्पण होता है। आज हमारे परिसर में जिस तरह से हास्य और व्यंग्य के माध्यम से गंभीर सामाजिक संदेश दिए गए हैं, वह वास्तव में सराहनीय है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के मानसिक और बौद्धिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।"
विद्यार्थियों में दिखा अभूतपूर्व उत्साह
इस पूरे कवि सम्मेलन के दौरान संत जेवियर कॉलेज के विद्यार्थियों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। सभागार पूरी तरह से खचाखच भरा हुआ था और कवियों की हर एक तीखी टिप्पणी और मजाकिया लहजे पर तालियों और ठहाकों की गूंज सुनाई दे रही थी। विद्यार्थियों ने न केवल कविताओं का आनंद लिया, बल्कि कवियों द्वारा दिए गए संदेशों को भी आत्मसात किया। इस आयोजन ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि गंभीर से गंभीर बात को भी सरल और प्रभावशाली ढंग से कविता के माध्यम से समाज के सामने रखा जा सकता है।
सत्य संदेश समाचार: [साहित्यिक आयोजन और युवा पीढ़ी का जुड़ाव]
संत जेवियर कॉलेज महुआडांड़ का यह आयोजन यह दर्शाता है कि आधुनिकता के दौर में भी हमारी युवा पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने के लिए उत्सुक है। शिक्षण संस्थानों में ऐसे साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के नैतिक और सामाजिक चरित्र का निर्माण करते हैं। आज जब सोशल मीडिया के दौर में शुद्ध भाषा और गंभीर साहित्य का ह्रास हो रहा है, तब ऐसे कवि सम्मेलन हिंदी के संवर्धन में मील का पत्थर साबित होते हैं। प्रशासन और शैक्षणिक संस्थाओं को ऐसे आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
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भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र की संस्कृति और सभ्यता की संवाहक होती है। हिंदी दिवस के इस पावन अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करेंगे और दैनिक जीवन में इसका अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे। जब हम अपनी भाषा पर गर्व करना सीखेंगे, तभी हमारा देश वैश्विक पटल पर अपनी वास्तविक पहचान स्थापित कर पाएगा। आइए, अपनी समृद्ध साहित्यिक विरासत को सहेजने और इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
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