हकलाहट पर शर्म नहीं, समझ और सहयोग की जरूरत : डॉ. सचिन श्रीवास्तव
अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस पर सम्मान, धैर्य और सहयोग का संदेश दे रहे राहुल कुमार।

सिमडेगा में अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस पर हकलाहट से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने प्रभावित लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें सहज वातावरण देने की आवश्यकता बताई। वहीं, राहुल कुमार पिछले 12 वर्षों से हकलाहट के प्रति जागरूकता फैलाने और लोगों का मनोबल बढ़ाने में जुटे हैं।
- 22 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस मनाया जाता है।
- डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने हकलाहट से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने पर जोर दिया।
- राहुल कुमार पिछले 12 वर्षों से हकलाहट के प्रति जागरूकता फैलाने में जुटे हैं।
- वर्ष 2014 में महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद राहुल की सक्रियता बढ़ी।
- वीरू स्थित शांति भवन मेडिकल सेंटर में 27 और 28 जून 2026 को जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई थी।
- बच्चों को डांटने या बोलने के लिए दबाव देने के बजाय धैर्य और प्रोत्साहन देने की अपील की गई।
हकलाहट को कमजोरी नहीं, समझने की जरूरत
सिमडेगा। बोलते समय शब्दों का अटकना, ध्वनियों को बार-बार दोहराना या अपनी बात कहने में कठिनाई होना हकलाहट के प्रमुख लक्षण हैं। इसके कारण कई बार व्यक्ति का आत्मविश्वास प्रभावित होता है और उसे सामाजिक उपेक्षा या मजाक का सामना करना पड़ता है। ऐसे में हकलाहट को शर्मिंदगी का कारण मानने या प्रभावित व्यक्ति को कमतर आंकने के बजाय उसे समझने और सहयोग देने की जरूरत है।
22 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस के अवसर पर इस विषय पर जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया जा रहा है। प्रसिद्ध चिकित्सक एवं मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने हकलाहट से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने और उनका आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर दिया है।
उनके अनुसार, प्रभावित लोगों को बोलने के लिए अनावश्यक दबाव देने, बीच में टोकने या उनका मजाक उड़ाने से बचना चाहिए। उन्हें अपनी बात पूरी करने के लिए पर्याप्त समय और सहज वातावरण देना जरूरी है। उचित मार्गदर्शन और स्पीच थेरेपी से कई लोगों को अपनी संवाद क्षमता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
12 वर्षों से जागरूकता अभियान चला रहे राहुल कुमार
सिमडेगा के राहुल कुमार पिछले 12 वर्षों से हकलाहट के प्रति जागरूकता फैलाने और इससे प्रभावित लोगों का मनोबल बढ़ाने के प्रयास में जुटे हैं। वर्ष 2014 में महाराष्ट्र में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के बाद इस दिशा में उनकी सक्रियता बढ़ी। वह हकलाहट से जुड़े संगठन द इंडियन स्टटरिंग एसोसिएशन (टीआईएसए) के जिला समन्वयक के रूप में भी जुड़े रहे हैं।
राहुल कुमार पायनियर कंप्यूटर सेंटर में हकलाहट से प्रभावित लोगों को परामर्श देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने का प्रयास करते हैं। उनका मानना है कि बोलने में कठिनाई के आधार पर किसी व्यक्ति की प्रतिभा और क्षमता का आकलन नहीं किया जाना चाहिए।
प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय, धैर्य और सहयोग मिलना चाहिए। परिवार, मित्रों, शिक्षकों और समाज का सकारात्मक रवैया उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
शांति भवन मेडिकल सेंटर में आयोजित हुई कार्यशाला
हकलाहट के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अनुभव साझा करने के उद्देश्य से 27 और 28 जून 2026 को वीरू स्थित शांति भवन मेडिकल सेंटर में कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें छह राज्यों से करीब 20 लोगों ने भाग लिया था।
इस तरह की कार्यशालाएं हकलाहट से प्रभावित लोगों को अपने अनुभव साझा करने, एक-दूसरे से सीखने और अपनी कठिनाइयों पर खुलकर चर्चा करने का अवसर देती हैं।
टीआईएसए की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। संगठन हकलाहट के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इससे प्रभावित लोगों को सहयोग देने की दिशा में काम करता है। संगठन का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन 20 से 22 नवंबर 2026 तक लखनऊ में आयोजित करने का प्रस्ताव था।
बच्चों को डांटने के बजाय प्रोत्साहित करें
बच्चों में हकलाहट दिखाई देने पर उन्हें डांटना, बार-बार सही बोलने के लिए दबाव डालना या दूसरे बच्चों से तुलना करना उचित नहीं है। माता-पिता और शिक्षकों को धैर्यपूर्वक उनकी बात सुननी चाहिए और उन्हें बिना किसी झिझक के अपनी बात कहने का अवसर देना चाहिए।
यदि बच्चे को बोलने में कठिनाई हो रही है, तो जरूरत के अनुसार स्पीच एंड लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह ली जा सकती है। विशेषज्ञ बच्चे की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं।
बच्चों को यह महसूस कराना जरूरी है कि बोलने में कठिनाई होने से उनकी योग्यता, बुद्धिमत्ता या प्रतिभा कम नहीं होती। परिवार और स्कूल में सहयोगपूर्ण वातावरण मिलने से उनके आत्मविश्वास को बढ़ावा मिल सकता है।
सम्मान और सहयोग से बढ़ेगा आत्मविश्वास
अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस का उद्देश्य हकलाहट के प्रति फैली गलत धारणाओं और सामाजिक झिझक को दूर करना है। बोलने में कठिनाई किसी व्यक्ति की योग्यता का पैमाना नहीं है। प्रभावित लोगों को सम्मान, धैर्य और सहयोग देने से उन्हें अधिक सहजता के साथ अपनी बात रखने का अवसर मिलता है।
डॉ. सचिन श्रीवास्तव का संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संदेश और राहुल कुमार के लंबे समय से जारी जागरूकता प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण हैं। जरूरत है कि समाज हकलाहट को उपहास का विषय बनाने के बजाय समझ और सहयोग का रवैया अपनाए।
सत्य संदेश समाचार: हकलाहट नहीं, प्रतिभा से पहचानें व्यक्ति को
अंतरराष्ट्रीय हकलाहट जागरूकता दिवस पर सिमडेगा से सम्मान, धैर्य और सहयोग का संदेश सामने आया है। डॉ. सचिन श्रीवास्तव ने प्रभावित लोगों का आत्मविश्वास बढ़ाने पर जोर दिया, वहीं राहुल कुमार 12 वर्षों से जागरूकता फैलाने में जुटे हैं। समाज में सकारात्मक व्यवहार और उचित मार्गदर्शन से प्रभावित लोगों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
हकलाहट से प्रभावित लोगों का मजाक बनाने के बजाय उनकी बात धैर्य से सुनें। बच्चों और बड़ों को समान सम्मान दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित करें। जागरूकता का यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






