सिमडेगा में अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की नई कमेटी का हुआ विस्तार स्थानीय कलाकारों को हक और सम्मान दिलाने के लिए एकजुट हुए कला साधक
सिमडेगा में अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की नई समिति का गठन कर कलाकारों के अधिकारों की आवाज बुलंद की गई।

सिमडेगा में अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की बैठक में नई समिति का विस्तार कर कलाकारों के हितों के लिए संघर्ष का संकल्प लिया गया। इस दौरान जिला प्रशासन से स्थानीय कलाकारों की सूची बनाने और कला प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना करने की मांग की गई। यह पहल कलाकारों को सरकारी योजनाओं में उचित अवसर प्रदान करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- सिमडेगा में सत्या महतो की अध्यक्षता में अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की नई जिला समिति का विस्तार किया गया।
- बैठक में कलाकारों के हितों, उनके अधिकारों और जिले में कला व प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना पर विस्तृत चर्चा हुई।
- समिति में सूरज रजक व सुबास महतो को उपाध्यक्ष और अवि नीलकंठ को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई।
- सत्या महतो ने प्रशासन पर स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा करने और उनकी व्यवस्थित सूची न होने का आरोप लगाया।
- जाफर खान और कृष्णा धोबी को नवगठित समिति में संरक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
झारखंड के सिमडेगा जिले में कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रविवार, 20 सितंबर 2026 को सिमडेगा में अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और कला प्रेमी सत्या महतो ने की। इस बैठक की शुरुआत सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के गायन के साथ हुई, जिसने उपस्थित सभी कलाकारों में देशभक्ति और कला के प्रति समर्पण का भाव जगाया। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में संगठन का विस्तार करना और स्थानीय कलाकारों की समस्याओं व उनके अधिकारों पर गंभीर विचार-विमर्श करना था। इस दौरान सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया, जो आने वाले समय में कलाकारों के उत्थान के लिए कार्य करेगी।
नवगठित समिति के पदाधिकारियों की घोषणा और जिम्मेदारी का बंटवारा
अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की इस महत्वपूर्ण बैठक में संगठन को मजबूती प्रदान करने के लिए सर्वसम्मति से नई जिला समिति का विस्तार किया गया। इस नई समिति में समाज और कला जगत के सक्रिय चेहरों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। समिति की नई संरचना इस प्रकार है:
- उपाध्यक्ष: सूरज रजक एवं सुबास महतो
- सचिव: अमित बडाईक
- उप सचिव: पंकज कुमार
- महासचिव: अवि नीलकंठ
- कोषाध्यक्ष: मनीष बड़ाईक
- उपकोषाध्यक्ष: प्रीति एवं चांदनी जेसवाल
- संगठन मंत्री: आतिब अकाब एवं अमृत राज
- मीडिया प्रभारी: आकांक्षा महतो, पवन बैठा एवं उज्ज्वल
- संरक्षक: जाफर खान एवं कृष्णा धोबी
इन सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संगठन के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और जिले के प्रत्येक कलाकार तक मदद पहुंचाने का संकल्प लिया।
स्थानीय कलाकारों की उपेक्षा पर सत्या महतो का तीखा प्रहार
बैठक को संबोधित करते हुए अध्यक्ष सत्या महतो ने जिले के कलाकारों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सिमडेगा की माटी में कला कूट-कूट कर भरी है, लेकिन यहां के कलाकारों को वह सम्मान और अवसर नहीं मिल पा रहा है जिसके वे हकदार हैं।
सत्या महतो ने कहा:
> "जिले के कलाकार अपनी कला के माध्यम से झारखंड की संस्कृति, भाषा, परंपरा और धरोहर को संरक्षित करने का कार्य कर रहे हैं, लेकिन दुख के साथ कहना पड़ता है कि जिला प्रशासन के पास जिले के कलाकारों की व्यवस्थित सूची उपलब्ध नहीं है। जब तक प्रशासन के पास कलाकारों का कोई आधिकारिक डेटा नहीं होगा, तब तक उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे मिल पाएगा?"
