कुरडेग के केन्दूटोली में डोम समाज का भव्य करमा मिलन समारोह तीन राज्यों के लोगों ने एकजुटता और शिक्षा के संकल्प के साथ मनाया पारंपरिक उत्सव
डोम समाज ने एकजुटता और शिक्षा के संकल्प के साथ मनाया पारंपरिक उत्सव।

सिमडेगा के कुरडेग प्रखंड अंतर्गत केन्दूटोली में आयोजित डोम समाज के करमा मिलन समारोह में झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सैकड़ों लोग शामिल हुए। इस दौरान समाज की एकजुटता, बच्चों की शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर विशेष बल दिया गया। मुख्य अतिथि कमलेश राम ने युवा पीढ़ी के शैक्षणिक उत्थान को समाज की प्रगति का मुख्य आधार बताया।
- सिमडेगा जिले के कुरडेग प्रखंड के केन्दूटोली में डोम समाज कल्याण संघ द्वारा भव्य करमा मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
- इस ऐतिहासिक महासमागम में झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा राज्यों से बड़ी संख्या में समाज के लोग और प्रतिनिधि शामिल हुए।
- मुख्य अतिथि झारखंड भाजपा अनुसूचित मोर्चा के उपाध्यक्ष कमलेश राम ने युवाओं को शिक्षा से जोड़ने और कुरीतियों को मिटाने का आह्वान किया।
- विशिष्ट अतिथियों में जशपुर जिला अध्यक्ष गंगा राम, बलभद्र नायक, तिलक राम और दुखु नायक ने समाज के उत्थान पर विचार साझा किए।
- समारोह के दौरान विभिन्न गांवों से आए कलाकारों ने मनमोहक पारंपरिक नृत्य और करमा गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांध दिया।
झारखंड के सिमडेगा जिला अंतर्गत कुरडेग प्रखंड के केन्दूटोली गांव में डोम समाज कल्याण संघ के तत्वावधान में एक भव्य करमा मिलन समारोह का आयोजन किया गया। इस विशेष उत्सव में न केवल स्थानीय लोग, बल्कि पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़ और ओडिशा से भी डोम समाज के प्रतिनिधि और आम नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देने के साथ-साथ शिक्षा के प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना था। आधुनिकता के इस दौर में अपनी जड़ों से जुड़े रहने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के लिए यह आयोजन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
तीन राज्यों के महासंगम से मजबूत हुई सामाजिक एकता
कुरडेग प्रखंड का केन्दूटोली क्षेत्र उस समय ऐतिहासिक क्षण का गवाह बना, जब डोम समाज कल्याण संघ के बैनर तले आयोजित करमा मिलन समारोह में तीन राज्यों की सीमाएं सिमट गईं। इस कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा, छत्तीसगढ़ के जशपुर और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों से डोम समाज के लोग भारी संख्या में पहुंचे। वक्ताओं ने कहा कि भौगोलिक दूरियां हमारे सामाजिक ताने-बाने को कमजोर नहीं कर सकती हैं। इस तरह के अंतर-राज्यीय सम्मेलनों से न केवल आपसी संबंध मजबूत होते हैं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे समाज के लोगों की समस्याओं और उनके समाधान पर भी सामूहिक विमर्श संभव हो पाता है। समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने इस बात पर सहमति जताई कि जब तक तीनों राज्यों के लोग एक मंच पर आकर एक-दूसरे का सहयोग नहीं करेंगे, तक तक समाज का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।
शिक्षा और सांस्कृतिक संरक्षण पर मुख्य अतिथियों का विशेष जोर
समारोह के मुख्य अतिथि झारखंड भाजपा अनुसूचित मोर्चा के उपाध्यक्ष कमलेश राम ने अपने संबोधन में समाज के भीतर शिक्षा की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह एकमात्र औजार है जिसके माध्यम से समाज की भावी पीढ़ी को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाया जा सकता है।
कमलेश राम ने कहा: "समाज की प्राचीन परंपरा और संस्कृति को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। युवा पीढ़ी को केवल पारंपरिक कार्यों तक सीमित न रखकर उन्हें उच्च शिक्षा से जोड़ना होगा। जब हमारे बच्चे पढ़ेंगे, तभी वे देश और समाज के विकास में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकेंगे। हमें बच्चों को सही दिशा देनी होगी और समाज के विकास के लिए बिना किसी संकोच के सामूहिक रूप से प्रयास करने होंगे।"
विशिष्ट अतिथि और जशपुर जिला डोम समाज कल्याण संघ के अध्यक्ष गंगा राम ने भी शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि समाज को संगठित करने के लिए बौद्धिक विकास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समाज के अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को स्कूल अवश्य भेजें, चाहे इसके लिए उन्हें कितने ही संघर्ष क्यों न करने पड़ें।
पारंपरिक गीतों और नृत्यों से सजी सांस्कृतिक संध्या
करमा मिलन समारोह केवल भाषणों और चर्चाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह लोक कला और संस्कृति का एक अनूठा संगम भी बन गया। विभिन्न गांवों से पहुंचे महिला और पुरुष कलाकारों ने मांदर, ढोल और नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक करमा नृत्य प्रस्तुत किया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे कलाकारों ने अपनी कला से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक गीतों के माध्यम से प्रकृति की पूजा, भाई-बहन के प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता की आंधी में भी डोम समाज ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और जड़ों को पूरी जीवंतता के साथ बचाकर रखा है। युवाओं ने भी इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जो इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अपनी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
समाज के प्रबुद्ध जनों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय समिति और समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मंच पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में बलभद्र नायक, तिलक राम और दुखु नायक उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज की कुरीतियों जैसे नशाखोरी और बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के सफल संचालन और व्यवस्थापन में डोम समाज के कुरडेग प्रखंड अध्यक्ष सूरजन नायक, सचिव सुनील नायक, सक्रिय सदस्य मोहन नायक, रातु डोम, और लीलम्बर नायक सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात मेहनत की। इन सभी पदाधिकारियों ने मंच से घोषणा की कि आने वाले समय में प्रखंड स्तर पर शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष जागरूकता शिविर आयोजित किए जाएंगे और गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए समाज स्तर पर एक कोष का निर्माण किया जाएगा।
सत्य संदेश समाचार: सामाजिक चेतना और एकजुटता का नया सवेरा
यह करमा मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हाशिए पर खड़े समाज की मुख्यधारा में आने की छटपटाहट और उनके संगठित प्रयास का जीवंत प्रमाण है। जब तक समाज के अंतिम पायदान पर मौजूद व्यक्ति को शिक्षा, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होंगे। शासन और प्रशासन को भी ऐसे आयोजनों से सीख लेते हुए डोम समाज की बुनियादी समस्याओं जैसे सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा की पहुंच को दुरुस्त करने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए। सामाजिक स्तर पर शुरू हुई इस सकारात्मक पहल का हम स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि यह एकजुटता केवल आयोजनों तक सीमित न रहकर धरातल पर बदलाव लाएगी।
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एक सजग और शिक्षित समाज ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। कुरडेग में डोम समाज द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य समाजों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत है। हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहरों पर गर्व होना चाहिए, लेकिन साथ ही आधुनिक युग की मांग यानी 'शिक्षा' को भी गले लगाना होगा। आइए, हम सब मिलकर समाज से अंधकार और कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लें और अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए उन्हें शिक्षित करने की जिम्मेदारी उठाएं।
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