बरसलोया में श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत, संतान की दीर्घायु के लिए माताएं करेंगी पूजा
शनिवार को जगन्नाथ मंदिर परिसर के सामने होगा धार्मिक आयोजन, पंडित दिलीप पंडा कराएंगे पूजा।

कोलेबिरा प्रखंड के बरसलोया गांव में शनिवार को जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत श्रद्धा और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। आयोजन श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर के सामने लखन द्विवेदी के पुराने घर के समीप होगा। इस अवसर पर माताएं संतान की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करेंगी।
- बरसलोया गांव में शनिवार को जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत का आयोजन होगा।
- पूजा श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर के सामने लखन द्विवेदी के पुराने घर के समीप होगी।
- आयोजन लखन द्विवेदी के तत्वावधान में किया जाएगा।
- पंडित दिलीप पंडा विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा कराएंगे।
- माताएं संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी।
पारंपरिक विधि-विधान से होगी पूजा-अर्चना
कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र के ग्राम बरसलोया में जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर के ठीक सामने लखन द्विवेदी के पुराने घर के समीप यह आयोजन होगा। इसमें गांव की महिलाएं व्रत रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा-अर्चना करेंगी।
पूजा-अर्चना पंडित दिलीप पंडा द्वारा विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ कराई जाएगी। आयोजन में गांव के श्रद्धालुओं के अलावा बच्चे, बुजुर्ग, महिला और पुरुष भी शामिल होंगे।
कठिन व्रतों में शामिल है जितिया
जीवित्पुत्रिका व्रत को कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार व्रती महिलाएं निर्धारित तिथि पर व्रत का संकल्प लेकर उपवास करती हैं। कई परंपराओं में इस दौरान अन्न और जल का त्याग भी किया जाता है।
पूजा के दौरान भगवान जीमूतवाहन की कथा सुनी जाती है। व्रती महिलाएं विधि-विधान से पूजा कर अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-शांति की कामना करती हैं।
मातृ-स्नेह और समर्पण का प्रतीक है जीवित्पुत्रिका
धार्मिक मान्यता के अनुसार जीवित्पुत्रिका व्रत माताएं अपनी संतान की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। इस पर्व में सात्विकता, शुद्धता और धार्मिक अनुशासन का विशेष महत्व होता है। व्रत का समापन स्थानीय परंपरा और परिवार की मान्यताओं के अनुसार पूजा एवं पारण के साथ किया जाता है।
बरसलोया में आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम ग्रामीणों के लिए आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का अवसर होगा।
सत्य संदेश समाचार: आस्था और परंपरा के साथ मनाया जाएगा जितिया
बरसलोया में जीवित्पुत्रिका व्रत को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। इस आयोजन के माध्यम से माताएं अपनी संतान के मंगलमय जीवन की कामना करेंगी। धार्मिक परंपराओं के साथ ऐसे आयोजन ग्रामीण समाज में सामूहिक सहभागिता और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जीवित्पुत्रिका व्रत मातृ-स्नेह और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
ऐसे पर्व हमारी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक विरासत को आगे बढ़ाते हैं।
सभी व्रती महिलाओं और श्रद्धालुओं को पर्व की शुभकामनाएं।
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