सिमडेगा के जूनियर कैंब्रिज स्कूल में चौथे विद्यार्थी नेतृत्व सम्मेलन का सफल आयोजन नन्हे बच्चों ने मंच पर बिखेरा अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का जलवा
जूनियर कैंब्रिज स्कूल के नन्हे बच्चों ने बीस शैक्षणिक विषयों पर दी शानदार प्रस्तुतियां।

सिमडेगा के जूनियर कैंब्रिज स्कूल में अभियंता दिवस के अवसर पर चौथे विद्यार्थी-नेतृत्व सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों ने 20 विभिन्न शैक्षणिक विषयों पर स्वनिर्मित मॉडलों के साथ शानदार प्रस्तुतियां दीं। बच्चों के इस मंचीय प्रदर्शन और तार्किक आत्मविश्वास ने अभिभावकों को बेहद प्रभावित किया।
- सिमडेगा के जूनियर कैंब्रिज स्कूल में अभियंता दिवस के पावन अवसर पर चौथा विद्यार्थी-नेतृत्व सम्मेलन धूमधाम से आयोजित किया गया।
- प्राथमिक स्तर के नन्हे बच्चों ने गणित, विज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी के 20 महत्वपूर्ण विषयों पर स्वनिर्मित मॉडलों के साथ जीवंत प्रस्तुतियां दीं।
- कार्यक्रम का सफल संचालन सुमैया परवीन ने किया तथा विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष मनोरमा एक्का ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
- प्रधानाचार्या प्रभा केरकेट्टा की उपस्थिति में आयोजित इस सम्मेलन में सभी प्रतिभागी बच्चों को प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
- नन्हे विद्यार्थियों ने बिना किसी झिझक के अभिभावकों के कठिन प्रश्नों के उत्तर देकर अपनी तार्किक सोच और मंचीय साहस का परिचय दिया।
सिमडेगा जिला मुख्यालय स्थित जूनियर कैंब्रिज स्कूल में अभियंता दिवस के पावन अवसर पर चौथे विद्यार्थी-नेतृत्व सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्राथमिक स्तर यानी कक्षा पहली से लेकर पांचवीं तक के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने मंच पर आकर जिस असाधारण आत्मविश्वास और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों को प्रस्तुत किया, उसने वहां मौजूद सभी अभिभावकों और अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह आयोजन बच्चों के शैक्षणिक और व्यावहारिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।
बच्चों ने स्वनिर्मित मॉडलों से समझाया विज्ञान और गणित का रहस्य
इस सम्मेलन की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि कक्षा 1 से 5 तक के छोटे बच्चों ने कठिन समझे जाने वाले विषयों को बेहद सरल तरीके से प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों ने हिंदी, अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के कुल 20 विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां तैयार की थीं। इनमें वृत्त के प्रकार, मानव परिसंचरण तंत्र, हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले वस्त्र, क्रिया के विभिन्न रूप, ठोस आकृतियाँ तथा संज्ञा और सर्वनाम जैसे विषय शामिल थे।
इन विषयों को समझाने के लिए बच्चों ने खुद से चार्ट पेपर, थर्माकोल और अनुपयोगी सामग्रियों की सहायता से सुंदर और शैक्षणिक मॉडल तैयार किए थे। विज्ञान के मॉडलों के माध्यम से बच्चों ने मानव शरीर की कार्यप्रणाली को दर्शाया, तो वहीं गणित के ठोस आकारों के माध्यम से ज्यामिति की अवधारणाओं को स्पष्ट किया। व्याकरण के नियमों को भी बच्चों ने रोचक खेलों और चार्ट्स के जरिए प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मकता का लोहा मनवाया।
रटने की परंपरा से हटकर समझ और तार्किक क्षमता का प्रदर्शन
आमतौर पर प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों में रटने की प्रवृत्ति देखी जाती है, लेकिन इस सम्मेलन में बच्चों ने इसके बिल्कुल विपरीत प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने किसी भी विषय को रटकर सुनाने के बजाय उसकी मूल अवधारणा को गहराई से समझाया। उन्होंने मंच पर आकर न केवल अपनी बात रखी, बल्कि दर्शकों दीर्घा में बैठे अभिभावकों और शिक्षकों को प्रश्न पूछने के लिए भी आमंत्रित किया।
