हाथियों के झुंड से दहशत में ग्रामीणों ने मांगी मदद भरत प्रसाद ने उपलब्ध कराई हाथी भगाने की सामग्री
कोलयाडामर जंगल में दो दर्जन हाथियों के झुंड से ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

सिमडेगा के बड़ाबड़पानी पंचायत अंतर्गत कोलयाडामर गांव के जंगल में पिछले तीन-चार दिनों से करीब दो दर्जन हाथियों का झुंड डेरा डाले हुए है। हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीण रातभर रतजगा कर रहे हैं। ग्रामीणों की मांग पर भरत प्रसाद के सहयोग से टॉर्च, पटाखे, जूट के बोरे और मोबिल उपलब्ध कराया गया।
- करीब दो दर्जन हाथियों के झुंड ने कोलयाडामर जंगल में डेरा डाल रखा है।
- हाथियों के गांव के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत और रतजगे की स्थिति बनी हुई है।
- ग्रामीणों की मांग पर भरत प्रसाद ने हाथी भगाने की सामग्री उपलब्ध कराई।
- आशा मैक्सिमा लकड़ा की मौजूदगी में टॉर्च, पटाखे, जूट के बोरे और मोबिल वितरित किए गए।
- ग्रामीणों से हाथियों को भड़काने के बजाय सुरक्षा और सुरक्षित तरीके से दूर रखने की अपील की गई।
जंगल में डेरा डाले हुए हैं हाथियों का झुंड
बड़ाबड़पानी पंचायत के कोलयाडामर गांव स्थित जंगल में पिछले तीन-चार दिनों से हाथियों का झुंड मौजूद है। ग्रामीणों के अनुसार झुंड में करीब दो दर्जन हाथी हैं, जिनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हाथियों के गांव के आसपास पहुंचने के कारण ग्रामीणों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
मंगलवार की देर रात ग्रामीणों ने किसी तरह हाथियों को गांव से दूर खदेड़ा, लेकिन बुधवार सुबह हाथियों का झुंड दोबारा गांव के जंगल में पहुंच गया।
मशाल से भी नहीं भाग रहे हाथी
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों को भगाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली मशाल का भी झुंड पर खास असर नहीं हो रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक हाथी मशाल के पास तक पहुंच जाते हैं और उससे खेलने लगते हैं। ऐसे में हाथियों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर रखना ग्रामीणों के लिए चुनौती बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हाथियों के उत्पात के बावजूद अब तक पर्याप्त हाथी भगाने की सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई थी। इसके बाद ग्रामीण समाजसेवी सह सब्जी व्यापारी भरत प्रसाद के पास पहुंचे और मदद की मांग की।
ग्रामीणों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा सामग्री
ग्रामीणों की मांग पर आशा मैक्सिमा लकड़ा ने समाजसेवी भरत प्रसाद के सहयोग से हाथी प्रभावित ग्रामीणों के बीच टॉर्च, बम-पटाखे, जूट के बोरे और मोबिल का वितरण किया।
इस दौरान ग्रामीणों को हाथियों के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की सलाह दी गई। उपलब्ध सामग्री का इस्तेमाल हाथियों को भड़काने के बजाय अपनी सुरक्षा और सुरक्षित तरीके से हाथियों को दूर रखने के लिए करने की अपील की गई।
> आशा मैक्सिमा लकड़ा ने कहा कि पटाखों का उपयोग हाथियों को भड़काने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और सुरक्षित तरीके से उन्हें दूर रखने के लिए किया जाना चाहिए।
आपसी समन्वय से हाथियों को दूर रखने की अपील
समाजसेवी भरत प्रसाद ने ग्रामीणों को हाथियों को खदेड़ने के लिए पारंपरिक और सुरक्षित तरीके अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हाथियों को भड़काने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। आसपास के गांवों के ग्रामीण आपसी समन्वय बनाकर हाथियों को सुरक्षित दिशा में ले जाने का प्रयास करें।
ग्रामीणों ने वन विभाग से भी हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने में सहयोग करने की मांग की है।
सत्य संदेश समाचार: हाथी और मानव संघर्ष में सतर्कता और समन्वय जरूरी
कोलयाडामर में हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसी स्थिति में हाथियों को भड़काने या उनके बेहद करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है। ग्रामीणों ने वन विभाग से प्रभावी सहयोग की मांग की है, ताकि हाथियों और ग्रामीणों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हाथियों की मौजूदगी में घबराने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है।
ग्रामीण आपसी समन्वय बनाकर सुरक्षित तरीके अपनाएं।
वन विभाग और ग्रामीण मिलकर मानव-हाथी संघर्ष को कम करने का प्रयास करें।
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