सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में टीएलएम मेले का आयोजन, शिक्षण सामग्री से आसान हुई पढ़ाई
शिक्षकों की रचनात्मकता और बच्चों की जिज्ञासा ने टीएलएम मेले को बनाया खास।

सिमडेगा के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में शिक्षण को सरल, रोचक और प्रभावशाली बनाने के उद्देश्य से टीएलएम मेले का आयोजन किया गया। इसमें आचार्य-आचार्याओं ने विभिन्न शिक्षण सामग्रियों और मॉडलों का प्रदर्शन किया। अतिथियों ने सामग्रियों का अवलोकन किया, जबकि विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ उनके काम करने के तरीके को समझा।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में टीएलएम मेले का आयोजन हुआ।
- शिक्षकों ने रचनात्मक सोच से तैयार की आकर्षक और उपयोगी शिक्षण सामग्री।
- विद्या बड़ाईक, सूर्यनारायण साहू, रवि वर्मा और अनिरुद्ध सिंह रहे उपस्थित।
- प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने अतिथियों का परिचय कराया और निरीक्षण के दौरान मार्गदर्शन दिया।
- बच्चों ने मॉडलों को देखकर सवाल पूछे और व्यावहारिक तरीके से सीखने का अवसर पाया।
सिमडेगा। वनवासी कल्याण केंद्र, झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में शिक्षण-अधिगम सामग्री यानी टीएलएम (टीचिंग लर्निंग मटेरियल) मेले का आयोजन किया गया। मेले का उद्देश्य किताबी ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ना और कठिन विषयों को सरल तरीके से समझाने की शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देना था।
शिक्षकों की रचनात्मकता ने बढ़ाई मेले की रौनक
मेले में विद्यालय के आचार्य-आचार्याओं ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा, कलात्मक कौशल और शैक्षणिक दक्षता का परिचय देते हुए विभिन्न शिक्षण सामग्रियों का निर्माण कर प्रदर्शन किया। रंग-बिरंगी और ज्ञानवर्धक सामग्रियों से सजे विद्यालय परिसर में शिक्षा, नवाचार और रचनात्मकता का संगम देखने को मिला।
इन सामग्रियों के माध्यम से यह दर्शाया गया कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर पढ़ाई को अधिक सरल, सहज और रुचिकर बनाया जा सकता है। साथ ही, विद्यार्थियों को विषयों को उदाहरणों और मॉडलों के जरिए समझने का अवसर मिलता है।
अतिथियों ने शिक्षण सामग्रियों का किया निरीक्षण
कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष विद्या बड़ाईक, वनवासी कल्याण केंद्र की नगर समिति के अध्यक्ष सूर्यनारायण साहू, सचिव रवि वर्मा तथा चिकित्सा प्रमुख अनिरुद्ध सिंह उपस्थित रहे। विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने अतिथियों का परिचय कराया और टीएलएम मेले के निरीक्षण के दौरान उनका मार्गदर्शन किया।
अतिथियों ने शिक्षकों द्वारा तैयार की गई शिक्षण सामग्रियों का अवलोकन किया। उन्होंने शिक्षकों की रचनात्मकता, परिश्रम और शिक्षण के प्रति समर्पण को देखा। प्रत्येक सामग्री में नए विचारों और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों की झलक दिखाई दी।
बच्चों की जिज्ञासा ने आयोजन को बनाया सार्थक
टीएलएम मेले में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता विशेष आकर्षण रही। भैया-बहनों ने विभिन्न मॉडलों और शिक्षण सामग्रियों को उत्सुकता के साथ देखा। उन्होंने उनके काम करने के तरीकों को समझने का प्रयास किया और उनसे जुड़े कई सवाल पूछे।
इस गतिविधि से बच्चों को देखकर, समझकर, प्रश्न पूछकर और व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से सीखने का अवसर मिला। उनकी जिज्ञासा और सीखने की ललक ने मेले के उद्देश्य को सार्थक बनाया।
नवाचार से आनंददायक बनती है शिक्षा
विद्यालय के सभी आचार्य-आचार्याओं ने अपनी प्रतिभा, कौशल और रचनात्मक सोच के माध्यम से आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मेले ने पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों के साथ नवाचार के समन्वय को प्रदर्शित किया।
सत्य संदेश समाचार: रचनात्मक शिक्षण से मजबूत होगी बच्चों की समझ
टीएलएम जैसी गतिविधियां शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसे व्यावहारिक अनुभव से जोड़ती हैं। शिक्षकों की रचनात्मकता और बच्चों की सक्रिय भागीदारी सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बना सकती है। ऐसे आयोजन विद्यालयों में नवाचार को बढ़ावा देने के साथ विद्यार्थियों में जिज्ञासा और तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा तभी प्रभावी बनती है, जब बच्चे विषयों को समझें और उन्हें व्यवहार में देख सकें।
शिक्षक अपनी कल्पनाशीलता से कठिन विषयों को भी रोचक बना सकते हैं।
ऐसे शैक्षणिक आयोजनों को प्रोत्साहित करें और बच्चों में सवाल पूछने की आदत विकसित करें।
इस खबर को साझा करें और बताएं कि आपके विचार में पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए ऐसे आयोजन कितने जरूरी हैं।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






