बानो के मदर टेरेसा नर्सिंग कॉलेज में धूमधाम से मनाया गया हिंदी दिवस एसबीआई शाखा प्रबंधक रतिया उरांव ने कहा भावनाओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम है हिंदी
मदर टेरेसा नर्सिंग कॉलेज में छात्र-छात्राओं को दैनिक जीवन में हिंदी अपनाने का दिया गया संदेश।

सिमडेगा के बानो स्थित मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सोमवार को हिंदी दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एसबीआई शाखा प्रबंधक रतिया उरांव सहित संस्थान के निदेशक डॉ. प्रहलाद मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर विद्यार्थियों को राजभाषा के महत्व से अवगत कराया और दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प दिलाया।
- मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बानो में सोमवार को गरिमापूर्ण माहौल में हिंदी दिवस का भव्य आयोजन किया गया।
- भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक रतिया उरांव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
- संस्थान के निदेशक डॉ. प्रहलाद मिश्रा ने हिंदी को जन-जन की भावनाओं से सहजता से जोड़ने का सबसे सरल और सशक्त माध्यम बताया।
- एडमिनिस्ट्रेटर रविकांत मिश्रा ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों के जरिए मातृभाषा की महत्ता को रेखांकित किया।
- इस विशेष अवसर पर कॉलेज की प्राचार्या एरेन बेक, निशी डुंगडुंग सहित सभी ट्यूटर और नर्सिंग की छात्राएं मुख्य रूप से उपस्थित रहीं।
सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड स्थित प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग में सोमवार को हिंदी दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस समारोह का मुख्य उद्देश्य भावी नर्सों और चिकित्सा क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और राजभाषा हिंदी के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय स्टेट बैंक, बानो शाखा के प्रबंधक रतिया उरांव उपस्थित हुए। संस्थान के प्रशासनिक अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति में छात्राओं ने हिंदी को अपने दैनिक एवं व्यावहारिक जीवन में अपनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
हिंदी केवल संवाद नहीं, हमारी आत्मा की आवाज है: रतिया उरांव
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि और भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक रतिया उरांव ने हिंदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने छात्र-छात्राओं को प्रेरित करते हुए कहा कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं होती, बल्कि यह हमारी संस्कृति और पहचान का आधार होती है।
रतिया उरांव ने कहा: "14 सितंबर केवल एक तिथि नहीं है, बल्कि यह हिंदी के प्रति हमारे अगाध सम्मान और उसके व्यापक व्यावहारिक प्रयोग का संकल्प लेने का महापर्व है। हिंदी को हमें केवल अनौपचारिक बोलचाल तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि शासकीय, अर्धशासकीय और बैंकिंग कार्यों में भी इसके प्रयोग को निरंतर बढ़ावा देना चाहिए। अपनी राष्ट्रभाषा को सम्मान के साथ स्वीकार करना और उसे आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।"
चिकित्सा और नर्सिंग क्षेत्र में हिंदी का महत्व: डॉ. प्रहलाद मिश्रा
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रहलाद मिश्रा ने अपने संबोधन में चिकित्सा के क्षेत्र में स्थानीय और राष्ट्रीय भाषा की उपयोगिता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि नर्सिंग एक ऐसा पेशा है जो सीधे तौर पर मानवीय सेवा और संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है।
डॉ. प्रहलाद मिश्रा ने कहा: "हिंदी हमारी राजभाषा होने के साथ-साथ आम जनमानस के दिलों को जोड़ने वाली सबसे सुगम कड़ी है। विशेषकर चिकित्सा और नर्सिंग जैसे सेवा क्षेत्र में, जहां मरीजों की सेवा सर्वोपरि है, अपनी स्थानीय और मातृभाषा में संवाद करने से रोगियों को मानसिक संबल मिलता है। विद्यार्थियों को अपने दैनिक जीवन के साथ-साथ व्यावसायिक जीवन में भी हिंदी का गर्व से प्रयोग करना चाहिए।"
निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल: रविकांत मिश्रा
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के एडमिनिस्ट्रेटर रविकांत मिश्रा ने हिंदी के साहित्यिक सौंदर्य और इसकी वैज्ञानिकता पर चर्चा की। उन्होंने हिंदी को भारतीय संस्कृति की रीढ़ बताते हुए विद्यार्थियों को अपनी भाषा पर गर्व करने की सीख दी।
रविकांत मिश्रा ने कहा: "हिंदी हमारे मस्तक पर सजी उस बिंदी की तरह है जो भारतीय संस्कृति और अस्मिता को वैश्विक पटल पर सुशोभित करती है। महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र जी ने बहुत पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अपनी भाषा की उन्नति के बिना किसी भी समाज या राष्ट्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है। हमें अंग्रेजी या अन्य भाषाओं के प्रति द्वेष रखे बिना अपनी मूल भाषा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।"
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोग और शिक्षिकाएं
बानो के इस नर्सिंग कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संस्थान का पूरा स्टाफ और छात्राएं बेहद उत्साहित नजर आईं। कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉलेज प्रबंधन और शैक्षणिक टीम का विशेष योगदान रहा।
समारोह में मुख्य रूप से जीएनएम प्राचार्या एरेन बेक, एएनएम प्राचार्या निशी डुंगडुंग, ट्यूटर कविता कुमारी, रिचा हेम्ब्रम, अलबीना टोपनो, आईवी सुप्रभा, खुशबू कुमारी, वंदना धनवार और पूनम कुमारी उपस्थित थीं। इनके अलावा संस्थान की सभी छात्राओं ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
सत्य संदेश समाचार: राजभाषा का सम्मान केवल प्रतीकात्मक नहीं, व्यावहारिक होना चाहिए
बानो के मदर टेरेसा नर्सिंग कॉलेज में हिंदी दिवस का यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है। आज के तकनीकी और वैश्विक युग में जब युवा वर्ग अपनी मातृभाषा से दूर हो रहा है, ऐसे समय में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा इस प्रकार की पहल अत्यंत आवश्यक है। राजभाषा हिंदी का वास्तविक सम्मान तभी सुनिश्चित होगा जब हम इसे केवल साल में एक दिन के उत्सव के रूप में न मनाकर अपने दैनिक व्यवहार, पठन-पाठन और शासकीय कार्यों का अनिवार्य हिस्सा बनाएंगे।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की संस्कृति, इतिहास और सामूहिक पहचान का जीवंत दर्पण होती है। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपनी मातृभाषा और राजभाषा हिंदी को अपने दैनिक जीवन, कार्यक्षेत्र और सामाजिक संवाद में गर्व के साथ स्थान देंगे। जब हम अपनी भाषा का सम्मान करेंगे, तभी वैश्विक पटल पर हमारी संस्कृति को वास्तविक सम्मान मिलेगा।
इस पावन अवसर पर अपनी मातृभाषा के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करें। आपको क्या लगता है कि आधुनिक चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा प्रणाली में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए और क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए? अपने बहुमूल्य विचार नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें, इस महत्वपूर्ण संदेश को अपने मित्रों और परिजनों के साथ शेयर करें और समाज में अपनी भाषा के प्रति गौरव की भावना जगाने में अपना योगदान दें।
(डिस्क्लेमर: यह समाचार पोर्टल पर प्रसारित ख़बरें केवल जन-सूचना और शैक्षणिक दृष्टिकोण के लिए प्रकाशित की जा रही हैं। यह वर्तमान में एक प्रदर्शन






