करम डाल विसर्जन में झूम उठा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा
करम गीतों और पारंपरिक नृत्य के बीच श्रद्धा के साथ करम डाल का विसर्जन हुआ।

सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में करम पूजा महोत्सव के समापन पर बुधवार को करम डाल विसर्जन कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक की अगुवाई में विद्यालय परिसर से शोभायात्रा निकाली गई। भैया-बहनों, आचार्य परिवार और श्रद्धालुओं ने करम गीतों पर नृत्य करते हुए सहभागिता की। निर्धारित स्थल पर विधिवत विसर्जन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में बुधवार को करम डाल का विसर्जन किया गया।
- प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक की अगुवाई में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
- करम गीतों पर भैया-बहनों और श्रद्धालुओं ने नृत्य कर उत्साह जताया।
- रास्ते में स्थानीय लोगों ने करम डाल का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।
- विसर्जन के दौरान सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की गई।
सिमडेगा। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आयोजित करम पूजा महोत्सव के बाद बुधवार को करम राजा के विसर्जन का कार्यक्रम श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।
करम गीतों के बीच निकली शोभायात्रा
प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक की अगुवाई में विद्यालय परिसर से करम डाल को लेकर शोभायात्रा निकाली गई। इसमें विद्यालय के भैया-बहनों, आचार्य परिवार और श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
पारंपरिक करम गीतों की धुन पर भैया-बहन झूमते और नृत्य करते हुए आगे बढ़े। गीत-संगीत और पारंपरिक नृत्य से पूरे वातावरण में उत्साह का माहौल बना रहा।
स्थानीय लोगों ने किया करम डाल का स्वागत
शोभायात्रा के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने करम डाल का श्रद्धापूर्वक स्वागत किया। लोगों ने पारंपरिक तरीके से करम राजा की पूजा-अर्चना की और मंगलकामनाओं के साथ पुष्प अर्पित किए।
जगह-जगह हुए स्वागत से शोभायात्रा में श्रद्धा और आत्मीयता का भाव देखने को मिला। करम गीतों की गूंज, पारंपरिक नृत्य और लोगों की सहभागिता ने पूरे मार्ग को झारखंड की लोकसंस्कृति के रंग में रंग दिया।
विधिवत किया गया करम डाल का विसर्जन
शोभायात्रा के बाद निर्धारित स्थल पर करम डाल का विधिवत विसर्जन किया गया। इस दौरान विद्यालय परिवार और श्रद्धालुओं ने करम राजा से सभी के सुख, शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।
कार्यक्रम में भैया-बहनों में अपनी संस्कृति और परंपरा के प्रति उत्साह देखने को मिला। करम महोत्सव के समापन अवसर पर पारंपरिक संस्कृति और प्रकृति के प्रति जुड़ाव का संदेश भी सामने आया।
सत्य संदेश समाचार: परंपरा और संस्कार को आगे बढ़ाता करम महोत्सव
सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में करम पूजा महोत्सव का समापन पारंपरिक तरीके से किया गया। शोभायात्रा और विसर्जन कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ विद्यालय परिवार और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को सामूहिक स्वरूप दिया।
ऐसे आयोजन बच्चों को अपनी लोकसंस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति जुड़ाव समझने का अवसर देते हैं। करम महोत्सव का यह आयोजन सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता का उदाहरण रहा।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
लोकसंस्कृति की पहचान तभी मजबूत रहती है, जब नई पीढ़ी उससे जुड़ती है।
करम गीत, नृत्य और परंपराएं हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
बच्चों की सहभागिता से ऐसी परंपराओं को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
आपको यह आयोजन कैसा लगा, अपनी राय कमेंट में बताएं और खबर को आगे साझा करें।
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