उन्होंने आगे मांग की कि जिला प्रशासन को सभी विधाओं के कलाकारों की एक पारदर्शी और श्रेणीवार सूची तैयार करनी चाहिए। यदि यह सूची उपलब्ध होगी, तो सरकारी और गैर-सरकारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में केवल कुछ चुनिंदा चेहरों को ही बार-बार मौका नहीं मिलेगा, बल्कि नए और प्रतिभावान कलाकारों को भी अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिमडेगा का नाम रोशन कर रहे कलाकार
अपने संबोधन के दौरान सत्या महतो ने सिमडेगा के कलाकारों की प्रतिभा का लोहा मानते हुए कहा कि यहां के कलाकारों ने केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में अपनी कला का परचम लहराया है। सिमडेगा के कलाकार छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, मुंबई, अंडमान-निकोबार, हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर अपनी शानदार प्रस्तुतियां देते रहे हैं।
उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जो कलाकार बाहरी राज्यों में जाकर जिले का गौरव बढ़ा रहे हैं, उन्हें अपने ही गृह जिले सिमडेगा में आयोजित होने वाले सरकारी कार्यक्रमों और महोत्सवों में उपेक्षित कर दिया जाता है। यह स्थानीय कलाकारों के आत्मसम्मान पर चोट है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके सुधार के लिए कलाकारों की सूची को हर वर्ष पारदर्शी तरीके से अद्यतन (अपडेट) किया जाना बेहद जरूरी है ताकि नए उभरते कलाकारों को भी समान अवसर मिल सकें।
कला एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की पुरजोर मांग
बैठक में कलाकारों की एक और बुनियादी जरूरत को रेखांकित किया गया। जिले में कलाकारों के पास रिहर्सल करने, बैठकें आयोजित करने या नई सांस्कृतिक गतिविधियों की तैयारी करने के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं है। सत्या महतो ने प्रशासन से मांग की कि सिमडेगा में एक आधुनिक कला एवं प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की जाए। इस केंद्र के बनने से जिले के पारंपरिक लोक नृत्यों, गीतों और नाटकों को नया जीवन मिलेगा और युवा पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
महासंघ के नवनियुक्त संरक्षक जाफर खान ने भी कलाकारों को संबोधित करते हुए उनके अधिकारों की लड़ाई में हर संभव सहयोग देने की बात कही।
जाफर खान ने कहा:
> "संस्कृति के प्रति प्रेम और समर्पण के साथ कार्य कर रहे कलाकारों को समान अवसर, उचित मंच और सम्मान मिलना चाहिए। महासंघ इन विषयों को प्रशासन के समक्ष रखकर कलाकारों के हित में पहल करने का प्रयास करेगा। हम कलाकारों के शोषण और उपेक्षा के खिलाफ हमेशा खड़े रहेंगे।"
बैठक में उपस्थित प्रमुख कलाकार और सदस्य
इस महत्वपूर्ण बैठक में केवल पदाधिकारी ही नहीं, बल्कि सिमडेगा जिले के कोने-कोने से आए दर्जनों कलाकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से सूरज कुमार रजक, सुभास महतो, संजय नायक, विनय नायक, तरुण कुल्लू, आतिफ अकाब, उज्ज्वल सिंह, पवन बैठा, सूरज महतो, अनूज कुमार महली, पंकज कुमार, अमृत राज, मिंज, किरण मिंज, कलिंदर प्रधान, सुकुवान डुंगडुंग, गिरिराज कुमार, राहुल क्रिकेटा, अजय सोरेंग, अफजल आलम, कृष्णा, पुतुल, चाँदनी जायसवाल, आकांक्षा कुमारी महतो, प्रीति मेहर, उषा कुमारी, जाफर खान एवं कृष्णा धोबी सहित बड़ी संख्या में कला प्रेमी और संगठन के सदस्य उपस्थित रहे।
सत्य संदेश समाचार: स्थानीय कलाकारों को मिले पहचान और सम्मान, प्रशासन जागे नींद से
अखिल भारतीय सांस्कृतिक महासंघ की यह बैठक सिमडेगा के कला जगत के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। यह कहानी दर्शाती है कि कैसे जमीनी स्तर पर उत्कृष्ट कला साधना करने वाले कलाकार प्रशासनिक उदासीनता के कारण हाशिये पर चले जाते हैं। जिला प्रशासन द्वारा कलाकारों की सूची न रखना और बार-बार केवल चहेतों को अवसर देना सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 'सत्य संदेश समाचार' प्रशासन से मांग करता है कि वह अविलंब कलाकारों के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करे और जिले में कला केंद्र की स्थापना के लिए ठोस कदम उठाए।
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किसी भी समाज की पहचान उसकी कला, संस्कृति और परंपराओं से होती है। सिमडेगा के कलाकारों ने अपनी मेहनत और साधना से हमारी अनमोल धरोहर को जीवित रखा है। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर इन कलाकारों की आवाज बनें और उन्हें उनका हक दिलाने में सहयोग करें। जब हमारी लोक कलाएं समृद्ध होंगी, तभी हमारा समाज और राज्य प्रगति के पथ पर आगे बढ़ेगा। आइए, अपनी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान के लिए एकजुट हों।
सजक रहें, सक्रिय बनें! सिमडेगा के इन प्रतिभावान कलाकारों के अधिकारों की इस मुहिम को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें। इस खबर पर अपनी बहुमूल्य राय नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें, इसे अपने मित्रों और कला प्रेमी साथियों के साथ शेयर करें और स्थानीय कलाकारों के सम्मान के लिए जन-जागरूकता फैलाएं।
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