विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर लचरागढ़ में धूमधाम से मनाया गया हिंदी दिवस विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों ने दिखाया हुनर
राष्ट्रभाषा के संवर्धन और विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने के लिए विद्यालय में भव्य आयोजन संपन्न हुआ।

लचरागढ़ स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में हिंदी दिवस के अवसर पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। वनवासी कल्याण केंद्र के प्रांत खेलकूद प्रमुख डोमनचंद महतो और प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को राष्ट्रभाषा के महत्व से अवगत कराया गया।
- विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर लचरागढ़ में मातृभाषा के प्रति समर्पण दर्शाने के लिए हिंदी दिवस का भव्य आयोजन किया गया।
- समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि डोमनचंद महतो और प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
- विद्यार्थियों की भाषाई दक्षता बढ़ाने के लिए भाषण, निबंध लेखन, पहाड़ा और वेश-बस्ता प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
- मुख्य अतिथि डोमनचंद महतो ने हिंदी को हमारी गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय अस्मिता का प्राण बताया।
- प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू ने हिंदी को भारत माता के भाल की बिंदिया बताते हुए इसके संवर्धन को परम कर्तव्य घोषित किया।
- कार्यक्रम का मंच संचालन आचार्य प्रमोद पाणिग्राही और निर्णायक की भूमिका आचार्य निरंजन सिंह ने निभाई।
झारखंड के लचरागढ़ में स्थित विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर उच्च विद्यालय में हिंदी दिवस के पावन अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित इस विद्यालय में बच्चों के भीतर अपनी राष्ट्रभाषा के प्रति प्रेम और गौरव का भाव जगाने के लिए विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं कराई गईं। इस समारोह में विद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित समस्त शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक स्टाफ ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हिंदी के महत्व से परिचित कराना और उन्हें दैनिक जीवन में इसके उपयोग के लिए प्रेरित करना था।
दीप प्रज्वलन और समारोह का भव्य शुभारंभ
समारोह का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि, वनवासी कल्याण केंद्र के प्रांत खेलकूद प्रमुख श्री डोमनचंद महतो एवं विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र साहू द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। उन्होंने सरस्वती माता और भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर विद्यालय का वातावरण राष्ट्रभक्ति और भाषाई गौरव के गीतों से गुंजायमान हो उठा। उपस्थित सभी लोगों ने देश की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने में हिंदी के योगदान को याद किया।
विभिन्न प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बिखेरा अपनी प्रतिभा का जलवा
विद्यार्थियों में राष्ट्रभाषा के प्रति अभिरुचि और भाषाई दक्षता जागृत करने के उद्देश्य से विद्यालय में कई स्तरों पर विविध प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
शिशु वाटिका वेश-बस्ता प्रतियोगिता
छोटे बच्चों के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता में बच्चों के बस्ते और उनके परिधान का मूल्यांकन किया गया। इसमें बच्चों की रचनात्मकता देखने लायक थी।
- वैष्णवी कुमारी – प्रथम स्थान
- आरव साहू – द्वितीय स्थान
- कार्तिक सिंह – तृतीय स्थान
शिशु मंदिर पहाड़ा प्रतियोगिता
गणितीय कौशल और भाषाई पकड़ को मजबूत करने के लिए आयोजित इस प्रतियोगिता में छात्रों ने त्वरित गति से पहाड़े सुनाकर सबको चकित कर दिया।
- लव कुमार कुशवाहा – प्रथम स्थान
- लोकेश नायक – द्वितीय स्थान
- तरुण सिंह – तृतीय स्थान
ओजस्वी हिंदी भाषण प्रतियोगिता
इस प्रतियोगिता में भैया-बहनों ने हिंदी के महत्व और राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका पर अत्यंत प्रभावशाली विचार प्रस्तुत किए।
- कृष्णा साहू – प्रथम स्थान
- आरोही कुमारी – द्वितीय स्थान
- निधि अग्रवाल – तृतीय स्थान
निबंध लेखन प्रतियोगिता
छात्रों ने अपनी लेखन शैली और वैचारिक क्षमता का परिचय देते हुए हिंदी भाषा के विविध आयामों पर सुंदर निबंध लिखे।
- अभिषेक नायक – प्रथम स्थान
- रेशमा कुमारी – द्वितीय स्थान
- मनिता कुमारी – तृतीय स्थान
