बोलबा में सीएलएफ स्तरीय आजीविका योजना और उत्पादन क्लस्टर पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न
मालसाड़ा संकुल के प्रशिक्षण में कृषि उत्पादन, पशुपालन और बाजार से जुड़ाव मजबूत करने पर जोर दिया गया।

बोलबा प्रखंड कार्यालय में मालसाड़ा संकुल के तत्वावधान में सीएलएफ आधारित आजीविका योजना और उत्पादन क्लस्टर संवर्धन विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न हुआ। अंतिम दिन कृषि उत्पादन क्लस्टर के विकास, सरकारी योजनाओं के लाभ, पशुपालन और डेटा प्रबंधन पर चर्चा की गई। प्रशिक्षण के बाद चयनित गांवों में क्लस्टर विकसित करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।
- मालसाड़ा संकुल के तत्वावधान में तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
- कृषि उत्पादन क्लस्टर (एपीसी) के विकास और प्रभावी संचालन पर चर्चा हुई।
- कृषि एवं पशुपालन से संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
- किसानों के उत्पादन, फसल क्षेत्रफल और गतिविधियों की नियमित निगरानी पर जोर दिया गया।
- चयनित गांवों में किसानों और उत्पादक समूहों की पहचान कर कार्ययोजना बनाने पर सहमति बनी।
- प्रशिक्षण में प्रदान संस्था के श्याम और गोपी कृष्ण तथा जेएसएलपीएस के कर्मियों ने भाग लिया।
बोलबा। मालसाड़ा संकुल के तत्वावधान में बोलबा प्रखंड कार्यालय में सीएलएफ आधारित आजीविका योजना और उत्पादन क्लस्टर संवर्धन विषय पर आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण के तीसरे एवं अंतिम दिन का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य संकुल स्तर पर आजीविका गतिविधियों को मजबूत करना, कृषि उत्पादन में वृद्धि करना तथा किसानों को सरकारी योजनाओं और बाजार से जोड़ने की दिशा में प्रभावी पहल करना था।
कृषि उत्पादन क्लस्टर के विकास पर चर्चा
प्रशिक्षण के दौरान एग्रीकल्चर प्रोडक्शन क्लस्टर (एपीसी) के विकास और उसके प्रभावी संचालन पर विशेष चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि किसानों को संगठित कर फसल उत्पादन की योजना बनाने, कृषि संसाधनों का सामूहिक प्रबंधन करने और बाजार तक पहुंच मजबूत करने से आजीविका गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सकता है।
कृषि क्षेत्र से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं, उनके उद्देश्यों, पात्रता और संभावित लाभों की जानकारी भी दी गई। साथ ही इस बात पर चर्चा हुई कि संकुल, उत्पादक समूह और किसान इन योजनाओं से जुड़कर कृषि उत्पादन एवं उत्पादकता में सुधार कैसे ला सकते हैं।
पशुपालन को आजीविका योजना से जोड़ने पर जोर
प्रशिक्षण में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से जुड़ी संभावनाओं और गतिविधियों पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों को पशुपालन संबंधी गतिविधियों को संकुल की आजीविका योजना में शामिल करने और स्थानीय जरूरतों के अनुसार उनके विकास की दिशा में कार्य करने पर जोर दिया गया।
डेटा प्रबंधन और नियमित निगरानी की जानकारी
कृषि उत्पादन क्लस्टर से संबंधित आंकड़ों की नियमित ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग के साथ संकुल स्तर पर एमआईएस तथा डेटा प्रबंधन के महत्व को समझाया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि सही और अद्यतन आंकड़ों से किसानों की संख्या, फसलवार क्षेत्रफल, उत्पादन, गतिविधियों की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा की जा सकती है।
इसके माध्यम से जरूरत के अनुसार आवश्यक हस्तक्षेपों की पहचान कर कृषि गतिविधियों को बेहतर बनाया जा सकता है। पशुपालन से संबंधित गतिविधियों और आंकड़ों की नियमित निगरानी पर भी चर्चा हुई, ताकि संकुल स्तर पर आजीविका से जुड़ी सभी गतिविधियों की प्रभावी समीक्षा की जा सके।
चयनित गांवों में क्लस्टर विकसित करने का निर्णय
तीन दिवसीय प्रशिक्षण से प्राप्त जानकारी को व्यवहार में लागू करने के उद्देश्य से मालसाड़ा संकुल के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष, कार्यकारिणी सदस्यों, संकुल नेतृत्व और संबंधित कर्मचारियों ने सामूहिक चर्चा की। चर्चा के बाद बोलबा प्रखंड के चयनित गांवों में कृषि उत्पादन क्लस्टर विकसित करने और उन्हें मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का सामूहिक निर्णय लिया गया।
इसके लिए संबंधित गांवों में उपयुक्त फसल और क्षेत्र का चयन, किसानों एवं उत्पादक समूहों की पहचान, कृषि गतिविधियों की योजना, कृषि इनपुट की व्यवस्था, तकनीकी सहयोग और बाजार से जुड़ाव जैसे विषयों को शामिल करते हुए कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया। साथ ही पशुपालन से संबंधित गतिविधियों को भी स्थानीय आजीविका योजना से जोड़ने की बात कही गई।
विभिन्न स्तरों के प्रतिभागियों ने लिया भाग
प्रशिक्षण में संकुल के अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य, कैडर, संकुल कर्मचारी, ग्राम संगठन के अध्यक्ष, सचिव एवं कोषाध्यक्ष सहित ए.के.एस., ए.पी.एस., एल.एच.बीआरपी., सी.सी. और पी.आर.पी. समेत विभिन्न स्तरों के प्रतिभागियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रशिक्षक के रूप में प्रदान संस्था के श्याम और गोपी कृष्ण उपस्थित रहे। वहीं जेएसएलपीएस के कर्मी चंदन कुमार, चितरंजन साय और अमर साहू भी शामिल हुए।
सत्य संदेश समाचार: स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की पहल
मालसाड़ा संकुल में आयोजित प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य कृषि उत्पादन, पशुपालन और बाजार से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित रूप देना है। प्रशिक्षण में तैयार की गई कार्ययोजना को चयनित गांवों में प्रभावी ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण होगा। किसानों की भागीदारी, तकनीकी सहयोग और नियमित निगरानी से उत्पादन क्लस्टर को मजबूत बनाने में मदद मिल सकती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
कृषि और पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका के महत्वपूर्ण आधार हैं।
किसान समूहों के समन्वय और सरकारी योजनाओं की जानकारी से नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग गांवों की आर्थिक मजबूती में योगदान दे सकता है।
आपके क्षेत्र में कृषि और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कौन-सी पहल जरूरी है?
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