विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में अभिभावक बैठक, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिया गया जोर
सुबह जल्दी उठने, नियमित स्वाध्याय और मोबाइल की लत से बच्चों को दूर रखने की अपील।

लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में कक्षा सप्तम के छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास को लेकर अभिभावक बैठक आयोजित की गई। प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, संस्कार और सुरक्षा को जरूरी बताया। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई, संगति और मोबाइल के इस्तेमाल पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
- विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में कक्षा सप्तम के अभिभावकों की बैठक हुई।
- प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने शिक्षा के साथ संस्कार, स्वास्थ्य और सुरक्षा को बताया जरूरी।
- बच्चों को सुबह जल्दी उठने, योग-व्यायाम और नियमित स्वाध्याय की दी गई सलाह।
- मोबाइल, रील और गेम की लत से बच्चों को दूर रखने पर जोर।
- अभिभावकों से बच्चों की संगति और दैनिक पढ़ाई पर निगरानी रखने की अपील।
- बैठक का समापन राष्ट्रगान और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ।
सिमडेगा। ग्रामीण एवं वनवासी क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार प्रदान करने के उद्देश्य से श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में कक्षा सप्तम के विद्यार्थियों के अभिभावकों की प्रेरणादायी बैठक आयोजित की गई। बैठक में बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन और व्यक्तित्व विकास को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
शिक्षा के साथ जीवन के संस्कार जरूरी
बैठक की अध्यक्षता विद्यालय के वरिष्ठ एवं जागरूक अभिभावक देवकुमार सिंह ने की। मौके पर कक्षा सप्तम 'ए' के कक्षाचार्य जगेश्वर सिंह, सप्तम 'बी' की कक्षाचार्या बिमला देवी सहित बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे। अभिभावकों की सहभागिता ने विद्यालय के प्रति उनके विश्वास और बच्चों के भविष्य को लेकर उनकी गंभीरता को प्रदर्शित किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय का उद्देश्य केवल बच्चों को परीक्षा में सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने योग्य बनाना है। इसके लिए शिक्षा के साथ स्वास्थ्य, संस्कार और सुरक्षा पर ध्यान देना आवश्यक है।
सुबह जल्दी उठने और नियमित पढ़ाई पर जोर
प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से बच्चों में सुबह जल्दी उठने की आदत विकसित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नियमित दिनचर्या, एकाग्रता और स्वाध्याय बच्चों की पढ़ाई में मददगार होते हैं। बच्चों को प्रतिदिन 20 मिनट योग-व्यायाम करने और घर पर तीन घंटे नियमित स्वाध्याय के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों में बड़ों का सम्मान करने, अतिथियों का आदर करने और हमेशा सत्य बोलने जैसे संस्कार विकसित करना जरूरी है। ये आदतें उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाती हैं।
मोबाइल की लत और नशे से बच्चों को बचाने की अपील
राजेंद्र साहू ने बच्चों को मोबाइल, रील और गेम की लत से दूर रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अभिभावक बच्चों की संगति पर नजर रखें और उन्हें गुटखा, बीड़ी तथा शराब जैसे नशे से बचाएं। इसके साथ ही बच्चों को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए जागरूक करना भी जरूरी है।
उन्होंने स्वच्छता, पौधरोपण और जल संरक्षण को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। अभिभावकों से अपने घर, आंगन, विद्यालय और गांव को स्वच्छ रखने की आदत बच्चों में विकसित करने की अपील की।
बच्चों के लिए प्रतिदिन 15 मिनट निकालें अभिभावक
प्रधानाचार्य ने कहा कि अभिभावक व्यस्त दिनचर्या में से प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट बच्चों के साथ बिताएं। उनकी कॉपी-किताब देखें और पूछें कि उन्होंने विद्यालय में क्या सीखा। घर में पढ़ाई के लिए शांत वातावरण और एक छोटा-सा स्थान उपलब्ध कराने से बच्चों को काफी मदद मिल सकती है।
बैठक के अध्यक्ष देवकुमार सिंह ने कहा कि अभिभावक और आचार्य मिलकर काम करेंगे, तभी बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव होगा। उन्होंने इस बैठक को विद्यालय और अभिभावकों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
बैठक का समापन राष्ट्रगान, भारत माता की जय के उद्घोष और सभी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना के साथ हुआ।
सत्य संदेश समाचार: शिक्षा के साथ संस्कार से बनेगा बच्चों का उज्ज्वल भविष्य
बच्चों का भविष्य केवल विद्यालय की पढ़ाई से नहीं, बल्कि घर के वातावरण, अनुशासन और अभिभावकों के मार्गदर्शन से भी बनता है। मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल, नियमित अध्ययन और अच्छे संस्कारों पर ध्यान देना आज समय की जरूरत है। विद्यालय और अभिभावकों के साझा प्रयास से बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में मजबूत कदम उठाया जा सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों को समय दें, उनकी बातें सुनें और अच्छे संस्कारों के लिए प्रेरित करें।
नियमित पढ़ाई, स्वस्थ दिनचर्या और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं।
याद रखें, आज बच्चों को दिया गया सही मार्गदर्शन कल देश का भविष्य संवारेगा।
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(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






