संतान की सुख समृद्धि और दीर्घायु के लिए जलडेगा में महिलाओं ने रखा जितिया व्रत
निर्जला व्रत रखकर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और संतान के सुखी जीवन की कामना की।

जलडेगा प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में शनिवार को जितिया पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर भगवान जीतवहान की पूजा-अर्चना की और कथा सुनी। व्रती महिलाओं ने अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना की।
- जलडेगा प्रखंड के विभिन्न गांवों में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ जितिया पर्व मनाया गया।
- व्रती महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
- महिलाओं ने भगवान जीतवहान की कथा सुनकर संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना की।
- ओड़गा, कोनमेरला, पतिअंबा सहित विभिन्न पंचायतों में पर्व को लेकर उत्साह रहा।
- बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बनी रही।
जलडेगा प्रखंड मुख्यालय सहित विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों और गांवों में शनिवार को जितिया पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। संतान की सुख-समृद्धि, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना को लेकर बड़ी संख्या में महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही गांवों और पूजा स्थलों पर धार्मिक माहौल बना रहा।
स्नान और साफ-सफाई के बाद शुरू हुई पूजा की तैयारी
जितिया पर्व को लेकर व्रती महिलाओं ने सुबह स्नान कर पूजा की तैयारी शुरू की। घरों और पूजा स्थलों की साफ-सफाई की गई। इसके बाद महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा-अर्चना की।
पूजा के दौरान महिलाओं ने भगवान जीतवहान की कथा सुनी और अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखी जीवन की कामना की। कई स्थानों पर महिलाएं समूह में एकत्र होकर सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती नजर आईं।
विभिन्न पंचायतों में दिखा उत्साह
प्रखंड मुख्यालय के अलावा ओड़गा, कोनमेरला, पतिअंबा सहित विभिन्न पंचायतों के गांवों में भी जितिया व्रत को लेकर उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने सामूहिक रूप से जितिया व्रत की कथा सुनी और पर्व की धार्मिक महत्ता पर चर्चा की।
पर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों में बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों में भी उत्साह देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में दिनभर श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा।
पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर बाजारों में चहल-पहल
जितिया पर्व को लेकर बाजारों में भी विशेष चहल-पहल रही। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की खरीदारी को लेकर लोगों की आवाजाही बनी रही। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग बाजार पहुंचे और पर्व से संबंधित सामग्री की खरीदारी की।
पर्व के कारण स्थानीय बाजारों में भी सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक गतिविधियां देखने को मिलीं।
ममता और आस्था का प्रतीक है जितिया
जितिया पर्व माताओं के त्याग, ममता और आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। संतान के लिए रखा जाने वाला यह कठिन व्रत महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ करती हैं।
व्रती महिलाओं ने कहा कि संतान की खुशहाली और लंबी उम्र के लिए व्रत रखना उनके लिए केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मां के प्रेम और समर्पण का भी प्रतीक है।
सत्य संदेश समाचार: ममता, आस्था और परंपरा से जुड़ा जितिया पर्व
जलडेगा प्रखंड में जितिया पर्व के दौरान महिलाओं की सामूहिक भागीदारी और श्रद्धा देखने को मिली। निर्जला व्रत, पूजा-अर्चना और कथा श्रवण के माध्यम से महिलाओं ने संतान के सुखी एवं स्वस्थ जीवन की कामना की। पर्व ने ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक आस्था और सामुदायिक सहभागिता का वातावरण भी बनाए रखा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जितिया पर्व मातृत्व की ममता, त्याग और संकल्प से जुड़ी परंपरा है।
ऐसे पर्व ग्रामीण समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।
नई पीढ़ी को भी अपनी लोक परंपराओं और संस्कृति से जोड़ना जरूरी है।
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