लचरागढ़ विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में अभिभावक बैठक, संस्कारयुक्त शिक्षा और अनुशासन पर दिया जोर
कक्षा पांचवीं और छठी के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय और अभिभावकों के समन्वय पर चर्चा हुई।

श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय, लचरागढ़ में कक्षा पांचवीं और छठी के अभिभावकों की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अभिभावक महेश्वर सिंह ने की। प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने बच्चों की नियमित पढ़ाई, अनुशासन, अच्छी संगत और मोबाइल की लत से बचाने पर जोर दिया। बैठक का समापन धन्यवाद ज्ञापन और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ।
- विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर, लचरागढ़ में कक्षा पांचवीं और छठी के अभिभावकों की बैठक हुई।
- बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ अभिभावक महेश्वर सिंह ने की।
- प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने बच्चों को प्रतिदिन कम से कम तीन घंटे स्वाध्याय कराने की अपील की।
- अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल रील और गेम की लत से बचाने का आग्रह किया गया।
- नशापान, सड़क सुरक्षा, पर्यावरण स्वच्छता और कौशल विकास पर भी चर्चा हुई।
- कार्यक्रम में शिक्षक भागीरथी सिंह, सुषमा कुमारी और रजनी बड़ाईक सहित अभिभावक उपस्थित रहे।
लचरागढ़: वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति, झारखंड द्वारा संचालित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय के प्रांगण में कक्षा पांचवीं एवं छठी के अभिभावकों की बैठक आयोजित की गई। पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुई इस बैठक में बच्चों के सर्वांगीण विकास, संस्कारयुक्त शिक्षा और अनुशासन को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
ज्ञान के साथ संस्कार और कौशल भी जरूरी
विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों को ज्ञानवान बनाने के साथ हुनरमंद और संस्कारवान बनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि बच्चा डॉक्टर या इंजीनियर बाद में बने, लेकिन पहले अच्छा इंसान, राष्ट्रभक्त और माता-पिता का सम्मान करने वाला बने। यही शिक्षा का मूल मंत्र होना चाहिए।
बच्चों की पढ़ाई और संगत पर रखें ध्यान
प्रधानाचार्य ने अभिभावकों से बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने और घर पर कम से कम तीन घंटे एकांत में स्वाध्याय का वातावरण तैयार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अभिभावक इस बात पर ध्यान दें कि बच्चे किसके साथ खेलते हैं और क्या देखते हैं, क्योंकि अच्छी संगत उनके जीवन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने बच्चों को मोबाइल पर रील देखने और गेम खेलने की लत से बचाने की सलाह दी। इसके बदले उन्हें कहानी की किताबों, खेलकूद और बागवानी जैसी गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया।
सामाजिक जिम्मेदारी और कौशल विकास पर जोर
बैठक में बच्चों को नशापान के दुष्परिणाम, सड़क सुरक्षा के नियम और पर्यावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की बात कही गई। प्रधानाचार्य ने अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाने की आदत विकसित करने का भी सुझाव दिया, ताकि बच्चों की रचनात्मकता और कौशल में वृद्धि हो सके।
विद्यालय और परिवार के समन्वय से बनेगा बेहतर भविष्य
बैठक की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ अभिभावक महेश्वर सिंह ने कहा कि जिस तरह रथ एक पहिए से नहीं चलता, उसी तरह बच्चे का भविष्य केवल विद्यालय या केवल घर से नहीं बन सकता। इसके लिए दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सजग रहने की अपील की।
शिक्षक और अभिभावक रहे उपस्थित
बैठक में कक्षा पांचवीं के कक्षाचार्य भागीरथी सिंह, कक्षा छठी 'ए' की कक्षाचार्या सुषमा कुमारी और कक्षा छठी 'बी' की कक्षाचार्या रजनी बड़ाईक सहित बड़ी संख्या में अभिभावक, माताएं और अन्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ।
सत्य संदेश समाचार: बच्चों के बेहतर भविष्य में अभिभावकों की भूमिका अहम
बच्चों का सर्वांगीण विकास नियमित पढ़ाई, अच्छे संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण से संभव है। विद्यालय और परिवार के बीच बेहतर तालमेल बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बच्चों की प्रतिभा को निखारने के लिए उन्हें पढ़ाई के साथ खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना जरूरी है। अभिभावक और शिक्षक मिलकर उनके उज्ज्वल भविष्य की नींव मजबूत कर सकते हैं।
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