झामुमो का केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल: महुआडांड़ में खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में जोरदार धरना प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र की नीतियों के खिलाफ खोला मोर्चा और सौंपा ज्ञापन।

लातेहार के महुआडांड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने केंद्र सरकार के खान एवं खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ शनिवार को एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने प्रखंड कार्यालय के समक्ष नारेबाजी करते हुए इस कानून को जनविरोधी बताया। प्रदर्शन के बाद बीडीओ के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर इस विवादित बिल को वापस लेने की मांग की गई।
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की महुआडांड़ प्रखंड इकाई ने खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR बिल) के खिलाफ एकदिवसीय धरना दिया।
- कार्यकर्ताओं ने प्रखंड कार्यालय परिसर में केंद्र सरकार के विरोध में जमकर नारेबाजी की और इसे काला कानून करार दिया।
- प्रदर्शन के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक मांग पत्र सौंपा गया।
- धरना प्रदर्शन में जिला संगठन सचिव परवेज आलम और महिला मोर्चा जिला सचिव इग्नेशिया केरकेट्टा सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।
- स्थानीय लोगों के अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की पुरजोर मांग उठाई गई।
झारखंड के लातेहार जिला अंतर्गत महुआडांड़ प्रखंड में शनिवार को राजनीतिक सरगर्मी तेज रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैनर तले सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR Bill) के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित इस एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन के माध्यम से झामुमो ने केंद्र की नीतियों को जनविरोधी और स्थानीय हितों के खिलाफ बताया। इस विरोध प्रदर्शन में न केवल पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी बल्कि स्थानीय ग्रामीण और भारी संख्या में कार्यकर्ता भी शामिल हुए, जिन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर आक्रोश व्यक्त किया।
केंद्र सरकार के खिलाफ गूंजे नारे: काला कानून वापस लेने की मांग
शनिवार को महुआडांड़ प्रखंड कार्यालय का परिसर झामुमो कार्यकर्ताओं के नारों से गूंज उठा। धरना प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर "केंद्र सरकार की मनमानी नहीं चलेगी", "MMDR बिल वापस लो" और "काला कानून वापस लो" जैसे नारे लिखे हुए थे।
झामुमो नेताओं ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह राज्यों के अधिकारों का हनन कर रही है और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए खनिज कानूनों में बदलाव कर रही है। नेताओं ने कहा:
> "खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े कानूनों में किसी भी प्रकार के संशोधन से पहले स्थानीय लोगों, आदिवासियों और प्रभावित क्षेत्रों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केंद्र सरकार की यह मनमानी झारखंड के जल, जंगल और जमीन पर सीधा हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन: बीडीओ के माध्यम से रखी मांगें
धरना-प्रदर्शन की समाप्ति के बाद झामुमो के एक प्रतिनिधिमंडल ने महुआडांड़ प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) से मुलाकात की। नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन बीडीओ को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई है कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR बिल) को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि यह कानून राज्यों की स्वायत्तता और स्थानीय समुदायों के अधिकारों को कमजोर करता है। झामुमो नेताओं ने बीडीओ से आग्रह किया कि वे इस ज्ञापन को अविलंब महामहिम राष्ट्रपति तक पहुंचाएं ताकि स्थानीय जनता की भावनाओं से देश के सर्वोच्च पद को अवगत कराया जा सके।
स्थानीय हितों और जल-जंगल-जमीन की रक्षा का संकल्प
झामुमो वक्ताओं ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड एक खनिज बहुल राज्य है। यहां के आदिवासियों और मूलवासियों की आजीविका सीधे तौर पर जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार द्वारा बिना राज्यों की सहमति के खनिज कानूनों में बदलाव करने से स्थानीय लोगों के रोजगार और उनके अस्तित्व पर संकट मंडराने लगेगा। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने इस काले कानून को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। पंचायत स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक इस बिल के खिलाफ जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा।
आंदोलन में शामिल प्रमुख चेहरे और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति
इस एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने में झामुमो के तमाम विंग के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे:
- परवेज आलम (जिला संगठन सचिव)
- परवेज आलम (युवा जिला सचिव)
- इग्नेशिया केरकेट्टा (महिला मोर्चा जिला सचिव)
- प्रवीण कुजूर (छात्र मोर्चा जिला उपाध्यक्ष)
- नवीन तिर्की (प्रखंड अध्यक्ष)
- यहिया अंसारी (प्रखंड सचिव)
इसके अलावा आंदोलन में जावेद शौकत, जगरनाथ नायक, अतहर अंसारी, संजय टोप्पो, रुडोल्फ खलखो, अनुज उरांव, सेबेस्टियन कुजूर, सैफ अली, अली असगर, निली गुलोरिया लकड़ा, उर्मिला लकड़ा, मंजू खेस, अनीता किस्पोट्टा, निभा कुजूर, ललिता गिद्ध, प्रकाश लकड़ा और जीवनलाल सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित थे।
सत्य संदेश समाचार: स्थानीय अधिकारों पर चोट और संघीय ढांचे का सम्मान
यह आंदोलन केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह खनिज संपदा से भरपूर झारखंड के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है। केंद्र सरकार को कोई भी संशोधन करने से पहले राज्यों की सहमति और स्थानीय ग्राम सभाओं के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। जब तक स्थानीय आदिवासियों और विस्थापितों के पुनर्वास और रोजगार की ठोस गारंटी नहीं होगी, तब तक ऐसे संशोधनों का विरोध जायज है। प्रशासन और सरकार को जनभावनाओं का आदर करना होगा।
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हमारे देश के प्राकृतिक संसाधन हमारी असली धरोहर हैं। जब भी इन संसाधनों और स्थानीय लोगों के अधिकारों पर कोई आंच आए, तो लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाना हर नागरिक का कर्तव्य है। महुआडांड़ का यह विरोध प्रदर्शन हमें याद दिलाता है कि जनहित के मुद्दों पर एकजुटता कितनी आवश्यक है। आइए, हम सब मिलकर अपने अधिकारों के प्रति सजग बनें और लोकतंत्र को मजबूत करें।
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