जलडेगा चीक टोली में करम पर्व की धूम मांदर की थाप पर रातभर थिरके ग्रामीण
चीक टोली में पारंपरिक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच ग्रामीणों ने उत्सव मनाया।

जलडेगा प्रखंड के चीक टोली समेत आसपास के गांवों में करम पर्व पारंपरिक रीति-रिवाज और उत्साह के साथ मनाया गया। कुंवारी युवतियों ने जावा जगाकर करम राजा की पूजा की और भाइयों की सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा के बाद अखड़ा में मांदर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीण देर रात तक थिरकते रहे।
- चीक टोली में करम पर्व को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण जुटे।
- युवतियों ने जावा जगाकर करम राजा की विधिवत पूजा-अर्चना की।
- बहनों ने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जला उपवास रखा।
- पूजा के बाद अखड़ा में मांदर, ढोल-नगाड़ों और करम गीतों की धूम रही।
- आयोजन में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष ग्रामीण और कर्मा समिति के सदस्य शामिल हुए।
जलडेगा। प्रखंड क्षेत्र समेत जलडेगा चीक टोली में प्रकृति, कृषि और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक करम पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। पर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्साह और सामाजिक सौहार्द का माहौल देखने को मिला।
जावा जगाने के साथ शुरू हुई करम पूजा
करम पर्व को लेकर चीक टोली और आसपास के गांवों के पारंपरिक अखड़े आकर्षक ढंग से सजाए गए। कुंवारी युवतियों ने विधि-विधान से जावा जगाया। इसके बाद मांदर की गूंज और करम गीतों से वातावरण भक्तिमय और संगीतमय हो गया।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करम पर्व प्रकृति की उपासना, अच्छी फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ा है। इस अवसर पर बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु, सुख-शांति और मंगलमय जीवन के लिए निर्जला उपवास रखती हैं।
करम राजा की पूजा कर मांगी सुख-समृद्धि
युवतियों ने टोकरियों में बालू भरकर उगाए गए अंकुरित अनाज जावा की पूजा-अर्चना की। इसके माध्यम से क्षेत्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की गई।
करम पर्व के आयोजन में प्रकृति और लोकसंस्कृति के संरक्षण का संदेश भी देखने को मिला। पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाकर ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा।
अखड़ा में रातभर गूंजे करम गीत
शाम ढलने के बाद पाहन और पुरोहितों की मौजूदगी में विधि-विधान से अखड़ा में करम डाली की स्थापना की गई। पूजा संपन्न होने के बाद मांदर और ढोल-नगाड़ों की थाप पर ग्रामीणों ने पारंपरिक करम गीतों पर जमकर नृत्य किया।
देर रात तक अखड़ा में सांस्कृतिक उत्साह बना रहा और महिला-पुरुष ग्रामीण पारंपरिक गीतों और नृत्य में शामिल होते रहे।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
जलडेगा चीक टोली में आयोजित कर्मा पूजा समारोह में कर्मा समिति के सदस्यों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। मौके पर विनोद बड़ाईक, अशोक बड़ाईक, चंदन मिश्रा, बीरेन बड़ाईक, विशाल बड़ाईक, सुनील महतो, निरल हेमरोम, सुरजा बड़ाईक, कलिन्द्र बड़ाईक, पहलाद बड़ाईक, संतु बड़ाईक, नेलशन तोपनो, अर्जुन बड़ाईक, दीपक चीक बड़ाईक, मन्तू बड़ाईक, शम्भू बड़ाईक, प्रदीप सिंह, अनिल बड़ाईक, मंगरा बड़ाईक, डेविड तोपनो, हीरो तोपनो, प्रभा देवी, सुलेखा देवी, सुगंति देवी, नीलम देवी, दूरपति, अनुष्का, जयंती देवी, लच्छू बड़ाईक, कन्हाई बड़ाईक, अनामिका कुमारी, आँचल कुमारी, पूजा कुमारी, सती कुमारी, नमिता कुमारी तथा मंजू कुमारी समेत बड़ी संख्या में स्थानीय महिला-पुरुष ग्रामीण उपस्थित रहे।
सत्य संदेश समाचार: लोकपरंपरा और सामाजिक एकता का पर्व
जलडेगा चीक टोली में करम पर्व का आयोजन ग्रामीण जीवन में प्रकृति, कृषि और पारंपरिक संस्कृति के महत्व को सामने लाता है। पूजा-अर्चना के साथ अखड़ा में सामूहिक नृत्य और गीत ने सामाजिक सहभागिता और आपसी भाईचारे का वातावरण बनाया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय लोकपरंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर भी मिलता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
करम पर्व हमारी लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं की पहचान है।
ऐसे आयोजनों में युवाओं की भागीदारी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती है।
आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता के संदेश को मजबूत बनाएं।
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