भारत को वैश्विक उत्पादन और नवाचार का केंद्र बनाने पर जोर डॉ. पीके मिश्रा
डॉ. पीके मिश्रा ने भारत को उत्पादन और नवाचार का वैश्विक केंद्र बनाने पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने मुंबई में 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित किया। उन्होंने भारत को केवल बड़े बाजार के बजाय वैश्विक उत्पादन और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने घरेलू विनिर्माण, कौशल विकास, डिजिटल वित्त और बौद्धिक संपदा को मजबूत करने पर जोर दिया।
- डॉ. पीके मिश्रा ने भारत को वैश्विक उत्पादन और नवाचार का केंद्र बनाने पर जोर दिया।
- मुंबई में 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
- पूंजीगत व्यय बढ़ने और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख किया।
- छोटे उद्यमों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों तक ऋण पहुंचाने पर जोर दिया।
- “मेक इन इंडिया से डिजाइन इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया और लीड फ्रॉम इंडिया” की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
मुंबई में आयोजित 13वें एसबीआई बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव 2026 में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पीके मिश्रा ने भारत की आर्थिक विकास यात्रा और भविष्य की प्राथमिकताओं पर बात रखी। कॉन्क्लेव का विषय “उभरती अर्थव्यवस्था से अग्रणी अर्थव्यवस्था की ओर : वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका” था।
आर्थिक विकास के साथ संस्थागत मजबूती पर जोर
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत का अग्रणी अर्थव्यवस्था बनने का सफर केवल आर्थिक आकार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थागत विकास की भी यात्रा है।
उन्होंने पिछले दशक में व्यापक आर्थिक स्थिरता, राजकोषीय समेकन, बैंकिंग क्षेत्र की मजबूती, जीएसटी, दिवाला एवं दिवालियापन संहिता, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में हुई प्रगति का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि पूंजीगत व्यय वर्ष 2015-16 में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
डिजिटल व्यवस्था से वित्तीय पहुंच बढ़ाने पर जोर
डॉ. मिश्रा ने डिजिटल व्यवस्था के विस्तार को भी आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने जनधन-आधार-मोबाइल, डीबीटी, यूपीआई, अकाउंट एग्रीगेटर और डिजिटल ऋण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि इन माध्यमों ने वित्तीय पहुंच को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय व्यवस्था को अब विकास को केवल समायोजित करने के बजाय उसे सक्षम बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
छोटे उद्यमों तक ऋण पहुंचाने की जरूरत
डॉ. मिश्रा ने घरेलू विनिर्माण, कौशल विकास, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने पर जोर दिया।
उन्होंने “कोलेटरल से कैश फ्लो” की ओर बढ़ने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार डिजिटल सूचनाओं के आधार पर छोटे उद्यमों और पहली पीढ़ी के उद्यमियों की ऋण क्षमता का बेहतर आकलन किया जा सकता है।
इससे ऐसे कारोबारों के लिए वित्तीय संसाधनों तक पहुंच को आसान बनाने में मदद मिल सकती है, जिन्हें पारंपरिक व्यवस्था में ऋण हासिल करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मेक इन इंडिया से लीड फ्रॉम इंडिया तक
डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक यात्रा अब “मेक इन इंडिया से डिजाइन इन इंडिया, इनोवेट इन इंडिया और लीड फ्रॉम इंडिया” की दिशा में आगे बढ़नी चाहिए।
उन्होंने घरेलू मूल्य संवर्धन, मजबूत कंपोनेंट इकोसिस्टम, डिजाइन क्षमता, बौद्धिक संपदा और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय ब्रांडों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
उनके अनुसार भारत को केवल एक बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन और नवाचार के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत है। इसके लिए घरेलू विनिर्माण क्षमता के साथ कौशल, डिजाइन, नवाचार और वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण होगा।
सत्य संदेश समाचार: उत्पादन से नवाचार तक भारत की आर्थिक प्राथमिकताएं
मुंबई में आयोजित कॉन्क्लेव में डॉ. पीके मिश्रा के संबोधन में भारत की आर्थिक क्षमता को उत्पादन, वित्त, कौशल और नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया गया। छोटे उद्यमों तक ऋण पहुंच, डिजिटल वित्तीय व्यवस्था और घरेलू मूल्य संवर्धन जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहे।
भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए विनिर्माण के साथ डिजाइन, तकनीक, बौद्धिक संपदा और भारतीय ब्रांडों की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई गई है। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में नीतिगत और संस्थागत प्रयास किस तरह आगे बढ़ते हैं, यह महत्वपूर्ण रहेगा।
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भारत की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में उद्योग, कौशल और नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण है।
छोटे उद्यमों और नए कारोबारों तक वित्तीय संसाधनों की पहुंच भी विकास का अहम हिस्सा है।
स्थानीय उत्पादन के साथ भारतीय डिजाइन, तकनीक और ब्रांड को वैश्विक स्तर तक पहुंचाना एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है।
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