खनिज संपदा के अधिकारों पर केंद्र के फैसले के खिलाफ सिमडेगा में झामुमो का महासंग्राम, 10 प्रखंडों में जोरदार धरना-प्रदर्शन
खनिज संपदा पर केंद्रीय कानून के विरोध में झामुमो ने किया उग्र प्रदर्शन।

झारखंड के सिमडेगा जिले के सभी 10 प्रखंडों में झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 के खिलाफ जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया और जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार पर राज्य के खनिज अधिकारों को छीनने का आरोप लगाया। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य राज्य के आर्थिक हितों की रक्षा करना है।
- झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने सिमडेगा के सभी 10 प्रखंडों और नगरों में एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 के खिलाफ एकदिवसीय धरना दिया।
- तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने केंद्र सरकार पर झारखंड के जल, जंगल, जमीन और आर्थिक अधिकारों पर चोट करने का बड़ा आरोप लगाया।
- झामुमो नेताओं का दावा है कि नए संशोधन से राज्य के राजस्व और विकास कार्यों पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा।
- प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जिले के सभी प्रखंडों में विभिन्न प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
- झामुमो महिला मोर्चा अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग ने खनिज संपदा का सीधा संबंध ग्रामीण विकास से जोड़ते हुए आंदोलन तेज करने की बात कही।
झारखंड के सिमडेगा जिले में शनिवार को राजनीतिक सरगर्मी चरम पर रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने केंद्र सरकार के खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR Amendment Act, 2026) के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर सिमडेगा के सभी 10 प्रखंडों और नगर क्षेत्र में एकदिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और राज्य के खनिज एवं आर्थिक अधिकारों की रक्षा के लिए संकल्प लिया।
खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों की लड़ाई: क्या है पूरा विवाद?
केंद्र सरकार द्वारा लाए गए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 (MMDR Amendment Act, 2026) को लेकर पूरे झारखंड में राजनीतिक और कानूनी विरोध तेज हो गया है। इस नए संशोधन के तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कुछ कर, सेस अथवा अन्य लेवी पर केंद्रीय स्तर से कड़े नियम और शर्तें निर्धारित की गई हैं।
झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्य के लिए यह निर्णय एक बड़ा झटका माना जा रहा है। झामुमो नेताओं का स्पष्ट कहना है कि राज्य के आर्थिक हित और विकास पूरी तरह से खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर हैं। इस नए कानून के लागू होने से राज्य का राजस्व सीधे तौर पर प्रभावित होगा, जिससे जन कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर बुरा असर पड़ेगा।
तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया और जिला अध्यक्ष का कड़ा रुख
इस महाधरना के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। तोरपा के लोकप्रिय विधायक सुदीप गुड़िया ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए राज्य के अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराया।
तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा: "झारखंड की पहचान जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से है। राज्य की धरती से निकलने वाले खनिज संसाधनों पर यहां के लोगों का भी अधिकार और हित जुड़ा हुआ है। खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का उपयोग झारखंड के गांवों, गरीबों, किसानों, युवाओं और आम जनता के विकास में होना चाहिए। एमएमडीआर संशोधन के जिन प्रावधानों से राज्यों के अधिकार और राजस्व प्रभावित होने की आशंका है, उन पर केंद्र सरकार को राज्यों की चिंताओं को गंभीरता से समझना चाहिए। झारखंड अपने अधिकारों और जनता के हितों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाता रहेगा।"
इसी क्रम में जेएमएम के जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया और स्थानीय अधिकारों की बात की।
JMM जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना ने कहा: "झारखंड की पहचान जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से है। झारखंड की धरती से निकलने वाले खनिजों का लाभ यहां की जनता और राज्य के विकास को मिलना चाहिए। राज्य के आर्थिक एवं अधिकारों से जुड़े विषयों पर केंद्र सरकार को राज्यों की चिंताओं को गंभीरता से समझना चाहिए।"
ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ेगा असर: जिला सचिव व महिला मोर्चा अध्यक्ष
धरना-प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और ऐसे में राज्य के वित्तीय अधिकारों को कम करना उनके साथ अन्याय होगा।
JMM जिला सचिव मो. सफीक खान ने कहा: "झारखंड देश के प्रमुख खनिज संपदा वाले राज्यों में शामिल है, लेकिन खनिज क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीण आज भी सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में राज्य के राजस्व अधिकारों को प्रभावित करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।"
वहीं, JMM महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग ने ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण से अपनी बात रखी।
JMM महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सह जिला परिषद अध्यक्ष रोस प्रतिमा सोरेंग ने कहा: "झारखंड की खनिज संपदा का सीधा संबंध यहां के गांवों और आम लोगों के विकास से है। खनिज संपदा वाले क्षेत्रों की जनता को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और रोजगार का बेहतर लाभ मिलना चाहिए। राज्य के खनिज संसाधनों से जुड़े राजस्व पर असर पड़ने से विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।"
सभी 10 प्रखंडों में प्रभारियों की सूची और कमान
सिमडेगा जिले के सभी 10 प्रखंडों एवं नगर क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन को पूरी तरह सफल बनाने के लिए पार्टी द्वारा अलग-अलग प्रभारियों की नियुक्ति की गई थी, जिन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को एकजुट किया:
- सिमडेगा प्रखंड: सफीक खान, फिरोज अली, मोहम्मद शाहिद, अनिल तिर्की, बीरबल महतो, ऑस्कर डांग, किशोर डांग एवं सिकंदर बरवा।
- पाकरटांड़ प्रखंड: अनिल तिर्की, मोहम्मद शाहिद, किशोर डांग एवं ऑस्कर डांग।
- कुरडेग प्रखंड: सफीक खान।
- केरसई प्रखंड: प्रफुलित डुंगडुंग, नुशरत खातून एवं सफीक खान।
- बोलबा प्रखंड: अनिल कंडुलना एवं संजू डांग।
- टीटांगर प्रखंड: अनिल कंडुलना एवं नोवास केरकेट्टा।
- बांसजोर प्रखंड: अनिल कंडुलना एवं रितेश बड़ाईक।
- जलडेगा प्रखंड: बिरजो कंडुलना एवं जुशफ लुगुन।
- बानो प्रखंड: बिरजो कंडुलना एवं धर्मदास टोपनो।
- कोलेबिरा प्रखंड: रोस प्रतिमा सोरेंग एवं फिरोज अली।
आंदोलन में शामिल प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची
इस ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन में जिला स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक के नेताओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला अध्यक्ष अनिल कंडुलना, जिला सचिव मो. सफीक खान, जिला उपाध्यक्ष रितेश बड़ाईक, अनिल तिर्की, ऑस्कर डांग, मो. सिराजुद्दीन, जिला कोषाध्यक्ष राजेश टोप्पो, केंद्रीय सदस्य नोवास केरकेट्टा, रोस प्रतिमा सोरेंग, फिरोज अली, नुसरत खातून, प्रफुलित डुंगडुंग, मो. इरशाद, बिरजो कंडुलना, धर्मदास टोपनो, जुशफ लुगुन, सुनील खेस, संजू डांग, किशोर डांग, मो. शाहिद, फूलकुमारी समद सहित सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
सत्य संदेश समाचार: संघीय ढांचे और राज्यों के वित्तीय अधिकारों पर बड़ा प्रहार
केंद्र सरकार द्वारा लाया गया एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2026 कहीं न कहीं राज्यों के वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा प्रहार नजर आता है। झारखंड जैसे समृद्ध लेकिन आर्थिक रूप से पिछड़े राज्य के लिए खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व ही विकास की रीढ़ है। यदि केंद्र सरकार इस तरह के एकतरफा फैसले थोपेगी, तो राज्यों के पास जनकल्याणकारी योजनाएं चलाने के लिए बजट की भारी कमी हो जाएगी। सत्य संदेश समाचार का मानना है कि केंद्र को संघीय ढांचे का सम्मान करते हुए राज्यों की चिंताओं को दूर करना चाहिए।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां के मूलवासियों और ग्रामीणों का है। जब तक हम अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक नीतियां हमारे अनुकूल नहीं बनेंगी। लोकतंत्र में जनता की आवाज ही सबसे बड़ी ताकत होती है। आइए, हम सब मिलकर राज्य के विकास और आर्थिक स्वायत्तता की इस मुहिम को आगे बढ़ाएं।
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(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