सभी विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि और प्रधानाचार्य द्वारा मंच पर पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की गई।
मुख्य अतिथि डोमनचंद महतो का प्रेरणादायी संबोधन
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डोमनचंद महतो ने विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए हिंदी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का साधन नहीं है, बल्कि यह देश को एक सूत्र में पिरोने का माध्यम है।
डोमनचंद महतो ने कहा: "हिंदी अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली संस्कृति, सभ्यता और राष्ट्रीय अस्मिता का प्राण है। हमें बिना किसी झिझक के स्वाभिमान के साथ हिंदी को दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए और इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनानी चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि नई पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव से बचते हुए अपनी भाषाई जड़ों को मजबूत करना चाहिए।
प्रधानाचार्य राजेंद्र साहू के विचार और भाषाई विविधता का महत्व
विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री राजेंद्र साहू ने भी कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता की सराहना करते हुए हिंदी को देश की एकता की धुरी बताया।
राजेंद्र साहू ने कहा: "भारत की भाषाई विविधता ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। देश में बोली जाने वाली हिंदी भारत माता के भाल की बिंदिया की भांति सुशोभित है। हिंदी को उसके शुद्धतम रूप में समृद्ध करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी का परम नैतिक कर्तव्य है।"
उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे शिक्षण कार्य में हिंदी के शुद्ध उच्चारण और लेखन पर विशेष ध्यान दें ताकि बच्चे अपनी भाषा पर गर्व कर सकें।
आयोजन समिति और सभी सहयोगियों की सराहनीय भूमिका
इस पूरे भव्य कार्यक्रम का मंच संचालन आचार्य प्रमोद पाणिग्राही ने अत्यंत प्रभावशाली ढंग से किया। वहीं, विभिन्न प्रतियोगिताओं में निष्पक्ष निर्णायक की महत्वपूर्ण भूमिका आचार्य निरंजन सिंह ने कुशलतापूर्वक निभाई। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किशोर भारती के अध्यक्ष द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों और बच्चों का आभार व्यक्त किया।
इस गरिमामय अवसर पर विद्यालय के सभी आचार्य-आचार्या, भैया-बहन, छात्रावास सह-प्रमुख, बस चालक, उपचालक एवं स्वच्छता कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित जनों ने राष्ट्रभाषा के संवर्धन, संरक्षण और दैनिक जीवन में इसके अधिकतम उपयोग का सामूहिक संकल्प लिया।
सत्य संदेश समाचार: भाषाई स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का संदेश
लचरागढ़ के विवेकानंद शिशु विद्या मंदिर में आयोजित यह हिंदी दिवस समारोह केवल एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर अपनी जड़ों से जुड़ने का एक उत्कृष्ट प्रयास है। आज के आधुनिक युग में जब अंग्रेजी भाषा का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे समय में बच्चों को अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रति गौरवान्वित महसूस कराना अत्यंत सराहनीय है। विद्यालय प्रबंधन और वनवासी कल्याण केंद्र का यह प्रयास ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारी संस्कृति और भाषा के संरक्षण के लिए ऐसे आयोजनों की निरंतरता बेहद जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास को न भूले।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भाषा केवल संवाद का साधन नहीं होती, बल्कि यह किसी भी राष्ट्र की संस्कृति, इतिहास और सभ्यता की संवाहक होती है। जब हम अपनी मातृभाषा का सम्मान करते हैं, तो हम अप्रत्यक्ष रूप से अपने देश की संप्रभुता और गौरव को सुदृढ़ कर रहे होते हैं। आइए, हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि अपने दैनिक जीवन में हिंदी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करेंगे और आने वाली पीढ़ी को भी अपनी अनमोल भाषाई विरासत से परिचित कराएंगे। एक सजग नागरिक के रूप में अपनी भाषा को बढ़ावा देना हमारा परम कर्तव्य है।
अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं। इस प्रेरणादायी आयोजन पर अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें। राष्ट्रभाषा के संवर्धन के इस संदेश को अपने मित्रों और परिजनों तक पहुंचाने के लिए इस खबर को अधिक से अधिक शेयर करें और समाज में एक सकारात्मक जागरूकता का संचार करें।
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