प्रकृति संस्कृति और परंपरा के संगम का साक्षी बना विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर लचरगढ 182 व्रतियों ने की करम राजा की आराधना
पारंपरिक गीतों और नृत्य के बीच श्रद्धा से करम राजा की पूजा और विसर्जन हुआ।

कोलेबिरा के लचरगढ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में करम महोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित हुआ। 182 व्रतियों ने वैदिक विधि-विधान से करम देव की पूजा की। लोकगीत और मांदर की थाप से विद्यालय परिसर गूंजता रहा। अगले दिन शोभायात्रा के बाद देवनदी तट पर करम डालियों का विसर्जन किया गया।
- 182 व्रतियों ने नियम-निष्ठा के साथ करम राजा की आराधना की।
- दीप प्रज्वलन के साथ करम महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया गया।
- संदीप नाग, गोपाल बरला और भीम प्रसाद की लोक प्रस्तुति ने कार्यक्रम में रंग भर दिया।
- पारंपरिक वेशभूषा में निकली शोभायात्रा देवनदी तट पहुंची।
- विधि-विधान के साथ करम डालियों का विसर्जन कर करम राजा को विदाई दी गई।
श्रद्धा और वैदिक विधि से शुरू हुआ करम महोत्सव
वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय लचरगढ के प्रांगण में प्रकृति के महापर्व करम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समी विभाग प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विशिष्ट अतिथि सत्यव्रत ठाकुर, पार्वती शर्मा महिला इंटर कॉलेज सिमडेगा की प्राचार्य, लोक गायक संदीप नाग, लहरु सिंह, गोपाल बरला, प्रसिद्ध मांदर वादक भीम प्रसाद, विद्यालय सचिव राजेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष आनंद कोठारी, अजय साव और आशुतोष जी, शिक्षक जवाहर नवोदय विद्यालय कोलेबिरा, ने संयुक्त रूप से माता सरस्वती, भारत माता और ओम के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
इसके बाद आचार्य संजय पाठक ने वैदिक विधि-विधान से पूजन कराया। इसमें 182 व्रतियों ने नियम-निष्ठा के साथ करम देव की आराधना की।
लोकगीत और मांदर की थाप पर झूमता रहा विद्यालय
पूजन के बाद लोक कलाकार गोपाल बरला और मांदर वादक भीम प्रसाद की प्रस्तुति ने माहौल को उत्सवमय बना दिया। ढोल-मांदर की थाप और पारंपरिक करम गीतों की गूंज से विद्यालय परिसर देर रात तक गुंजायमान रहा। विद्यार्थी, अभिभावक और ग्रामीण एक साथ लोक-संस्कृति के इस आयोजन में शामिल हुए।
शोभायात्रा के बाद देवनदी तट पर हुआ विसर्जन
दूसरे दिन सुबह करम राजा की पवित्र करम डालियों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे व्रतियों का समूह ढोल-ढाक की थाप पर नृत्य करते हुए देवनदी तट पहुंचा। वहां पूरे विधि-विधान के साथ करम राजा का विसर्जन किया गया और उन्हें भावभीनी विदाई दी गई।
> समी जी ने कहा, "करम पर्व केवल एक त्योहार नहीं है। यह हमारी जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के संरक्षण और भाईचारे का जीवंत दर्शन है।"
सत्यव्रत ठाकुर ने कहा कि विवेकानंद विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
संदीप नाग ने कहा कि लोकगीत मिट्टी की खुशबू हैं और ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़कर रखते हैं।
गणमान्य लोगों और अभिभावकों की रही सहभागिता
कार्यक्रम में प्रबंधन समिति के सचिव राजेश अग्रवाल, सह-सचिव रिक्की अग्रवाल, कोषाध्यक्ष आनंद कोठारी, अभिभावक सह-प्रतिनिधि अजय जी, सदस्य संजय ठाकुर सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, बड़ी संख्या में अभिभावक और विद्यालय के भैया-बहन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रमोद पाणिग्राही ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राजेंद्र प्रसाद साहू ने किया। आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त कार्यकर्ता बंधु-भगिनियों का सराहनीय योगदान रहा।
सत्य संदेश समाचार: प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण का संदेश देता करम महोत्सव
लचरगढ में आयोजित यह करम महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति, लोक-संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का संदेश देता है। विद्यालय में विद्यार्थियों और ग्रामीणों की भागीदारी ने पारंपरिक संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल को दर्शाया। ऐसे आयोजनों से स्थानीय परंपराओं और लोककला को संरक्षण मिलता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
करम जैसे पर्व हमारी लोक-संस्कृति और प्रकृति से जुड़ाव की पहचान हैं।
नई पीढ़ी तक इन परंपराओं को पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
आप भी अपनी संस्कृति और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण में भागीदार बनें।
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