संत जेवियर्स कॉलेज सिमडेगा में 'हिंदी की नई उड़ान' कार्यक्रम का भव्य आयोजन डॉ जयंत कुमार कश्यप ने भाषा और अस्मिता के अंतर्संबंधों को रेखांकित किया
संत जेवियर्स कॉलेज में भाषा और साहित्य के संगम पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुआ।

सिमडेगा के संत जेवियर्स कॉलेज में हिंदी विभाग और आईक्यूएसी के संयुक्त तत्वावधान में 'हिंदी की नई उड़ान' विषय पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर डॉ. जयंत कुमार कश्यप ने भाषा और अस्मिता के अंतर्संबंधों पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
- संत जेवियर्स कॉलेज सिमडेगा में हिंदी विभाग, साहित्यिक क्लब और आईक्यूएसी के सौजन्य से हिंदी दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
- मुख्य व्याख्यान में डॉ. जयंत कुमार कश्यप ने "भाषा और अस्मिता का अंतर्सम्बन्ध" विषय पर अपने गहन विचार साझा किए।
- सांस्कृतिक सत्र में कुमार उदय सिंह द्वारा लिखित प्रसिद्ध नुक्कड़ नाटक ‘जनतागिरी’ का विद्यार्थियों द्वारा शानदार मंचन किया गया।
- समारोह के दौरान निबंध, लघु कथा और कविता लेखन प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।
- कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फा. रोशन बा सहित कई गणमान्य प्राध्यापक और लगभग 200 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
झारखंड के सिमडेगा जिला स्थित प्रतिष्ठित संत जेवियर्स कॉलेज में हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर भाषा, साहित्य और संस्कृति के अनूठे संगम का आयोजन किया गया। कॉलेज के हिंदी विभाग, हिंदी साहित्यिक क्लब और आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय "हिंदी की नई उड़ान" रखा गया था। इस गरिमामयी समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, स्वागत भाषण और ईश वंदना नृत्य के साथ हुआ, जिसके बाद मुख्य अतिथियों का स्वागत पौधों के गमले भेंट कर किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं में हिंदी भाषा के प्रति गौरव की भावना जगाना और इसके साहित्यिक महत्व से अवगत कराना था।
बौद्धिक सत्र: भाषा और अस्मिता के अंतर्संबंधों पर गहरा मंथन
समारोह के बौद्धिक सत्र की शुरुआत विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत अत्यंत प्रभावशाली कविता पाठ और भाषण से हुई। इसके बाद मुख्य वक्ता डॉ. जयंत कुमार कश्यप ने “भाषा और अस्मिता का अंतर्सम्बन्ध (हिंदी भाषा के विशेष संदर्भ में)” विषय पर अपना विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने अपने संबोधन में हिंदी भाषा के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
> डॉ. जयंत कुमार कश्यप ने कहा: "भाषा और अस्मिता का गहरा अंतर्सम्बन्ध है और हिंदी भाषा हमारी सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार है।"
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वैश्विक दौर में अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा के प्रति गर्व महसूस करना अत्यंत आवश्यक है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: 'जनतागिरी' नाटक ने मोहा सबका मन
बौद्धिक विमर्श के बाद सांस्कृतिक सत्र का आयोजन किया गया, जो दर्शकों के लिए बेहद आकर्षक रहा। इस सत्र में विद्यार्थियों ने कुमार उदय सिंह द्वारा रचित बहुचर्चित नुक्कड़ नाटक ‘जनतागिरी’ का जीवंत मंचन किया। इस नाटक के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों और आम जनता के अधिकारों व कर्तव्यों को बड़ी ही सहजता और तीखे व्यंग्य के साथ प्रस्तुत किया गया।
नाटक के अतिरिक्त, विद्यार्थियों ने सुमधुर समूह गान और मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किए, जिसने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान कर दिया। इन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह साबित कर दिया कि युवा पीढ़ी न केवल आधुनिकता को अपना रही है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी मजबूती से जुड़ी हुई है।
