मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग बानो में मनाया गया आयुर्वेद दिवस
छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली और प्रकृति संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई।

मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बानो में बुधवार को आयुर्वेद दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को आयुर्वेद, स्वस्थ जीवनशैली और प्रकृति संरक्षण के महत्व की जानकारी दी गई। संस्थान के निदेशक डॉ. प्रह्लाद मिश्रा ने संतुलित जीवन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
- मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बानो में बुधवार को आयुर्वेद दिवस मनाया गया।
- इस वर्ष की थीम ‘मानव और धरती के लिए आयुर्वेद’ रखी गई।
- डॉ. प्रह्लाद मिश्रा ने स्वस्थ जीवन के लिए प्रकृति के साथ संतुलन जरूरी बताया।
- छात्राओं को पौष्टिक आहार, योग, व्यायाम और पर्याप्त नींद अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
- कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।
सिमडेगा/बानो। मदर टेरेसा कॉलेज ऑफ नर्सिंग, बानो में बुधवार को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं को आयुर्वेद की उपयोगिता, स्वस्थ जीवनशैली और मानव जीवन के साथ प्रकृति के संतुलन के महत्व की जानकारी दी गई।
आयुर्वेद को जीवन विज्ञान के रूप में समझाया
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि आयुर्वेद केवल रोगों के उपचार तक सीमित चिकित्सा पद्धति नहीं है, बल्कि स्वस्थ जीवन, दीर्घायु, संतुलित आहार, उचित दिनचर्या और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर आधारित जीवन विज्ञान है।
इस वर्ष आयुर्वेद दिवस की थीम ‘मानव और धरती के लिए आयुर्वेद’ रखी गई है। इस दौरान औषधीय पौधों के महत्व, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने पर चर्चा की गई।
छात्राओं को संतुलित एवं पौष्टिक आहार लेने, नियमित व्यायाम और योग करने, पर्याप्त नींद लेने तथा तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
प्रकृति संरक्षण पर डॉ. प्रह्लाद ने दिया जोर
संस्थान के निदेशक डॉ. प्रह्लाद मिश्रा ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण तनाव और जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में निवारक स्वास्थ्य, पौष्टिक आहार, प्रकृति संरक्षण और संतुलित जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया हर्बल लाइफस्टाइल की ओर बढ़ रही है और आयुर्वेद के सिद्धांतों के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
डॉ. प्रह्लाद मिश्रा ने कहा कि स्वस्थ जीवन के लिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना जरूरी है। औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
संस्थान के शिक्षक और छात्राएं रहीं मौजूद
कार्यक्रम में सचिव निभा मिश्रा, जीएनएम प्राचार्या एरेन बेक, एएनएम प्राचार्या निशि डुंगडुंग और एडमिनिस्ट्रेटर रविकांत मिश्रा सहित संस्थान के सभी ट्यूटर और छात्राएं उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम के अंत में छात्राओं ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने का संकल्प लिया।
सत्य संदेश समाचार: स्वस्थ जीवन के साथ प्रकृति संरक्षण पर जोर
आयुर्वेद दिवस के माध्यम से छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली और प्रकृति के बीच संबंध की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में पौष्टिक आहार, योग, व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवन को महत्वपूर्ण बताया गया। औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी इस संदेश का अहम हिस्सा रहा।
स्वस्थ समाज के लिए निवारक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण दोनों पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम युवाओं को दैनिक जीवन में बेहतर स्वास्थ्य आदतें अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
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स्वास्थ्य केवल बीमारी से बचने का नाम नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली अपनाने से भी जुड़ा है।
प्रकृति और स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझना आज के समय में जरूरी है।
आयुर्वेद के साथ स्वस्थ आदतों और पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाएं।
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