सिमडेगा के सलडेगा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में मनेगा भव्य करम महोत्सव पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ जुटेंगे हजारों श्रद्धालु
सलडेगा सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में दो दिवसीय पारंपरिक करम महोत्सव का भव्य आयोजन होगा।

सिमडेगा के सलडेगा स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आगामी 22 सितंबर 2026 से दो दिवसीय भव्य करम महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। वनवासी कल्याण केंद्र की शैक्षणिक इकाई द्वारा आयोजित इस प्रकृति पर्व में पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे मुख्य अतिथि होंगे। पंडित विद्याबंधु शास्त्री के सानिध्य में होने वाले इस पारंपरिक पूजन को लेकर क्षेत्र में भारी उत्साह है।
- सरस्वती शिशु विद्या मंदिर सलडेगा में 22 सितंबर 2026 को संध्या 7:00 बजे करम राजा के पूजन के साथ दो दिवसीय महोत्सव शुरू होगा।
- उत्सव के दूसरे दिन 23 सितंबर 2026 को प्रातः 8:00 बजे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ करम राजा का विसर्जन किया जाएगा।
- कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिमडेगा के पुलिस अधीक्षक श्रीकांत एस. खोटरे (भा.पु.से.) उपस्थित रहकर गरिमा बढ़ाएंगे।
- सुप्रसिद्ध पुरोहित पंडित श्री विद्याबंधु शास्त्री जी द्वारा पूर्ण वैदिक एवं पारंपरिक विधि-विधान से करम राजा का पूजन संपन्न कराया जाएगा।
- विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने इस भव्य आयोजन में समस्त क्षेत्रवासियों, अभिभावकों और श्रद्धालुओं को सादर आमंत्रित किया है।
झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति, पारंपरिक आस्था और प्रकृति के प्रति अगाध कृतज्ञता को अभिव्यक्त करने वाला महान पर्व करम महोत्सव इस बार सिमडेगा में बेहद खास होने जा रहा है। वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड की शैक्षणिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, सलडेगा में आगामी 22 सितंबर को इसका भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दो दिवसीय सांस्कृतिक और धार्मिक अनुष्ठान को लेकर विद्यालय प्रबंधन से लेकर छात्र-छात्राओं और स्थानीय ग्रामीणों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। यह आयोजन न केवल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ेगा बल्कि सामाजिक समरसता का एक अनूठा संदेश भी प्रसारित करेगा।
प्रकृति और लोक-संस्कृति के संरक्षण का अनूठा संकल्प
झारखंड की पावन भूमि हमेशा से ही प्रकृति पूजक रही है। यहाँ के पर्व-त्यौहार सीधे तौर पर जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देते हैं। इसी कड़ी में सलडेगा के सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में आयोजित होने वाला करम महोत्सव इस वर्ष अपनी अनूठी पहचान बनाने के लिए तैयार है। विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि आज के आधुनिक युग में जहाँ युवा पीढ़ी अपनी लोक-संस्कृति से दूर होती जा रही है, ऐसे में इस तरह के आयोजन बच्चों में अपनी मिट्टी, अपनी परंपरा और अपनी जड़ों के प्रति गौरव का भाव पैदा करते हैं।
श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड के मार्गदर्शन में इस पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई है। इस आयोजन के माध्यम से न केवल पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति होगी, बल्कि सामूहिक रूप से प्रकृति की रक्षा का संकल्प भी लिया जाएगा। यह महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान न होकर संपूर्ण समाज को एक सूत्र में पिरोने का एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है।
दो दिवसीय महोत्सव का विस्तृत कार्यक्रम और पूजन विधि
इस वर्ष का करम महोत्सव दो दिनों तक पूरे विधि-विधान के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को संध्या 7:00 बजे से होगी। इस दौरान विद्यालय परिसर में करम वृक्ष की डाल को स्थापित कर करम राजा का आह्वान किया जाएगा। पूजन की पूरी प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए सुप्रसिद्ध पुरोहित पंडित श्री विद्याबंधु शास्त्री जी को आमंत्रित किया गया है। वे पारंपरिक मंत्रोच्चार और वैदिक रीति-रिवाज के साथ करम देव की आराधना संपन्न कराएंगे।
इसके पश्चात, अगले दिन यानी बुधवार, 23 सितंबर 2026 को प्रातः 8:00 बजे करम राजा के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू होगी। पारंपरिक गीतों और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ करम देव को विदाई दी जाएगी। इस दो दिवसीय अनुष्ठान के दौरान पूरा सलडेगा क्षेत्र भक्ति और सांस्कृतिक रंगों में सराबोर रहेगा।
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे एसपी श्रीकांत एस. खोटरे
इस गरिमामयी आयोजन को और अधिक विशिष्ट बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिमडेगा के लोकप्रिय पुलिस अधीक्षक श्री श्रीकांत एस. खोटरे (भा.पु.से.) उपस्थित रहेंगे। उनकी उपस्थिति न केवल विद्यालय के बच्चों का उत्साहवर्धन करेगी, बल्कि यह समाज में पुलिस और जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम साबित होगी। प्रशासनिक अधिकारियों की ऐसी सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भागीदारी यह दर्शाती है कि शासन-प्रशासन भी स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
नई पीढ़ी को पारंपरिक मूल्यों से जोड़ने की अनूठी पहल
विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ऐसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य बच्चों में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का बीजारोपण करना है।
प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार पाठक ने कहा: "करम महोत्सव केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक समरसता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का उत्सव है। करम वृक्ष की पूजा के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण, सुख-समृद्धि, पारिवारिक मंगल एवं सामाजिक एकता की कामना की जाएगी। विद्यालय में इस आयोजन के माध्यम से भैया-बहनों को झारखंड की गौरवशाली लोकसंस्कृति एवं पारंपरिक जीवन-मूल्यों से भी परिचित कराया जाएगा।"
विद्यालय प्रबंधन ने इस पावन अवसर पर सिमडेगा जिले के सभी श्रद्धालुओं, अभिभावकों, शुभचिंतकों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस महोत्सव में सपरिवार शामिल हों। सभी की सहभागिता से ही यह महापर्व और भी अधिक भव्य, जीवंत और स्मरणीय बन सकेगा।
सत्य संदेश समाचार: सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण ही वास्तविक प्रगति
यह आयोजन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ हमारी पारंपरिक और सांस्कृतिक विरासत को सहेजना कितना आवश्यक है। विद्यालय स्तर पर ऐसे आयोजनों से बच्चों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और अपनी जड़ों के प्रति गौरव की भावना जागृत होती है। सिमडेगा जैसे आदिवासी बहुल और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्र में ऐसे आयोजनों को बढ़ावा देना सराहनीय है। प्रशासनिक अधिकारियों की इसमें सहभागिता समाज में एक सकारात्मक और समरस वातावरण का निर्माण करती है।
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हमारी लोक-संस्कृति और प्रकृति पूजक परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं। आइए, इस करम महोत्सव के अवसर पर हम सभी न केवल अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संकल्प लें। जब हम अपनी जड़ों से जुड़ेंगे, तभी एक सशक्त और जागरूक समाज का निर्माण होगा।
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