जलडेगा में मां दुर्गा को नम आंखों से विदाई, रावण-कुंभकरण दहन देखने उमड़ा जनसैलाब
मुंशी तालाब में हुआ प्रतिमा विसर्जन, 1968 से चली आ रही रामलीला की परंपरा ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा।

सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड मुख्यालय में मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन और रावण-कुंभकरण के पुतलों के दहन के साथ दुर्गा पूजा उत्सव संपन्न हुआ। कार्यक्रम में जलडेगा सहित आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु पहुंचे। वर्ष 1968 से चली आ रही रामलीला की परंपरा के बीच धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और उत्साह की झलक देखने को मिली।
- मुंशी तालाब में विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
- रावण और कुंभकरण के पुतलों का दहन देखने के लिए हजारों लोग जुटे।
- 1968 से चली आ रही रामलीला ने एक बार फिर जलडेगा की सांस्कृतिक परंपरा को जीवंत किया।
- बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार विसर्जन कार्यक्रम में शामिल हुए और श्रद्धालुओं के साथ उत्सव में भाग लिया।
- नवरात्र से विसर्जन तक जलडेगा थाना पुलिस ने सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका निभाई।
- आयोजन को सफल बनाने में रामलीला और दुर्गा पूजा समिति से जुड़े लोगों सहित ग्रामीणों का योगदान रहा।
जयकारों के बीच मां दुर्गा को दी गई भावभीनी विदाई
जलडेगा। प्रखंड मुख्यालय जलडेगा में दुर्गा पूजा का समापन मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन और रावण-कुंभकरण के पुतलों के दहन के साथ हुआ। इस अवसर पर जलडेगा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मां दुर्गा के दर्शन, पारंपरिक रामलीला और रावण-कुंभकरण दहन को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा। वहीं, मां की विदाई के समय श्रद्धालु भावुक नजर आए।
जलडेगा स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में सुबह से ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। भक्तों ने मां दुर्गा के चरणों में माथा टेककर परिवार और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा को जयकारों के बीच विसर्जन के लिए मुंशी तालाब ले जाया गया।
विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मां दुर्गा के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष मां के पुनः आगमन की कामना करते हुए उन्हें नम आंखों से विदाई दी।
रावण-कुंभकरण दहन ने दिया बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित रावण और कुंभकरण के पुतलों का दहन कार्यक्रम आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। पुतलों के दहन को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस दौरान रामलीला के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और धर्म की महत्ता को प्रस्तुत किया गया।
रावण-कुंभकरण के पुतलों का दहन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक बना। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से आयोजन स्थल पर उत्सव जैसा माहौल रहा।
1968 से जीवंत है जलडेगा की रामलीला की परंपरा
जलडेगा में दुर्गा पूजा के दौरान रामलीला का आयोजन वर्षों से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है। वर्ष 1968 से चली आ रही इस परंपरा में स्थानीय कलाकार रामायण के विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हैं। ग्रामीणों के सहयोग और कलाकारों की भागीदारी से यह परंपरा आज भी जारी है।
रामलीला देखने के लिए हर वर्ष आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग जलडेगा पहुंचते हैं। भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देने वाली यह परंपरा जलडेगा की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से परिचित होने का अवसर भी मिलता है।
विसर्जन में शामिल हुए बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार
मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ उत्सव में भाग लिया और उनके साथ झूमते नजर आए। उनकी उपस्थिति से कार्यक्रम का उत्साह और बढ़ गया।
विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं में भक्ति, उल्लास और मां की विदाई का भावुक माहौल देखने को मिला। लोगों ने माता रानी से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।
नवरात्र से विसर्जन तक जलडेगा थाना की रही भूमिका
दुर्गा पूजा के दौरान नवरात्र की शुरुआत से लेकर प्रतिमा विसर्जन तक जलडेगा थाना पुलिस सक्रिय रही। पूजा-अर्चना, रामलीला, रावण-कुंभकरण दहन और विसर्जन जुलूस के दौरान शांति एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली।
श्रद्धालुओं की भीड़ और विभिन्न कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा प्रबंध महत्वपूर्ण रहे। विसर्जन के दौरान भी पुलिस की सक्रियता से आयोजन को व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में मदद मिली। पूरे उत्सव के दौरान शांति, सुरक्षा और आपसी सौहार्द बनाए रखने पर ध्यान दिया गया।
आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
दुर्गा पूजा और रामलीला के आयोजन को सफल बनाने में अरुण मिश्रा, चंदन मिश्रा, पन्नालाल साहू, सुभाष साहू, बसंत साहू, विश्वनाथ साहू, राम अवतार अग्रवाल, महेश साहू, पाला साहू, ढोलो सिंह, संतोष सिंह, कृष्णा साहू और महाप्रसाद सिंह सहित अन्य लोगों की प्रमुख भूमिका रही।
समिति से जुड़े लोगों और ग्रामीणों के सहयोग से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न हुए। रामलीला, रावण-कुंभकरण दहन और प्रतिमा विसर्जन ने जलडेगा में नवरात्र उत्सव को यादगार बनाया।
मुंशी तालाब में विसर्जन के साथ संपन्न हुआ उत्सव
मुंशी तालाब में मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन के साथ ही जलडेगा में दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हुआ। नवरात्र से लेकर विसर्जन तक प्रखंड मुख्यालय में भक्ति, उत्साह और उल्लास का माहौल बना रहा। रामलीला और रावण-कुंभकरण दहन ने क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा की झलक प्रस्तुत की।
मां की विदाई के समय श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना की। अगले वर्ष मां दुर्गा के फिर आगमन की उम्मीद के साथ लोगों ने माता रानी को भावभीनी विदाई दी।
सत्य संदेश समाचार: आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम बना जलडेगा का दुर्गा पूजा उत्सव
जलडेगा में मां दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन, रावण-कुंभकरण दहन और पारंपरिक रामलीला के साथ दुर्गा पूजा उत्सव संपन्न हुआ। वर्ष 1968 से चली आ रही रामलीला ने धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की। हजारों श्रद्धालुओं की भागीदारी के बीच मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी गई। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
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