प्रस्तुति के दौरान जब अभिभावकों ने बच्चों से विषयों से संबंधित कठिन प्रश्न पूछे, तो बच्चों ने बिना किसी घबराहट के, बेहद धैर्यपूर्वक और तार्किक ढंग से उनके उत्तर दिए। बच्चों की इस स्पष्ट वाणी, गहरी समझ, त्वरित सोच और बेहतरीन मंचीय व्यवहार को देखकर स्कूल परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उपस्थित अतिथियों ने माना कि यह बच्चों के वास्तविक रूप से सीखने की गुणवत्ता को दर्शाता है।
नेतृत्व कौशल, टीम वर्क और व्यक्तित्व विकास का अनूठा संगम
इस विद्यार्थी-नेतृत्व सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भीतर छिपे नेतृत्व गुणों को बाहर लाना था। आयोजन के दौरान यह साफ दिखाई दिया कि बच्चों ने न केवल स्वतंत्र रूप से अपनी प्रस्तुतियां तैयार की थीं, बल्कि उन्होंने अपने ज्ञान को बेहद व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत भी किया। मंच संचालन से लेकर अपनी बात रखने तक, हर जगह बच्चों के भीतर का आत्मविश्वास झलक रहा था।
इसके अलावा, जिन बच्चों ने समूह में प्रस्तुतियां दीं, उन्होंने आपसी सहयोग, तालमेल और बेहतरीन समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। एक-दूसरे की मदद करते हुए अपनी बात को पूरा करना और मंच पर अनुशासन बनाए रखना यह साबित करता है कि बच्चे कम उम्र में भी जिम्मेदारी को बखूबी संभाल सकते हैं। यह अनुभव निश्चित रूप से उनके भविष्य के व्यक्तित्व निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।
विद्यालय प्रबंधन की सराहना और सम्मान समारोह
कार्यक्रम का सफल और सुचारू संचालन विद्यालय की शिक्षिका सुमैया परवीन द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा एक्का और प्रधानाचार्या श्रीमती प्रभा केरकेट्टा विशेष रूप से उपस्थित रहीं और उन्होंने बच्चों के हर एक प्रयास की सराहना की।
> प्रधानाचार्या श्रीमती प्रभा केरकेट्टा ने कहा: "मंच पर खड़े होकर अपनी बात स्पष्ट और आत्मविश्वास के साथ रखना भी अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनके भीतर मंचीय साहस और स्वतंत्र सोच का विकास करना है ताकि वे भविष्य में किसी भी चुनौती का सामना कर सकें।"
> विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्ष श्रीमती मनोरमा एक्का ने कहा: "इस छात्र-नेतृत्व सम्मेलन ने बच्चों को अपनी सीख को प्रदर्शित करने और स्वयं पर विश्वास करने का एक बेहतरीन मंच दिया है। बच्चों का यह प्रदर्शन उनके शैक्षणिक और मानसिक विकास की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।"
कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागी छात्र-छात्राओं को उनकी सक्रिय भागीदारी, कड़ी मेहनत और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विशेष सहभागिता प्रमाण-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त करते समय नन्हे बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही उत्साह और गर्व की चमक देखने को मिल रही थी।
सत्य संदेश समाचार: रटने वाली शिक्षा प्रणाली के खिलाफ एक सकारात्मक पहल
जूनियर कैंब्रिज स्कूल द्वारा आयोजित यह सम्मेलन इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को व्यावहारिक और मंचीय अवसर प्रदान किए जाएं, तो वे रटने की संकीर्ण प्रवृत्ति से मुक्त हो सकते हैं। आज के दौर में जहां केवल अंकों पर ध्यान दिया जाता है, वहां बच्चों के व्यक्तित्व, संवाद कौशल और नेतृत्व क्षमता को निखारना बेहद जरूरी है। विद्यालय प्रशासन की यह पहल सराहनीय है और क्षेत्र के अन्य शैक्षणिक संस्थानों को भी इस तरह के व्यावहारिक आयोजनों से प्रेरणा लेनी चाहिए ताकि हमारे बच्चों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके।
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शिक्षा का वास्तविक अर्थ केवल अक्षरों का ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी असीम संभावनाओं और आत्मविश्वास को जगाना है। जब हमारे नन्हे बच्चे मंच पर खड़े होकर बिना किसी भय के अपनी बात रखते हैं, तो वे एक जागरूक, सशक्त और तार्किक समाज की मजबूत नींव रख रहे होते हैं। एक अभिभावक और जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम बच्चों की ऐसी रचनात्मक और व्यावहारिक पहलों का खुलकर समर्थन करें और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रेरित करें।
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