साहित्यिक प्रतियोगिताएं और विजेता छात्र-छात्राएं
विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को निखारने के लिए इस अवसर पर तीन मुख्य श्रेणियों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था: निबंध लेखन, लघु कथा लेखन, और कविता लेखन। इन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में विजेताओं को प्रमाण-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
निबंध लेखन प्रतियोगिता के परिणाम:
- प्रथम स्थान: कविता तिर्की
- द्वितीय स्थान: सैनी केरकेट्टा
- तृतीय स्थान: प्रिया मांझी
लघु कथा लेखन प्रतियोगिता के परिणाम:
- प्रथम स्थान: जेन रोजलीन बारला
- द्वितीय स्थान: सोफिया किंडो
- तृतीय स्थान: दीपा कुमारी (एम. ए. सेमेस्टर-IV)
कविता लेखन प्रतियोगिता के परिणाम:
- प्रथम स्थान: जेन रोजलीन बारला
- द्वितीय स्थान: दीपा कुमारी (सेमेस्टर-VIII)
- तृतीय स्थान: प्रतिभा कुजूर
आयोजन समिति और गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य कार्यक्रम के सफल संपादन में कॉलेज प्रशासन और प्राध्यापकों की अहम भूमिका रही। मंच का कुशल संचालन स्नातकोत्तर सेमेस्टर-I की छात्रा सुमोरिया डुंगडुंग और स्नातक सेमेस्टर-VIII की छात्रा अनुपा मिंज ने संयुक्त रूप से किया।
कार्यक्रम के समापन पर हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष स. प्रा. सीमा खेस्स ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, कॉलेज प्रशासन, प्राध्यापकों, प्रतिभागी विद्यार्थियों और पर्दे के पीछे काम करने वाले सभी सहयोगियों के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का विधिवत समापन राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
इस ऐतिहासिक अवसर पर संत जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फा. रोशन बा, विज्ञान समन्वयक डॉ. फा. नाबोर लकड़ा, डॉ. फा. सुशील बिलुंग, डॉ. सुनील केरकेट्टा, निशी तिर्की, और प्रतिमा परधिया सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक और लगभग 200 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे समय उत्साहपूर्वक कार्यक्रम का आनंद लिया।
सत्य संदेश समाचार: भाषाई गौरव और युवा पीढ़ी का दायित्व
संत जेवियर्स कॉलेज सिमडेगा का यह आयोजन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सुदूर क्षेत्रों में भी हमारी युवा पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति कितनी संवेदनशील है। आज के तकनीकी और अंग्रेजी प्रधान युग में इस तरह के बौद्धिक और सांस्कृतिक आयोजन अत्यंत आवश्यक हैं, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। कॉलेज प्रशासन और हिंदी विभाग का यह प्रयास सराहनीय है कि उन्होंने केवल भाषणों तक सीमित न रहकर नाटक और लेखन प्रतियोगिताओं के जरिए विद्यार्थियों को अभिव्यक्ति का मंच दिया। हमारी भाषा ही हमारी असली पहचान है, और इसका संरक्षण हर नागरिक का कर्तव्य है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
भाषा केवल शब्दों का समूह नहीं होती, बल्कि यह हमारे पूर्वजों की विरासत और हमारी सोच का आईना होती है। सिमडेगा के विद्यार्थियों ने जिस तरह अपनी कला और लेखन के माध्यम से हिंदी के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित किया है, वह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। हमें अपने दैनिक जीवन में अपनी मातृभाषा का आदर करना चाहिए और नई पीढ़ी को इसके समृद्ध साहित्य से परिचित कराना चाहिए।
सजक रहें, सक्रिय बनें। इस हिंदी दिवस के अवसर पर आइए हम सब मिलकर अपनी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा के संवर्धन का संकल्प लें। आपको यह खबर कैसी लगी? कॉलेज के इस प्रयास पर अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें, इस लेख को सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें और अपनी भाषा के प्रति जागरूकता फैलाने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।
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